Saturday, 29 March 2025

बेरोजगारी दूर करने का पुराना चीनी तरीका जो वहाँ वर्षों पूर्व माओ के समय में कुछ काल के लिए था ---

सारे बेरोजगार सुबह आठ बजे लाइन में खड़े कर दिए जाते थे| हाथ में झाडू थमा कर सडकों की सफाई पर या कहीं अन्यत्र मजदूरी पर भेज दिया जाता था| किसी भी बेरोजगार को मिले हुए अपने काम को मना करने का अधिकार नहीं था| दो बार भोजन मिल जाता और सिगरेट पीने के लिए कुछ पैसा| कोई वेतन नहीं| जिसकी पदोन्नती हो जाती उसको कुछ अधिक पैसा शराब पीने को मिल जाता| जितनी पदोन्नती उतना ही अच्छा भोजन और एक जोड़ी अतिरिक्त ड्रेस| वेतन नहीं मिलता था| रहने और खाने की व्यवस्था हो जाती थी|

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पुनश्चः :---- सन १९८५ तक चीन भारत से नहुत अधिक पिछड़ा हुआ था| सन १९६२ के युद्ध में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जान-बूझ कर अपने ही देश भारत को हरवा दिया था। जब महा कामुक लंपट लालची व्यक्ति किसी देश का शासक होता है तब उस देश का यही हाल होता है। चीनी लोग तो बहुत अधिक डरपोक होते हैं|

नवरात्रों में हवन ---

इन नवरात्रों में देश-विदेश में अनेक लोग हवन करने लगे हैं| हवन में जिन कंडों (उपलों/छाणो) का उपयोग किया जाये वे देशी गाय के गोबर के हों| घी भी देशी गाय के दूध से निर्मित हो| भैंस के दूध से बने घी का प्रयोग हवन में न करें| यदि संसाधनों की कमी हो तो कम से कम ११ आहुती ही दे दें| पर दें अवश्य| १०८ आहुतियाँ दे सकें तो सर्वश्रेष्ठ है|

"ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते ...स्वाहा !!" -----
इस श्लोक से १०८ बार अग्नि में हवन ( होम) करें|
नवार्ण मंत्र का जप विधि-विधान से, या सुंदर कांड व हनुमान चालीसा का पाठ, या रामरक्षा स्तोत्र का पाठ, या इन सभी का, घर के सभी सदस्य दिन में कम से कम एक बार साथ-साथ मिल बैठ करें तो भगवान की कृपा तो होगी ही घर में भी सुख-शांति बनी रहेगी|
जो क्रिया योग की साधना करते हैं, वह भी अपने आप में एक यज्ञ है| पूरी निष्ठा से साधना करें|
३० मार्च २०२०

"राजस्थान स्थापना दिवस" की शुभ कामनाएँ .....

 "राजस्थान स्थापना दिवस" की शुभ कामनाएँ .....

आज राजस्थान स्थापना दिवस है| ३० मार्च १९४९ को कई रियासतों को मिलाकर राजस्थान राज्य बनाया गया था| राजस्थान का अधिकांश भाग तो मारवाड़ है, फिर मेवाड़, हाड़ौती, ढुंढाड़, शेखावाटी, भरतपुर व अलवर का क्षेत्र है| पाकिस्तान में चला गया सिंध का अमरकोट भी मारवाड़ का एक महत्वपूर्ण भाग था जो दुर्भाग्य से इस समय पाकिस्तान में है| राज्य का प्रतीक पशु ऊँट और चिंकारा, पक्षी गोडावण, फूल रोहिड़ा, और वृक्ष खेजड़ी है|
आज़ादी के बाद जितने भी युद्ध हुए हैं उनमें सबसे अधिक वीर गति को प्राप्त सैनिक राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के थे| भारत की सेना में सबसे अधिक सैनिक भी शेखावाटी के हैं, और भारत के सबसे अधिक उद्योगपति भी शेखावाटी के हैं| दुर्भाग्य से यह राजस्थान का सबसे अधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है, जब कि राजस्थान में महिला-साक्षरता यहाँ शत-प्रतिशत है, और सबसे अधिक पढे-लिखे लोग भी यहाँ के हैं| कोई प्रभावशाली राजनेता यहाँ नहीं हुआ है, इसलिए यह पिछड़ा हुआ क्षेत्र है|
हमारी चेतना किसी प्रदेश विशेष में न होकर पूरे भारत में और समष्टि में हो| समष्टि का कल्याण ही हमारा कल्याण है| 30 march 2020

