आज (१९ अगस्त २०२२ की मध्य रात्रि में) जितनी भक्ति तो मैंने मेरे इस पूरे जीवन में कभी भी नहीं देखी। यह मैं पूरी गंभीरता से लिख रहा हूँ। मैं एक ७५ वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हूँ, और पूरे विश्व में व भारत में खूब घूमा हुआ हूँ।
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१८ अगस्त से ही पूरे विश्व से भक्ति के स्पंदन आ रहे थे, जो १९ अगस्त को तो बहुत अधिक बढ़ गए। मैंने तो जन्माष्टमी का व्रत कल १८ अगस्त को किया था। लेकिन मंदिरों में जन्माष्टमी १९ अगस्त को थी। १९ अगस्त की मध्यरात्री के समय सभी मंदिरों में अभूतपूर्व भीड़ थी। जिन लोगों से मुझे कभी भक्ति की उम्मीद भी नहीं थी, वे भी भाव-विभोर होकर कृष्ण-भक्ति में तल्लीन थे। यह एक चमत्कार था। इस बार तो अभूतपूर्व भक्ति देखी। यह एक सकारात्मक संकेत है जो हिंदुओं में पुनर्जागरण होता हुआ दिखा रहा है। यह भगवान श्रीकृष्ण की बड़ी कृपा है।
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"कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥"
ॐ तत्सत् !!
कृपा शंकर
२० अगस्त २०२२
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