Tuesday, 20 January 2026

माँ ---

 माँ ---

प्राण-तत्व के रूप में, इस देह की सुषुम्ना नाड़ी में मूलाधार से ब्रह्मरंध्र, व उस से भी परे तक, विचरण कर रही जगन्माता ही मेरे प्राण, और यह जीवन है|
पूरी सृष्टि को उन्होने ही धारण कर रखा है| घनीभूत होकर वे ही कुंडलिनी महाशक्ति हैं| सारी क्रियाएँ वे ही कर रही हैं|
मुझे निमित्त बनाकर, परमशिव का ध्यान भी वे स्वयं ही कर रही हैं| वे ही मेरे गति है| उन माँ भगवती के श्रीचरणों में मैं नतमस्तक हूँ|
२० जनवरी २०२१

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