यह हमारी नहीं, भगवान की समस्या है कि वे कब हमें दर्शन दें ---

 यह हमारी नहीं, भगवान की समस्या है कि वे कब हमें दर्शन दें ---

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जैसे जैसे जब से भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना बढ़ी है, तब से उन को पाने की अब कोई जल्दी नहीं रही है| जैसे कल प्रातः का सूर्योदय सुनिश्चित है, वैसे ही उन का मिलना भी अब सुनिश्चित ही है| एक तो उन्होने मेरे हृदय में आकर अब अपना डेरा जमा लिया है, यहीं बैठे हैं, और कहीं दूर भी नहीं हैं| दूसरा वे मुझे अपना एक उपकरण यानि निमित्त-मात्र बनाकर सारा कार्य स्वयं कर रहे हैं, अतः उनको पाना अब मेरी समस्या नहीं रही है| यह उनकी ही समस्या है कि वे कब प्रत्यक्ष हों| वियोग का भी एक आनंद है जो योग में नहीं है| वियोग और योग -- दोनों का आनंद उन्हीं का है| ॐ तत्सत् !! ॐ स्वस्ति !!
कृपा शंकर
३० मार्च २०२१

धर्मं-निरपेक्ष और धर्महीन व्यक्ति जीवन में कभी सुखी नहीं हो सकता ---

धर्मं-निरपेक्ष और धर्महीन व्यक्ति जीवन में कभी सुखी नहीं हो सकता। जीवन में सुख-शांति-सुरक्षा व संपन्नता का एकमात्र स्त्रोत परमात्मा है। मार्क्सवादी देशों का मुझे प्रत्यक्ष अनुभव है, वहाँ कोई सुख-शांति नहीं है। यही हाल इस्लामी व ईसाई देशों का है। भारत में लोग सुखी थे, क्योंकि वे संतुष्ट थे। अन्न की कोई कमी नहीं थी। उनके जीवन में आध्यात्म था। देश की सत्ता में शासक वर्ग ऐसा हो जिसे इस राष्ट्र की संस्कृति और अस्मिता से प्रेम हो। . हृदय के द्वार खुले हैं, और खुले ही रहेंगे। भगवान हर समय मेरे साथ एक हैं। वे एक क्षण के लिए भी मेरी दृष्टि से अब ओझल नहीं हो सकते। सारा वर्तमान उनको समर्पित है। भूत और भविष्य का विचार अब कभी जन्म नहीं ले सकता। कोई अंधकार नहीं, प्रकाश ही प्रकाश है। उनके सिवाय कोई भी अन्य नहीं है। केवल वे ही वे हैं। वे ही यह मैं बन गए हैं। .

