Wednesday, 20 August 2025

नकारात्मक शक्तियों पर विजय कैसे पाएँ? ---

 नकारात्मक शक्तियों पर विजय कैसे पाएँ? ---

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जिस भौतिक विश्व में हम रहते हैं, उससे भी बहुत अधिक बड़ा एक सूक्ष्म जगत हमारे चारों ओर है, जिसमें नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह की सत्ताएँ हैं। हर कोई उसे नहीं समझ सकता। उस विश्व को मैं अनुभूत कर रहा हूँ, इसीलिए गुरूकृपा से ये पंक्तियाँ लिख पा रहा हूँ।
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जितना हम अपनी दिव्यता की ओर बढ़ते हैं, सूक्ष्म जगत की नकारात्मक आसुरी शक्तियाँ उतनी ही प्रबलता से हम पर अधिकार करने का प्रयास करती हैं। उन आसुरी जगत की शक्तियों के प्रभाव से हम जीवन में कई बार न चाहते हुए भी अनेक क्षुद्रताओं से बंधे हुए एक पशु की तरह आचरण करने लगते हैं, और चाह कर भी पतन से बच नहीं पाते। ऐसी परिस्थिति में हमें क्या करना चाहिए?
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आग लगने पर कुआँ नहीं खोदा जा सकता, कुएँ को तो पहिले से ही खोद कर रखना पड़ता है। अपने समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग ईश्वर-प्रदत्त विवेक के प्रकाश में करें। लोभ, कामुकता, अहंकार, क्रोध, प्रमाद व दीर्घसूत्रता जैसी वासनायें हमें नीचे गड्ढों में गिराती हैं, जिन से बचने के किए हमें अपनी चेतना, विचारों, व चिंतन के स्तर को अधिक से अधिक ऊँचाई पर रखना चाहिए।
सहस्त्रारचक्र में गुरू-चरणों का ध्यान करो। सहस्त्रारचक्र में दिखाई दे रही ज्योति ही गुरूमहाराज के चरण-कमल हैं। वहाँ होने वाली स्थिति ही श्रीगुरू-चरणों में आश्रय है।
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यदि चेतना ब्रह्मरंध्र को भेद कर अनंतता में चली जाती है तो विराट अनंतता का ध्यान करो। वहाँ दिखाई दे रहे चक्रों का भी ध्यान करो। अनंताकाश से भी परे पंचमुखी महादेव के दर्शन होते हैं तो उन में स्वयं को समर्पित कर दो। फिर उन्हीं का ध्यान करो। चेतना को बिलकुल भी नीचे मत लाओ। डरो मत। जब तक प्रारब्ध में जीवन लिखा है, तब तक मरोगे नहीं।
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वासनायें -- चूहों व कौवों की तरह हैं, जिन पर अपना समय नष्ट न करें। स्वयं भाव-जगत की ऊँचाइयों पर परमशिव की चेतना में रहें, ये क्षुद्रतायें अपने आप ही नष्ट हो जायेंगी।
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वर्षों पहले युवावस्था में एक साहित्य पढ़ा था, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के समय के एक युद्धक वायुयान चालक (Pilot) के अनुभव थे। वह वायुयान अपने लक्ष्य की ओर जा रहा था कि पायलट ने देखा कि एक चूहा एक बिजली के तार को काट रहा था| यदि चूहा उस तार को काटने में सफल हो जाता तो यान की विद्युत प्रणाली बंद हो जाती और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता। पायलट उस चूहे को किसी भी तरह से भगाने में असमर्थ था। समय बहुत कम और कीमती था। चालक ने भगवान को स्मरण किया, और विमान को उस अधिकतम ऊंचाई तक ले गया जहाँ तक जाना संभव था। वहाँ वायु का दबाव कम हो गया जिसे चूहा सहन नहीं कर पाया और बेहोश हो कर गिर गया। पायलट अपना कार्य पूरा कर सुरक्षित बापस आ गया। उस की रक्षा ऊँचाई के कारण हुई।
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बाज पक्षी कई बार ऐसे पशु का मांस खा जाते हैं जिसे कौवे खाना चाहते हैं। बाज के आगे कौवे असहाय होते हैं पर वे हिम्मत नहीं हारते। कौवा बाज़ की पीठ पर बैठ जाता है, और उसकी गर्दन पर अपनी चोंच से घातक प्रहार करता है, और काटता है। बाज भी ऐसी स्थिति में कौवे के आगे असहाय हो जाते हैं। बाज अपना समय नष्ट नहीं करते, और अपने पंख खोलकर आकाश में बहुत अधिक ऊँचाई पर चले जाते हैं। ऊँचाई पर वायु का दबाव कम होने से कौवा बेहोश होकर नीचे गिर जाता है। यहाँ भी बाज की रक्षा ऊँचाई से होती है। अतः अपनी उच्चतम चेतना में रहो, आपकी रक्षा होगी।
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शिवोहम् शिवोहम् अहम् ब्रह्मास्मि !! ॐ तत्सत् !! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय !!
ॐ नमः शिवाय !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२० अगस्त २०२३

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