Wednesday, 20 August 2025

परमात्मा के किस रूप का ध्यान करें ? .

 (प्रश्न) : परमात्मा के किस रूप का ध्यान करें ?

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(उत्तर) : ध्यान हमेशा परमात्मा के आदित्य-वर्ण का ही किया जाता है। यह बात भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में स्पष्ट रूप से कही है, जिस पर तनिक भी संशय नहीं किया जा सकता। भगवान कहते हैं --
"कविं पुराणमनुशासितार मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप मादित्यवर्णं तमसः परस्तात्॥८:९॥"
अर्थात् -- जो पुरुष सर्वज्ञ, प्राचीन (पुराण), सबके नियन्ता, सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर, सब के धाता, अचिन्त्यरूप, सूर्य के समान प्रकाश रूप और (अविद्या) अन्धकार से परे तत्त्व का अनुस्मरण करता है॥
Whoso meditates on the Omniscient, the Ancient, more minute than the atom, yet the Ruler and Upholder of all, Unimaginable, Brilliant like the Sun, Beyond the reach of darkness;
गीता के आठवें अध्याय का दो-तीन भाष्यों की सहायता से स्वाध्याय करें, और भगवान श्रीकृष्ण के सर्वव्यापी आदित्यवर्ण का ध्यान करें। भगवान आपकी सहायता अवश्य करेंगे। यह मैं अपने निजी अनुभव से कह रहा हूँ।
ॐ तत्सत्॥ ॐ ॐ ॐ॥
कृपा शंकर
१६ अगस्त २०२५

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