दुष्टों का विनाश करने और सज्जनों का परित्राण करने भगवान के अवतृत होने का समय हो गया है। हर्षोत्सव मनाइये।
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ज्योतिषी कह रहे हैं की ग्रह-नक्षत्रों का संयोग बुरे दिन ला रहा है। लेकिन मैं कह रहा हूँ कि बहुत अच्छे दिन आ रहे हैं। परमात्मा की सृष्टि में कुछ भी गलत नहीं हो सकता। जो गलत हो रहा है, वह हमारी सृष्टि है। दुष्टों का नाश तो होगा ही, उसे कोई नहीं रोक सकता। सज्जनों का परित्राण भी होगा। धर्म की स्थापना करने भगवान स्वयं अवतृत होने वाले हैं।
"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥४:७॥" (श्रीमद्भगवद्गीता)
"परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥४:८॥ (श्रीमद्भगवद्गीता)
भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेने का उद्देश्य बताया है। इसका अर्थ है: सज्जनों (साधुओं) की रक्षा करने, दुष्टों (पापियों) का विनाश करने और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ।
उनके अवतृत होने का समय आ गया है। उत्सव मनाइये॥ नारायण॥ नारायण॥
कृपा शंकर
२४ फरवरी २०२६
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पुनश्च: ... अब चाहे सारा ब्रह्मांड टूटकर बिखर जाए, यह शरीर रहे या न रहे, हमें कोई पीड़ा नहीं होगी। स्वयं सृष्टिकर्ता के अवतृत होने का समय हो गया है। इससे अधिक प्रसन्नता की बात और क्या हो सकती है?
प्रमाद, दीर्घसूत्रता, राग-द्वेष, अहंकार, संशय, और लोभ आदि के कारण ही हम भगवान से दूर हैं। अन्य कोई कारण नहीं है। समय हो गया है, उठो और ध्यान के आसन पर बैठकर गुरु-चरणों का कूटस्थ में ध्यान करो। अभी और इसी समय।
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