भक्ति से क्या मिलता है ?
कुछ भी नहीं| जिसे कुछ चाहिए वह इस मार्ग में नहीं आये| उससे जो कुछ उसके पास है वह भी छीन लिया जाता है| यहाँ का नियम है कि जिसके पास कुछ है उसे और भी अधिक दिया जाता है, पर जिस के पास कुछ नहीं है उससे वह सब कुछ छीन लिया जाता है जो कुछ भी उसके पास है| भिखारी को कुछ नहीं मिलता लेकिन पुत्र को सब कुछ दे दिया जाता है|
. तुम भक्ति क्यों करते हो?
यह मेरा स्वभाव और जीवन है| मैं भक्ति के बिना जीवित नहीं रह सकता|
. भक्ति से तुमको क्या मिला?
भगवान का प्रेम| प्रेम के अतिरिक्त कुछ चाहिए भी नहीं था|
इस मार्ग में पाने को कुछ है ही नहीं| सब कुछ खोना ही खोना है| मिलेगा तो सिर्फ प्रेम ही| प्राण भी देना पड़ सकता है|
“कबीरा खड़ा बाजार में, लिए लुकाठी हाथ, जो घर फूंके आपनौ, चले हमारे साथ|" .
कृपा शंकर
३० मार्च २०१९

"किसी भी परिस्थिति में हमें यज्ञ, दान व तप रूपी कर्मों को (यानि भक्ति व साधना को) नहीं छोडना चाहिए।"

"किसी भी परिस्थिति में हमें यज्ञ, दान व तप रूपी कर्मों को (यानि भक्ति व साधना को) नहीं छोडना चाहिए।"
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान का यह स्पष्ट आदेश है --
"यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्।
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम् ॥१८:५॥"
एतान्यपि तु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा फलानि च।
कर्तव्यानीति मे पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम् ॥१८:६॥"
अर्थात् -
यज्ञ, दान और तपरूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये, प्रत्युत उनको तो करना ही चाहिये क्योंकि यज्ञ, दान और तप -- ये तीनों ही कर्म मनीषियों को पवित्र करनेवाले हैं।
हे पार्थ ! इन कर्मों को भी, फल और आसक्ति को त्यागकर करना चाहिए, यह मेरा निश्चय किया हुआ उत्तम मत है।
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"मन लगे या न लगे, चाहे यंत्र की तरह ही करनी पड़े, किसी भी परिस्थिति में ईश्वर की भक्ति और साधना हमें नहीं छोड़नी चाहिए।
हमारी निष्काम साधना एक यज्ञ है, जिसमें हम अपने अन्तःकरण (मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार) की आहुतियाँ भगवान को देते हैं। यज्ञों में स्वयं को भगवान ने जपयज्ञ बताया है। अतः किसी भी परिस्थिति में जपयज्ञ नहीं छोड़ना चाहिए। जो भी जितनी भी मात्रा में जप का संकल्प लिया है, उसे भगवान की प्रसन्नता के लिए करना ही चाहिए।
अपने सदविचारों से हम समष्टि का कल्याण करते हैं, यह बहुत बड़ा दान है।
इन सब के लिए जो प्रयास करते हैं, वह तप है।
कर्मफल और आसक्ति का त्याग ही वास्तविक त्याग है।
हमारी चेतना में हर समय केवल भगवान छाये रहें। सम्पूर्ण जीवन उन्हें समर्पित हो।
कितनी भी बार असफलता मिले, अपने प्रयास को छोड़ो मत। भगवान के पीछे ढीठ की तरह पड़े रहो। सफलता अवश्य मिलेगी।
ॐ तत्सत् !!
कृपा शंकर
३० मार्च २०२४ 

पप्पी दुश्चरित्र पुराण !

 पप्पी दुश्चरित्र पुराण !

