राष्ट्र हित में वर्तमान केंद्र सरकार से २ मुद्दों पर हमारी असहमति है। यदि इनका समाधान नहीं हुआ तो अगले चुनावों में भाजपा की, और स्वयं प्रधानमंत्री की चुनावी पराजय सुनिश्चित है।
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(१) "समान नागरिक संहिता" के आश्वासन पर वचन भंग कर के भाजपा ने जनता के साथ विश्वासघात किया है। सन २०१४ के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव घोषणापत्र (Manifesto) में "समान नागरिक संहिता" (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने का आश्वासन दिया गया था। घोषणापत्र में भाजपा ने कहा था कि जब तक भारत "समान नागरिक संहिता" नहीं अपना लेता, तब तक लैंगिक समानता (gender equality) नहीं हो सकती। पार्टी ने सभी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोत्तम परंपराओं को शामिल करते हुए एक "समान नागरिक संहिता" का मसौदा तैयार करने के अपने रुख को दोहराया था।
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उसके बाद दो-दो आम चुनाव हो चुके हैं, लेकिन अभी तक "समान नागरिक संहिता" लागू नहीं की गई है। अनारक्षित वर्ग के विरुद्ध क्रमशः बिलकुल वैसे ही कानून बनाए जा रहे हैं जैसे जर्मनी में हिटलर ने यहूदियों के विरुद्ध बनाये थे। अब अनारक्षित वर्ग (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व कायस्थ आदि) को अपने अधिकारों के लिए संगठित होना पड़ेगा, अन्यथा उनकी वही गति होगी जैसी जर्मनी में यहूदियों की हुई थी। "समान नागरिक संहिता" को लागू न करना भारत से सनातन धर्म को नष्ट करने का आसुरी प्रयास है।
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(२) भारत सरकार और भाजपा के नेता बार बार अपने भाषणों में कहते हैं कि हमारी सरकार दलितों, पिछड़ों, अल्प-संख्यकों, और वंचितों की है। सारा आरक्षण उन्हीं के लिए है। फिर जो अनारक्षित सामान्य वर्ग है, वह कहाँ जायेगा ? अनारक्षित सामान्य वर्ग -- भाजपा को मत (Vote) क्यों दे जब उनके बच्चों का भविष्य ही भाजपा के राज में अंधकारमय है।
पं.दीन दयाल उपाध्याय के स्थान पर बाबा साहब को ही उद्धृत किया जा रहा है। भीमराव रामजी अंबेडकर को बाबा साहब के नाम से कहा जा रहा है, क्योंकि उनके असली नाम में राम नाम है जिसे बोलने में शर्म आती है।
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मैंने जब से होश संभाला है, आज तक जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का ही समर्थन किया है। बचपन से ही संघ का स्वयंसेवक रहा हूँ। मेरा संघ प्रवेश भी ६४ वर्ष का है। भाजपा को सत्ता में लाने के लिए पूरी ऊर्जा लगा दी थी। अब बात इतनी बढ़ गई है कि कोई भी आरक्षित वर्ग का व्यक्ति अनारक्षित के विरुद्ध झूठा आरोप लगाकर उसे जेल भिजवा सकता है। अनारक्षित की न तो कोई जांच होगी, न सुनवाई होगी और न कोई जमानत मिलेगी। वह स्वयं तो जेल में सड़ेगा और उसका परिवार आत्म-हत्या को मजबूर हो जायेगा। अतः आरक्षित वर्ग में थोड़ा सा भी स्वाभिमान है तो क्यों ऐसे दल को वोट देगा ? मैं तो ऐसे दल को तब तक कोई वोट नहीं दूंगा, जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो जाती। वोट यदि NOTA में डालने पड़े तो NOTA में ही डालूँगा। हमने और हमारे पूर्वजों ने किसी के साथ अन्याय नहीं किया, कभी किसी पर अत्याचार नहीं किया, अब हमें अत्याचारी और अन्यायी बताया जा रहा है। क्या हमारी संवेदनाएं नहीं हैं? क्या हमें दुःख और पीड़ा नहीं होती?
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वर्ग-संघर्ष एक दुःखान्तिका है, जो किसी भी परिस्थिति में भारत में न हो। भारत में तुरंत प्रभाव से "समान-नागरिक संहिता" लागू हो, और सब के लिए समान कानून हो।
ॐ तत्सत् ॥ ॐ शिव॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
कृपा शंकर
१७ फरवरी २०२६
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पुनश्च: _--- जीवन में सब कुछ किया लेकिन राम का नाम नहीं लिया, इसीलिए जो लोग सामाजिक-समरसता और हिन्दू-एकता की बातें करते थे, वे ही झूठे वर्ग उत्पन्न कर समाज में वर्ग-संघर्ष और विषमता का रस घोल रहे हैं। यह उनका लोभ और सत्ता की लालसा है। पूरा मार्क्सवाद ही वर्ग-संघर्ष पर आधारित है, जो सनातन-धर्म का शत्रु है। सनातन के सभी शत्रुओं का नाश स्वयं भगवान करेंगे। हमारा तो धर्म ही ईश्वर की साधना है।
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