Wednesday, 20 August 2025

जीवन की प्रथम, अंतिम और एकमात्र आवश्यकता -- "परमात्मा को आत्म-समर्पण" है ---

जीवन की प्रथम, अंतिम और एकमात्र आवश्यकता -- "परमात्मा को आत्म-समर्पण" है। हृदय में एक प्रचंड अग्नि जल रही है, जिसकी दाहकता अब और अधिक समय तक जीने नहीं देगी। परमात्मा हमारे प्रियतम से भी अधिक प्रिय, और निकटतम से भी अधिक निकट हैं। इस जन्म से पूर्व भी वे हमारे साथ थे, और इस जीवन के उपरांत भी वे ही हमारे साथ रहेंगे। वे ही माता-पिता, भाई-बहिन, पति-पत्नी, मित्र-संबंधी आदि, और अन्य सभी रूपों में आये। यह उन्हीं का प्रेम था जो जीवन में सभी से प्राप्त हुआ। उनसे एकाकार होना ही इस जीवन का लक्ष्य है। अब और उनके बिना नहीं रह सकते।

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मेरी मान्यता है कि जो वेदान्त के ब्रह्म हैं, वे ही साकार रूप में भगवान श्रीकृष्ण हैं। वे ही परमशिव और वे ही महादेव हैं। मैं उनका ध्यान कूटस्थ सूर्यमण्डल में पुरुषोत्तम या परमशिव के रूप में करता हूँ, वहीं मुझे उनकी अनुभूतियाँ होती हैं। जन्माष्टमी का दीर्घ व गहन ध्यान आज भी होगा और कल भी होगा।
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"त्वमादिदेवः पुरुषः पुराण स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्।
वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप॥
वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च।
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते॥
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः॥"
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"वसुदॆव सुतं दॆवं कंस चाणूर मर्दनम्।
दॆवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम्॥"
"वंशीविभूषित करान्नवनीरदाभात् , पीताम्बरादरूण बिम्बफला धरोष्ठात्।
पूर्णेंदु सुन्दर मुखादरविंदनेत्रात् , कृष्णात्परं किमपि तत्वमहं न जाने॥"
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"कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणत क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥"
"नमो ब्रह्मण्य देवाय गो ब्राह्मण हिताय च, जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः॥"
"मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम् । यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम्॥"
"कस्तूरी तिलकम् ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम् ,
नासाग्रे वरमौक्तिकम् करतले, वेणु: करे कंकणम्।
सर्वांगे हरिचन्दनम् सुललितम्, कंठे च मुक्तावली,
गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते, गोपाल चूड़ामणि:॥"
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१५ अगस्त २०२५

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