यह यूरेशिया किधर है? कौन सा रेलवे स्टेशन पास में पड़ता है? वहाँ जमीन का क्या भाव है? कुछ लोग नारे लगा रहे हैं कि ब्राह्मणो, भारत छोड़ो। वे आरोप लगा रहे हैं कि सारे ब्राह्मण मनुवादी हैं, और यूरेशिया से आए हैं। इसका उत्तर दे रहा हूँ।
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पहली बात तो यह बताओ कि क्या मनु-स्मृति आपने पढ़ी है? मनुस्मृति में कहाँ किस पृष्ठ पर और कौन सी पंक्ति में लिखा है कि किसी की दुरावस्था या जातियों के निर्माण के लिए मनु महाराज जिम्मेदार थे? हजारों वर्षों तक मनुस्मृति भारत का संविधान और आचार-संहिता रही है।
ब्राह्मण तो द्वापर, त्रेता और सतयुग में भी थे। विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ वेदों में कहाँ लिखा है कि ब्राह्मण और सारे हिन्दू बाहर से आये? अगर इतनी बड़ी जनसंख्या का संचलन होता तो वेदों में कहीं तो उल्लेख होता।
आप लोग दुष्ट अंग्रेज़ पादरियों के झूठे काल्पनिक प्रचार का शिकार हैं।
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गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है --
"चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्॥४:१३॥"
अर्थात् -- गुण और कर्मों के विभाग से चातुर्वण्य मेरे द्वारा रचा गया है। यद्यपि मैं उसका कर्ता हूँ, तथापि तुम मुझे अकर्ता और अविनाशी जानो॥
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यह सिद्ध करता है कि स्वयं भगवान ने वर्ण-व्यवस्था बनायी है। जातियों का निर्माण यदि ब्राह्मणों ने किया है तो मुसलमानों व अन्य मज़हबों में भी जातियों का निर्माण क्या ब्राह्मणों ने ही किया है? जातियों का निर्माण स्वयं भगवान ने किया है। लेकिन अधिकांश भारतीय, अंग्रेज़ पादरियों के झूठे प्रचार का शिकार हैं।
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चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः" (श्रीमद्भगवद्गीता ४:१३) का अर्थ है कि भगवान ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—इन चार वर्णों की रचना की है। यह विभाजन गुणों (सत्व, रज, तम) और कर्म के आधार पर किया गया है।
ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१९ फरवरी २०२६
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जातिवाद को समाप्त करने के दो ही उपाय हैं --
(१) सब तरह का आरक्षण पूर्णतः समाप्त किया जाए। (२) सब तरह के सरकारी कागजों में जाति का उल्लेख बंद किया जाए। सब तरह के जातीय प्रमाणपत्रों को अमान्य घोषित किया जाए। जातिवाद आप ही समाप्त हो जाएगा।
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मैं वर्णाश्रम धर्म और जातियों का समर्थक, लेकिन जातिवाद का घोर विरोधी हूँ।
जातिप्रथा ने भारत की रक्षा की है, लेकिन जातिवाद ने भारत का बहुत अधिक अहित किया है।
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