बहुत कम लोग जानते होंगे कि विदेशी मूल की वर्णसंकर पापिनी महिला ने अपने कुपुत्र "पप्पू " को देश का प्रधान मंत्री बनाने की योजना उसी दिन से शुरू कर दी थी , जिस दिन पप्पू पैदा हुआ था , इसके लिए पापिनी ने कई कांग्रेसी नेताओं को रास्ते से हटा कर जन्नत भेज दिया , लेख के अगले भाग में यह बात विस्तार से देंगे ,आप ने देखा होगा की आजकल "पप्पी " हिन्दुओ के वोट समेटने के बनारस के घाटों का पानी पी रही है , हिंदी में घाट घाट का पानी पीने वाली औरत को दुश्चरित्र माना जाता जिस तरह पप्पू की मम्मी पापिनी ने बड़ी चालाकी से विरोधी कान्ग्रेसिओं को साफ़ करा दिया , और उसी अनुसरण पप्पी ने भी ससुराल के लोगों को साफ कर दिया ,
जिस दिन 16/2/1998 को राजेन्द्र वडेरा ने अपने छोटे बेटे रॉबर्ट की शादी प्रियंका से की थी ,उसी दिन से उसके सारे परिवार पर मौत का साया मंडरा रहा था। देश विभाजन के बाद राजेन्द्र के पिता एच आर वडेरा सियालकोट से मुरादाबाद आकर बस गए थे। वह पंजाबी हिन्दू थे। उनके दो लड़के थे ,ओमप्रकाश और राजेन्द्र। इनका परिवार पीतल के हस्तशिल्प का व्यवसाय करता था। राजेन्द्र ने मौरीन मेक डोनाड नामकी एक एंग्लो इंडियन महिला से प्रेम विवाह किया था। मौरीन का बाप अँगरेज़ और माँ भारतीय थे। मौरीन हमेशा राजेन्द्र पर ईसाई बनने का दवाब डालती थी ,जिसे वह मना कर देते थे। लेकिन फ़िर भी मौरीन ने अपनी मर्जी से राजेन्द्र का नाम एरिक और अपने ससुर का नाम हैरी रख दिया। इसके लिए मौरीन ने यह तर्क दिया की ऐसा करने से विदेशी ग्राहक आकर्षित होंगे। क्योंकि विदेशी भारतीय वस्तुएं पसंद करते हैं।राजेन्द्र की तीन संतानें हुयीं ,रिचार्ड,मिशेल और रॉबर्ट। धीमे धीमे राजेन्द्र और मौरीन के बीच में इतना मनमुटाव बढ़ गया की मौरीन दिल्ली चली गयी। और वहाँ उसने दक्षिण दिल्ली की अमर कालोनी में अपना एक शोरूम खोल लिया ,जो आज भी चल रहा है। राजेन्द्र ने अपने बड़े लड़के रिचार्ड और लड़की मिशेल की पाहिले ही शादी कर दी थी। जो अपना अपना व्यवसाय कर रहे थे। रॉबर्ट मुरादाबाद की एक गेरेज में मेकेनिक था। दिल्ली में आकर मौरीन की दोस्ती सोनिया से हो गयी ।बाद में यह दोस्ती इतनी बढ़ गयी की सोनिया ने प्रियंका की शादी रॉबर्ट से करदी। और आख़िर प्रियंका राजेन्द्र वडेरा के परिवार के लिए एक यमदूती साबित हुयी।
7-मिशेल वडेरा (-मृत्य 16 अप्रैल 2001 )
यह राजेन्द्र वडेरा की दूसरी संतान थी .अपने पिता की तरह मिशेल भी रॉबर्ट और प्रियंका की शादी के ख़िलाफ़ थी। क्योंकि शादी के बाद प्रियंका कभी ससुराल नहीं गयी। बल्कि रॉबर्ट को ही अपने साथ ले गयी। और वडेरा परिवार के किसी भी व्यक्ति को रॉबर्ट से नहीं मिलने देती थी। रॉबर्ट भी सोनिया और प्रियंका के इशारों पर नाचता था। प्रियंका ने रॉबर्ट को अपना रखैला बना रखा था। मिशेल दिल्ली में ज्वैलरी डिजायनिंग का कम करती थी। वह लोगों को प्रियंका के इस व्यवहार के बारे में बताती थी। और कहती थी की सोनिया और प्रियंका ने मेरे परिवार में फूट दाल दी है। प्रियंका वडेरा परिवार में नफरत के बीज बो रही है.