Sunday, 24 August 2025

मेरे परिचित और अपरिचित सभी जैन समाज को "मिच्छामी दुक्कड़म्" ---

मेरे परिचित और अपरिचित सभी जैन समाज को "मिच्छामी दुक्कड़म्" ---

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आज २४ अगस्त २०२२ से अगले ८ दिन तक श्वेतांबर जैन समाज, और अगले १० दिनों तक दिगंबर जैन समाज -- जैन मत का प्रमुख पर्व "पर्युषण" मनायेगा। इस पर्व को दिगंबर समाज -- "दशलक्षण", और श्वेतांबर समाज -- "अष्टांहिका" भी कहते हैं। इस अवधि में उपवास और पूजा अर्चना की जाती है, व जाने-अनजाने में किए गए सभी बुरे कर्मों की क्षमा-याचना हेतु एक-दूसरे को "मिच्छामी दुक्कड़म्" कहा जाता है। "मिच्छामी दुक्कड़म" प्राकृत भाषा का शब्द है। मिच्छामी का अर्थ क्षमा और दुक्कड़म का अर्थ दुष्ट-कर्म होता है, अर्थात जाने-अनजाने किए गए बुरे कर्मों के प्रति क्षमा याचना करना। हम कभी ना कभी जाने-अनजाने में मन, वचन या कर्म से किसी न किसी व्यक्ति को दु:खी करते रहते हैं। अतः आज के दिन क्षमा याचना कर ली जाती है, और क्षमा व अभय प्रदान कर दिया जाता है।
"मिच्छामी दुक्कड़म्॥"

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