Wednesday, 18 March 2026

परमात्मा से कम मुझे कुछ भी स्वीकार्य नहीं है ---

 परमात्मा से कम मुझे कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। एक प्रबल आकर्षण है जो मुझे अपनी ओर खींच रहा है। मैं स्वयं को रोक नहीं पा रहा हूँ। रोकने का प्रयास करता हूँ तो हृदय में बड़ी पीड़ा होती है।

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मेरे लिए हृदय शब्द का अर्थ -- वक्षस्थल में दो स्तनों के मध्यस्थ मर्मांग नहीं है जो रक्त का संचार करता है। मेरे लिए "हृदय" का अर्थ है — 'चेतना' — जो भावना और बुद्धि दोनों को दर्शाती है। मैं जब कहता हूँ कि भगवान मेरे हृदय में हैं, तो इसका अर्थ है कि भगवान मेरी चेतना में हैं। हृदयहीन का अर्थ है भावना और बुद्धि से हीन।
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मैं एक ऐसे वातावरण में रहना चाहता हूँ जहाँ के स्पंदनों में परमात्मा की निरंतर प्रत्यक्ष उपस्थिति हो। और ऐसे ही मनुष्यों के साथ रहना चाहता हूँ जिनके चैतन्य में परमात्मा निरंतर स्पंदित होते हों। यदि उपरोक्त वातावरण असंभव है तो उसका निर्माण मेरे चैतन्य में परमात्मा स्वयं करेंगे। परमात्मा से कम मुझे कुछ भी स्वीकार्य नहीं है, और परमात्मा से कम कोई अपेक्षा भी मुझ से न करें।
ॐ तत् सत्॥ ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२६ फरवरी २०२६

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