मिशेल प्रियंका के चरित्र पर भी उंगली उठाती थी। फैलते फैलते यह बात सोनिया के कानों तक पहुँच गयी। और जब एक दिन मिशेल जरूरी काम के लिए अपनी कार से जयपुर जा रही थी तो अलवर के पास बेहरोर नाम की जगह पर अचानक उसकी कार पलट गयी। कार में 2 बच्चों को मिला कर 6 लोग थे। स्थानीय लोगों ने काफी मदद की लेकिन मेडिकल सहायता आने से पूर्व ही मिशेल की मौत हो चुकी थी।पुलिस का कहना था की कार के एक तरफ के दोनों टायर फट गए थे .जिस से दुर्घटना हुयी थी। लेकिन गांव वालों का कहना था की उन्होंने गोलियों की आवाज़ सुनी और देखा की एक दूसरी गाडी ने बगल से टक्कर मारी थी। बाद ने मिशेल की लाश को दिल्ली लाया गया जहाँ उसका अन्तिम संस्कार किया गया था। सिर्फ़ उसी दिन राजेन्द्र अपने बेटे से दूसरी बार मिले थे। पहिली बार वह सोनिया द्वारा आयोजित एक समारोह में अपने बेटे से मिले थे। क्योंकि सोनिया ने रॉबर्ट को अपने पिता से मिलने पर रोक लगा थी। जिस से राजेन्द्र ख़ुद को काफी अपमानित महसूस करते थे.
8-रिचार्ड वडेरा-(मृत्यु 20 सितम्बर 2003 )
यह राजेन्द्र वडेरा के बड़े पुत्र थे,और अपनी पत्नी सिमरन के साथ मुरादाबाद में वसंत विहार कालोनी में रहते थे।मौरीन ने सिमरन का ईसाई नाम सायरा कर दिया था। उसकी एक बच्ची भी है। रिचार्ड आर्टेक्स एक्सपोर्ट के नाम से हैंडीक्राफ्ट का व्यवसाय चलाते थे। अपने पिता की तरह रिचार्ड को भी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी .लेकिन जब उसके छोटे भी रॉबर्ट की प्रियंका से शादी हो गयी तो उसके पास कई कांग्रेसी नेता तरह तरह की सिफारासें लेकर आने लगे। और उसे अपने यहाँ भी बुलाने लगे। इसी तरह महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री कृपा शंकर ने रिचार्ड को दो बार मुम्बई बुलाया था.और उस से अपने ख़ास लोगों को टिकिट दिलवाने के लिए सोनिया से सिफारिश करने को कहा था। कृपा शंकर ने रिचार्ड को पहली बार मुम्बई के सन एंड सैंड होटल में ठहराया था। जिसका 50,000/- का बिल कृपा शंकर ने चुकाया था। दूसरी बार रिचार्ड को सरकारी गेस्ट हाउस "हाई माउन्ट "में ठहराया गया था जिसका इंतजाम विलास राव देशमुख ने किया था। जब यह बात तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह ,और कर्णाटक के मुख्य मंत्री एस एम् कृष्णा को पता चली तो उन्होंने इसकी शिकायत सोनिया को कर दी। इस पर सोनिया ने रॉबर्ट पर दवाब डाला की वह सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे की उसका अपने पिता और भाई से कोई सम्बन्ध नहीं है। सोनिया के कहने पर रॉबर्ट ने 16 जनवरी 2002 को अपने वकील अरुण भारद्वाज के माध्यम से अपने पिता और भाई को नोटिस भेज दिया। इस नोटिस में रॉबर्ट ने अपने पिता को अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया था। उसने पिता के स्थान पर "एक व्यक्ति"शब्द लिखा था.