इस संसार में जवानी भी देखी, बुढ़ापा भी देखा, और भगवान से दिल लगाकर भी देख लिया। अब और देखने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। इसलिये सभी को राम राम !! वंदे मातरम् !! भारत माता की जय॥
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समय के साथ सब कुछ बदल जाता है, जीवन परिवर्तनशील है। सारा दृश्य भगवान की माया है। भगवान भी क्या क्या दृश्य दिखलाते हैं! इस संसार में बहुत कुछ अनुभव किया है, लोगों के कष्ट भी बहुत देखे हैं, और उनकी जिजीविषा भी। झूठ, लोभ, अहंकार, छल, कपट, व विश्वासघात भी बहुत अधिक देखा है; और सत्यनिष्ठा भी। हे प्रभु, तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो ! अब परमात्मा में शरणागति द्वारा समर्पण करते हुए स्वयं को देखना चाहता हूँ। और कुछ भी देखने की इच्छा नहीं है। ॐ तत्सत्॥ ॐ शांति शांति शांति॥
कृपा शंकर
३० दिसम्बर २०२१