Wednesday, 18 March 2026

इस समय सभी अनारक्षित हिन्दू जातियों में आरक्षण के विरुद्ध बहुत भयंकर आक्रोश है ---

 इस समय सभी अनारक्षित हिन्दू जातियों में आरक्षण के विरुद्ध बहुत भयंकर आक्रोश है। वर्ग-भेद उत्पन्न कर वर्ग-संघर्ष द्वारा सनातन हिन्दू धर्म और भारत को नष्ट करने के लिए अधर्मी शासकों और उनके समर्थकों ने आरक्षण आरंभ करवाया था। यह शासक वर्ग का लोभ और अहंकार ही है जो "समान नागरिक संहिता" को लागू नहीं होने दे रहा। आरक्षण की वर्तमान नीति से देश का भविष्य खतरे में है।

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भारत के मूल संविधान में किसी भी प्रकार के किसी आरक्षण की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। दस वर्ष के पश्चात आरक्षण को बढ़ाना पूर्णतः अनुचित था। अब आरक्षण को अब और फैलाना पूर्णतया अनुचित और अन्याय है।
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हमें यह झूठ क्यों बताया जाता है कि भारत का संविधान भीमराव रामजी अंबेडकर ने बनाया था। यह शत-प्रतिशत झूठ है। भारत के संविधान का प्रारूप श्री बी.एन.राव ने बनाया था। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ.राजेंद्र प्रसाद थे। अंबेडकर तो अनेक कमेटियों में से एक कमेटी के अध्यक्ष मात्र थे, वे भी बिना मन के। वे तो इस संविधान के बिलकुल भी पक्ष में नहीं थे।
२५ फरवरी २०२६ . पुनश्च: --- कर्म के आधार पर जाति मानने वाले यदि जन्म पर आधारित जातिगत आरक्षण की सुविधा लेते हैं तो वे निश्चित रूप से निकृष्ट घोर दुराचारी हैं।

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