नोटिस में कहा गया था की "एक राजेन्द्र वडेरा नाम का आदमी मेरी पत्नी ओर उसके साथ रिचार्ड नामका व्यक्ति मेरी पत्नी प्रियंका के नाम से लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने धोखा दे रहे हैं । मेरा इन लोगों से किसी भी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं है "यह सूचना सभी अखबारों में छपी थी। जब राजेन्द्र को इस नोटिस के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने वकील छेदीलाल मौर्य के माध्यम से रॉबर्ट ,सोनिया, ओर प्रियंका पर मानहानि का दावा करने की धमकी देते हुए जवाब देने को कहा था। उन्होंने अपने नोटिस में रॉबर्ट पर आरोप लगाया था की वह सोनिया ओर प्रियंका के इशारों पर नाच रहा है ओर एक औरत के चक्कर में अपने बाप तक को भूल गया है। राजेन्द्र ने यह भी कहा था की वह रोवेर्ट को अपनी संपत्ति से बेदखल कर देंगे। यह सारी बातें 21 जनवरी 2002 के इंडिया टू डे में विस्तार से छपी थीं। इस घटना के कुछ ही दिनों के बाद रिचार्ड अचानक गायब हो गया था। उसकी पत्नी सिमरन ने काफी खोज की थी। लेकिन वहाँ की पुलिस ने उसकी कोई मदद नहीं की। ओर एक दिन 20/9/2003को रिचार्ड मुरादाबाद के सिविल लाइन की वसंत विहार कालोनी में रहस्यमय रूप से मरा हुआ पाया गया था। राजेन्द्र ने मौत की जांच काने की मांग की थी लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी । ओर मौत को आत्महत्या का मामला बताकर केस बंद कर दिया.
9-राजेन्द्र वडेरा -(म्रत्यु 3 अप्रैल 2003)
यह प्रियंका के ससुर थे। यह दक्षिण दिल्ली के हौज ख़ास इलाके के सिटी इन नामके एक गेस्ट हाउस में रहस्य पूर्ण रूप से मरे पाये गए। इसकी कोई ऍफ़ आई आर दर्ज नहीं की गयी। उनकी आयु 60 वर्ष थी। पुलिस की औपचारिक खानापूर्ति के बाद उनके शव का लोधी रोड के श्मशान में संस्कार कर दिया गया। पाहिले मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था। लेकिन बाद में पुलिस अपने बयान से मुकर गयी। प्रतक्ष्य दर्शिओं के अनुसार राजेन्द्र के गले और शरीर पर चोट के निशान पाते गए थे।इसलिए प्रियंका और सोनिया ने इसे आत्मह्त्या बताने की कोशिश की थी। लेकिन आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से मना कर दिया। पुलिस ने भी अपना मुंह बंद कर लिया। जब पुलिस अपनी कार्यवाही कर रही थी तो मीडिया वालों को काफी दूर हटा दिया था। मौत की खबर मिलने पर राहुल पटना से दिल्ली आया और केवल 12 मिनट वहां रुका। और बाद में मृतक को श्रृद्धांजली देकर सोनिया और प्रियंका को साथ लेकर अमेठी के लिए रवाना हो गया। जहाँ उसे अपने चुनाव का पर्चा दाखिल करना था। जब अमेठी में राहुल का और रायबरेली में सोनिया का जुलूस निकल रहा था तो प्रियंका उसके साथ साथ चल रही थी ,और खुशी से फूली नहीं समा रही थी। उसके चेहरे पर दुःख का कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहा था। अपने पुत्र और पुत्री की मौत के बाद राजेन्द्र अकेले हो गए थे। उनकी पत्नी मौरीन तो पाहिले ही उनसे अलग रह रही थी। इस लिए काफी सालों से राजेन्द्र सिटी इन नामके एक गेस्ट हाउस में रह रहे थे। उनका लड़का पूरी तरह से सोनिया और प्रियंका के चंगुल में था और अपने बाप से कोई मतलब नहीं रखता था। लगभग एक साल से राजेन्द्र लीवर की बीमारी से पीडित थे ।