आज प्रातः भोर में तीन बजे के लगभग मैं सो रहा था, तब सूक्ष्म जगत में एक ज्योति मेरे समक्ष प्रकट हुई जिसने तुरंत ही नींद से और बिस्तर से उठा दिया। स्वभाविक रूप से हो रहा मेरा अजपा-जप आरंभ हो गया, और मैं सीधा बैठ गया। एक Oscillator की तरह मेरी सूक्ष्म देह के समक्ष उसका Oscillation पूरी सृष्टि को स्पंदित और क्रियाशील कर रहा था। मैंने उससे पूछा कि तुम्हें ऊर्जा कहाँ से मिलती है? उसने कहा कि मैं स्वयं ही ऊर्जा हूँ। वह ज्योति सूक्ष्म देह के सहस्त्रारचक्र में प्रवेश कर गई और लुप्त हो गई। उस ज्योति का प्राकट्य एक पाठ पढ़ा गया। मेरे लिए यह एक महत्वहीन सामान्य घटना थी, लेकिन फिर भी उसे स्वयं के लाभार्थ ही यहाँ लिख लिया है। थोड़ी देर में बात आयी-गयी हो जाएगी और मैं इसे भूल जाऊंगा। २९ अगस्त २०२२