Monday, 7 April 2025

मेरे द्वारा आध्यात्मिक प्रेरणादायक लेख लिखने का उद्देश्य अब पूर्ण हो चुका है ---

अब से बाकी बचे अत्यल्प जीवन के प्रत्येक मौन क्षण में परमात्मा की पूर्ण अभिव्यक्ति हो, यही प्रार्थना है। हर आती-जाती साँस परमात्मा की साँस हो, जीवन का हर क्षण, हर स्पंदन, हर विचार परमात्मा को ही समर्पित हो। जीवन में ईश्वर के सिवाय अन्य कुछ भी न हो।

अति आवश्यक होने पर कभी कभी कुछ पुराने लेख पुनर्प्रेषित कर दूँगा। अब और नया लिखने की प्रेरणा नहीं मिल रही है। आप सब को नमन !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
८ अप्रेल २०२२

भगवान को उपलब्ध होना हमारा स्वधर्म और जन्मसिद्ध अधिकार है ---

 भगवान को उपलब्ध होना हमारा स्वधर्म और जन्मसिद्ध अधिकार है ---

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निरंतर ब्रह्म-चिंतन और भक्ति ही हमारा स्वभाव है, अन्यथा हम अभाव-ग्रस्त हैं। जीवन के प्रत्येक मौन क्षण में भगवान की पूर्ण अभिव्यक्ति हो। हर आती-जाती साँस भगवान की साँस हो। जीवन का हर क्षण, हर स्पंदन, हर विचार, -- भगवान को समर्पित हो। जीवन में भगवान के सिवाय अन्य कुछ भी न हो। भगवान को उपलब्ध होना हमारा स्वधर्म और जन्मसिद्ध अधिकार है। यदि सत्यनिष्ठा से हम चाहें, तो भगवान को उपलब्ध होने से हमें विश्व की कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती। सत्यनिष्ठा से मेरा अभिप्राय है कि हम भगवान को चाहें, न कि उनके सामान को। या तो उनका सामान ही मिलेगा, या भगवान स्वयं ही मिलेंगे। दोनों एकसाथ नहीं मिल सकते। जिनको दोनों चाहियें, वे मुझे क्षमा करें।
ॐ तत्सत् !!
८ अप्रेल २०२३ पुनश्च: --- अब इस समय लिखने योग्य एक ही बात है कि भगवान को पाना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। यदि सत्यनिष्ठा से हम चाहें, तो भगवान को पाने से हमें विश्व की कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती। सत्यनिष्ठा से मेरा अभिप्राय है कि हम भगवान को चाहें, न कि उनके सामान को। या तो उनका सामान ही मिलेगा, या भगवान स्वयं ही मिलेंगे। दोनों एकसाथ नहीं मिल सकते। जिनको दोनों चाहियें, वे मुझे क्षमा करें।

इष्टदेव ही दुःखों को दूर कर सकते हैं ---

 इष्टदेव ही दुःखों को दूर कर सकते हैं ---

साक्षी भाव में निमित्त मात्र होकर ही जीवन जीयें। संसार में कष्ट तो आते ही रहेंगे, उन्हें कोई नहीं रोक सकता। हाँ, उनकी पीड़ा अवश्य कम हो सकती है, इष्टदेव की कृपा से। कोई ऐसा सार्वभौमिक नियम नहीं है जिससे संसार के सारे दुःख या कष्ट मिट सकें। हम सिर्फ प्रार्थना कर सकते हैं, और कुछ नहीं। कष्ट हों तो अपने इष्टदेव से उनके निवारण हेतु प्रार्थना करें। वे ही दुःखों को दूर कर सकते हैं। इसके लिए कोई मंत्र, तंत्र या टोटका नहीं है। ठगों से बचकर रहें। ८ अप्रेल २०२३

Saturday, 5 April 2025

कृष्ण मृग यानी काले हिरण को प्राचीन भारत में पवित्र माना गया था ---

कृष्ण मृग यानी काले हिरण को प्राचीन भारत में पवित्र माना गया था| प्राचीन भारत में कृष्ण मृग निर्भय होकर घुमते थे, उनका शिकार प्रतिबंधित था| मनुस्मृति में कहा गया है कि जितनी भूमि पर स्वतन्त्रतापूर्वक घूमता हुआ कृष्ण मृग मिले वह यज्ञ की पुण्यभूमि है|

मुझे एक तपस्वी साधू ने बताया था कि तपस्या करने करने के लिए वह स्थान सर्वश्रेष्ठ है जहाँ .......(१) कृष्ण मृग निर्भय होकर घुमते हों, (२) शमी वृक्ष यानी खेजडी के वृक्ष हों, (३) जहाँ निर्भय होकर मोर पक्षी रहते हों, और (४) कूर्म भूमि हो, यानि कछुए की पीठ के आकार की भूमि हो|
राजस्थान का विश्नोई समाज तो खेजडी के वृक्षों और कृष्ण मृगों की रक्षा के लिए अपने प्राण भी न्योछावर करता आया है| उन विश्नोइयों के गाँव में जाकर सलमान खान फ़िल्मी हीरो ने कृष्ण मृग का शिकार किया| वह वहाँ से तुरंत भाग गया, यदि गाँव वालों के हाथ में आ जाता तो अपने जीवन में अगले दिन का प्रकाश नहीं देख पाता| धन्य है विश्नोई समाज जो हर प्रकार के प्रलोभन और भय के पश्चात भी इस मुकदमें में अडिग खडा रहा और बीस वर्ष तक प्रतीक्षा कर के भी सलमान खान को सजा दिलवाई|
हरियाणा में नवाब पटौदी नाम का पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी भी काले हिरण का शिकार करते पकड़ा गया था| उसको भी सजा अवश्य मिलती पर उसको तो प्रकृति ने ही सजा दे दी| वह अधिक दिन जीवित नहीं रहा| ६ अप्रेल २०१८