और मेक्स हॉस्पिटल में अपना इलाज करा थे ।इस दौरान रॉबर्ट ,सोनिया या प्रियंका कोई भी उनका हाल पूछने अस्पताल नहीं आया। अपने लड़के के इस व्यवहार से राजेन्द्र बहुत नाराज़ और दुखी थे। लगभग दो हफ्ता पहले उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गयी थी। अस्पताल से निकलने के बाद उन्होंने पहिला काम यह किया की ,अपने बड़े भाई ओमप्रकाश की तरह अपनी ज़मीन एक ऐसे ट्रस्ट को दे दी जिसका सम्बन्ध आर एस एस था। आजकल वहाँ सरस्वती मन्दिर स्कूल चल रहा ।जब यह बात सोनिया को पता चली तो हड़कंप मच गया। पहले सोनिया ने कुछ प्रभावशाली कांग्रेसी नेताओं के माध्यम से राजेन्द्र पर दवाब डलवाया की की वह दान में दी गयी ज़मीन वापिस ले ले । लेकिन राजेन्द्र ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तबसे राजेन्द्र को बार बार धमकियां दी जा रही थीं। और आख़िर उसे अपनी जान से हाथ धोना पडा। उक्त सभी घटनाओं को मात्र संयोग या दुर्घता मानना ठीक नहीं होगा। सभी घटनाओं का गहराई से विश्लेषण करने पर जो तथ्य निकल कर आते हैं वह इस प्रकार हैं -सभी मरने वाले सोनिया के आलोचक,और प्रतिस्पर्धी थे। और सोनिया उनको अपने रास्ते का काँटा मानती थी। यह सभी सोनिया के राजनीतिक प्रतिद्वंदी थे। इन लोगों ने सोनिया के कुछ ऐसे गुप्त रहस्य मालूम कर लिए थे ,जिनके प्रकट हो जाने से सोनिया को जेल हो सकती थी। इन लोगों की मौत से सोनिया को निष्कंटक, असीमित ,और एकछत्र सत्ता हासिल हो गयी। और भविष्य में राहुल को प्रधान मंत्री बनाने के लिए रास्ता साफ़ हो गया। सोनिया ने अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक एक करके इन सब का सफाया करा दिया। प्रियंका भी कुछ कम नहीं है। यदि प्रियंका नेहरू गांधी परिवार की इसी परम्परा को निबाहते हुए ,भविष्य में रॉबर्ट को भी इसी तरह से रास्ते से हटा दे ,तो हमें कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए। ऎसी महिलाओं को ही डायन कहा जाता है ।'लोग ठीक ही कहते हैं "माँ हत्यारिनी तो बेटी कुलघातिनी। !
जय भारत २९ मार्च २०१९ (संकलित लेख)

हे चित्तचोर, तुम्हारी जय हो ---

 भगवान श्रीहरिः जब तक हमारा चित्त न चुराएँ, तब तक कोई भी आध्यात्मिक साधना सफल नहीं हो सकती| वे हमारा चित्त ही नहीं, पूरा अंतःकरण ही चुराएँ, तभी हम सफल हो सकते हैं| जो सफल हुए हैं उनका रहस्य उनसे पूछिये| पहिले उनका मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ..... चोरी हुआ, तभी वे सफल हुए| आध्यात्म में खुद के प्रयासों से कभी सफलता नहीं मिलती| माँ भगवती स्वयं ही हृदय में आकर भक्ति करे तभी हम सफल हो सकते हैं|

जब तक हमारे में कर्ताभाव का अहंकार है, तब तक विफलता के नर्क-कुंडों में ही हम गिरेंगे| यह बिलकुल सत्य है जिसे मैं अपने अनुभवों से लिख रहा हूँ| अहंकारी लोग या तो नर्कगामी हुये हैं या आसुरी लोकों में गए हैं|
भगवान ने कृपा कर के अपने कई रहस्य अनावृत कर दिये हैं| हे चित्तचोर, तुम्हारी जय हो| २९ मार्च २०२०