जिस बात की आशंका थी, वही हो गया है ---
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(१) अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर आक्रमण कर दिया है। "होरमुज" अभी तक तो खुला हुआ है, लेकिन कब क्या होगा? कुछ कह नहीं सकते। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने "बाब-अल-मंडाब" को भी बंद करने की धमकी दी है। ये दोनों संभावित घटनाएँ भारत के आर्थिक हितों पर बहुत गहरी चोट करेंगी, और भारत तटस्थ नहीं रह पाएगा।
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(२) पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मध्य युद्ध आरंभ हो गया है। इसके परिणाम बड़े भयंकर होंगे। पाकिस्तान की पराजय और पाकिस्तान का विघटन भारत के हित में हैं। अतः भारत यहाँ भी तटस्थ नहीं रह पाएगा।
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(३) भारत में शासक दल भाजपा हिन्दूत्व के अपने मूल सिद्धांतों से दूर हो गई है। सनातन धर्म की कहीं पर बात भी नहीं हो रही है। हिंदुओं के मंदिर अभी भी सरकार के कब्जे में हैं, उनकी आय अधार्मिक गतिविधियों के लिए हो रही है। समान नागरिक संहिता की कोई बात नहीं हो रही है। हिंदुओं को अपने विद्यालयों में अपने धर्म की शिक्षा देने की छूट अभी तक नहीं मिली है। वीर सावरकर, डॉ.हेडगेवार, गुरु गोलवाल्कर, पं.श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पं.दीनदयाल उपाध्याय, प्रो.बलराज मधोक व करपात्री जी महाराज, जैसे महान पुरुषों के आदर्शों से हमने दूरी बना ली है। वर्तमान भाजपा पिछड़ावादी और अंबेडकरवादी होकर अनारक्षित वर्ग और हिंदुत्व की शत्रु हो गई है। अन्य कोई विकल्प नहीं है, इसलिए विवशता में ही भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। कोई विकल्प मिलेगा तो उस को समर्थन देंगे।
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(४) मन में बड़ी उथल-पुथल हो रही है। मन को पूरी तरह एकाग्र कर अब केवल परमात्मा की उपासना करेंगे, जिसका लक्ष्य धर्म की रक्षा ही होगा। यही हमारा स्वधर्म है। हम अपने स्वधर्म को न भूलें। आप सब मेरे ही निजात्मा हो। आप सबको नमन॥ अति आवश्यक होगा तभी मैं उपलब्ध रहूँगा, अन्यथा नहीं।
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ॐ तत् सत् !! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२८ फरवरी २०२६
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