मनुष्य की प्रज्ञा ने ही इस पृथ्वी पर मनुष्यों की रक्षा की है, और प्रज्ञा-अपराध ही मनुष्य जाति का विनाश करेंगे ---
Sunday, 13 April 2025
मनुष्य की प्रज्ञा ने ही इस पृथ्वी पर मनुष्यों की रक्षा की है, और प्रज्ञा-अपराध ही मनुष्य जाति का विनाश करेंगे ---
Saturday, 12 April 2025
आध्यात्म की अनेक बातों को समझने और व्यक्त करने की क्षमता मुझ में नहीं है ---
आध्यात्म की अनेक बातों को समझने और व्यक्त करने की क्षमता मुझ में नहीं है। भगवती महासरस्वती,महालक्ष्मी, महाकाली, और श्री की पूर्ण कृपा मुझ पर हो। मेरे अन्त:करण में परमब्रह्म परमात्मा की निरंतर अभिव्यक्ति हो। मेरी चेतना सदा ब्रह्ममय हो।
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भगवान हैं, मेरे साथ हैं, यहीं पर हैं, इसी समय हैं, हर स्थान पर हर समय हैं। यदि किसी को नहीं दिखाई देते, तो दोष उस के बुरे कर्मों का है। समाज में कदम-कदम पर हर ओर छाई, हर तरह की भयंकर कुटिलता (छल, कपट, झूठ) व विपरीत परिस्थितियों के होते हुए भी मैं अपनी आस्था पर पूरी श्रद्धा, विश्वास और निष्ठा से दृढ़ हूँ। गीता में भगवान कहते हैं --
हर परिस्थिति में भारत के सनातन गौरव, आत्म-सम्मान, प्रकृति और धर्म की रक्षा हो। दैवीय शक्तियाँ हमारी सहायता करें।
हर परिस्थिति में भारत के सनातन गौरव, आत्म-सम्मान, प्रकृति और धर्म की रक्षा हो। दैवीय शक्तियाँ हमारी सहायता करें। परमात्मा से परमप्रेम मेरा स्वभाव है। मुझे परमात्मा से कुछ भी नहीं चाहिए। योग या भोग की किसी आकांक्षा का जन्म ही न हो। केवल उन्हें पूर्णतः समर्पित होने की अभीप्सा हो। जो कुछ भी उनका दिया हुआ है, वह सब कुछ, और स्वयं इस अकिंचन का भी समर्पण वे पूर्णतः स्वीकार करें। एकमात्र अस्तित्व उन्हीं का है, कोई मैं या मेरा नहीं है। मुझे ईश्वर ने जो भी कार्य दिया है, पूरी सत्यनिष्ठा से उसे सम्पन्न करना ही मेरा दायित्व और परमधर्म है। अन्य जैसी हरिःइच्छा। अपने प्रेमास्पद का ध्यान निरंतर तेलधारा के समान होना चाहिए। आगे के सारे द्वार स्वतः ही खुल जाते हैं।
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कृपा शंकर
१२ अप्रेल २०२५
Friday, 11 April 2025
जीवन का प्रथम, अंतिम और एकमात्र उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति है .....
कब तक हम प्रार्थना ही करते रहेंगे ? .....
भगवान हैं, यहीं पर, इसी समय हैं; और सर्वदा व सर्वत्र भी हैं। यदि नहीं दिखाई देते, तो दोष हमारे बुरे कर्मों का है ---
भगवान हैं, यहीं पर, इसी समय हैं; और सर्वदा व सर्वत्र भी हैं। यदि नहीं दिखाई देते, तो दोष हमारे बुरे कर्मों का है।
ब्रह्म और भ्रम में क्या भेद है?
ब्रह्म और भ्रम में क्या भेद है?