जीवात्मा जब परमात्मा से लिपटी रहती है, तब वह भी परमात्मा से एकाकार होकर उसी ऊँचाई तक पहुँच जाती है ---

सन २००१ की बात है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कच्छल द्वीप पर एक अति विशाल और बहुत ही ऊँचे वृक्ष को देखा, जिस पर एक लता भी चढ़ी हुई थी| वृक्ष की जितनी ऊँचाई थी, लिपटते-लिपटते वहीं तक वह लता भी पहुँच गई थी| जीवन में पहली बार ऐसे उस दृश्य को देखकर परमात्मा और जीवात्मा की याद आ गई, और एक भाव-समाधि लग गई| वह बड़ा ही शानदार दृश्य था जहाँ मुझे परमात्मा की अनुभूति हुई| प्रभु को समर्पित होने से बड़ी कोई उपलब्धी नहीं है|
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जीवात्मा जब परमात्मा से लिपटी रहती है, तब वह भी परमात्मा से एकाकार होकर उसी ऊँचाई तक पहुँच जाती है| परमात्मा को हम कितना भी भुलायें, पर वे हमें कभी भी नहीं भूलते| सदा याद करते ही रहते हैं| उन्हें भूलने का प्रयास भी करते हैं तो वे और भी अधिक याद आते हैं| वास्तव में वे स्वयं ही हमें याद करते हैं| कभी याद न आए तो मान लेना कि --
"हम में ही न थी कोई बात, याद न तुम को आ सके."
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ॐ तत्सत् ||
कृपा शंकर
6 अप्रेल 2022

खुद की कमी दूर करने का प्रयास हम करें, और भगवान पर दोष न डालें ---

आत्म-विश्लेषण --- सत्य तो यह है कि अपनी कमियों को तो हम दूर नहीं कर पाते, और सारा दोष भगवान को दे रहे हैं। कहते हैं कि "भगवान की मर्जी"। खुद की कमी दूर करने का प्रयास हम करें, और भगवान पर दोष न डालें। यह बात मैं स्वयं के लिए ही नहीं कह रहा, सभी के लिए कह रहा हूँ।

हम धर्म का आचरण करेंगे, तभी धर्म की रक्षा होगी, और तभी धर्म हमारी रक्षा करेगा| धर्म के आचरण से ही जीवन में हमारा सर्वतोमुखी विकास, और सब तरह के दुःखों से मुक्ति होगी| धर्म क्या है और इसका पालन कैसे हो, इसे महाभारत, रामायण, भागवत, मनुस्मृति, आदि ग्रन्थों व श्रुतियों में बड़े विस्तार से और स्पष्ट रूप से समझाया गया है| आवश्यकता धर्मग्रंथों के स्वाध्याय, और परमात्मा के ध्यान की है| गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने तो इतना भी कहा है कि स्वधर्म का थोड़ा-बहुत पालन भी इस संसार के महाभय से हमारी रक्षा करेगा|

लौकिक रूप से हमें यह प्रयास करते रहना चाहिए कि भारत की प्राचीन शिक्षा और कृषि व्यवस्था फिर से जीवित हो| मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उन्हें धर्माचार्यों की एक प्रबन्धक समिति को सौंपा जाये जो यह सुनिश्चित करे कि मंदिरों के धन का उपयोग सिर्फ सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में ही हो| सनातन हिन्दू धर्म विरोधी जितने भी प्रावधान भारत के संविधान में हैं, उन्हें हटाया जाये| हम सत्य सनातन धर्म की निरंतर रक्षा करें| ५ अप्रेल २०२१

मोक्षमार्ग ---

 मोक्षमार्ग ---

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अब आत्मतत्व, सनातनधर्म व राष्ट्रहित के अतिरिक्त अन्य किसी भी विषय पर विचार के लिए मेरे पास समय नहीं है। मेरे हृदय में क्या है यह मैं किसी को बता नहीं सकता, क्योंकि उसे समझने वाले नगण्य हैं। फिर भी मोक्षमार्ग पर चलने वाले मेरे अनेक मित्र हैं जो नित्य नियमित परमात्मतत्व का ध्यान, मनन, और निदिध्यासन करते हैं, व निरंतर परमात्मा की चेतना (कूटस्थ-चैतन्य) में रहते हैं। भौतिक रूप से वे मुझसे दूर हैं लेकिन परमात्मा में वे मेरे साथ एक हैं।
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गीता के निम्न चार मंत्रों में भगवान ने सम्पूर्ण मोक्षमार्ग बताया है ---
"या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः।।२:६९।।"
"आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत्।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी।।२:७०।।"
"विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शांतिमधिगच्छति।।२:७१।।"
"एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।
स्थित्वाऽस्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति।।२:७२।।"
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जिन्हें परमात्मा को उपलब्ध होने की अभीप्सा है, वे किन्हीं श्रौत्रीय ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु आचार्य की शरण लें। अन्य कोई दूसरा मार्ग नहीं है। श्रुति भगवती इसका स्पष्ट आदेश देती है। उपरोक्त चारों मंत्रों का स्वाध्याय स्वयं करें। इनमें पूरा मोक्षमार्ग है।
ॐ तत्सत् ॥ ॐ ॐ ॐ ॥
कृपा शंकर
५ अप्रेल २०२३