भगवान की कृपा ही हमारी अनुकूलता है। हमें उनका स्मरण हो रहा है -- यह उनकी बहुत बड़ी कृपा है, अन्यथा किसी भी साधक के लिए साधना हेतु परिस्थितियाँ कभी भी अनुकूल नहीं होतीं। प्रतिकूलताओं में ही सारी आध्यात्मिक साधनाओं का आरंभ करना पड़ता है। मन में भरी हुई अति सूक्ष्म वासनाएँ -- सबसे बड़ी बाधाएँ हैं, जो कभी पकड़ में नहीं आतीं। ये सूक्ष्म वासनाएँ ही चित्त की वृत्तियाँ हैं।
Tuesday, 31 December 2024
प्रतिकूलताओं में अनुकूलता ---
Monday, 30 December 2024
गांधी को महात्मा किसने बनाया ? ---
जब से भगवान से प्रेम करके देखा है, तब से और कुछ भी देखने की इच्छा नहीं है ---
जब से भगवान से प्रेम करके देखा है, तब से और कुछ भी देखने की इच्छा नहीं है
आनंद हमारा स्वभाव है। हम हर समय आनंद में रहें ---
आनंद हमारा स्वभाव है। हम हर समय आनंद में रहें ---
क्या असत्य और अन्धकार की शक्तियों का वर्चस्व -- हमारी आलोचना और निंदा से ही दूर हो जायेगा?
(प्रश्न) क्या असत्य और अन्धकार की शक्तियों का वर्चस्व -- हमारी आलोचना और निंदा से ही दूर हो जायेगा?
भारत में नागरिकता कानून और जनसंख्या नियंत्रण का विरोध गलत और दुर्भावनापूर्ण है ---
भारत में नागरिकता कानून और जनसंख्या नियंत्रण का विरोध गलत और दुर्भावनापूर्ण है| देश की अनावश्यक जनसंख्या जिस तरह से बढ़ रही है उस अनुपात में रोजगारों/नौकरियों का सृजन नहीं किया जा सकता है| रोजगारों/नौकरियों का सृजन कैसे व कहाँ करेंगे, यह समझ से परे है| एकमात्र उपाय बड़ी कठोरता से बलात् जनसंख्या नियंत्रण है| देश की जनसंख्या उतनी ही बढ़ाने की अनुमति हो जितने लोगों की आवश्यकता हो|
यहाँ कोई देश के गौरव की बात करता है तो उसे साम्प्रदायिक क्यों घोषित कर दिया जाता है? हम अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर आत्महीनता के बोध और हीनभावना से ग्रस्त क्यों हैं?
यहाँ कोई देश के गौरव की बात करता है तो उसे साम्प्रदायिक क्यों घोषित कर दिया जाता है? हम अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर आत्महीनता के बोध और हीनभावना से ग्रस्त क्यों हैं?