साधना के मार्ग पर हमारा प्रथम लक्ष्य है -- सच्चिदानंद ब्रह्म परमात्मा से परमप्रेम और उन्हें पूर्ण समर्पण। उस अवस्था में हम शनैः शनैः राग-द्वेष और अहंकार से मुक्त होकर वीतराग होने लगते हैं। वीतराग व्यक्ति ही जीवनमुक्त है। उस पर कोई बंधन नहीं है। वीतराग व्यक्ति ही स्थितप्रज्ञ हो सकता है, जिसकी प्रज्ञा निरंतर परमात्मा में स्थित है। समर्पित होकर परमात्मा का अधिकाधिक ध्यान करें और उन्हें निरंतर अपनी स्मृति में रखें। इसके अतिरिक्त भी यदि अन्य कोई मार्ग है तो मुझे उसका पता नहीं है।
Friday, 23 January 2026
मुझ अकिंचन को अपना आशीर्वाद देते रहिये। मैं आप सब का सेवक मात्र हूँ ---
निकट भविष्य में भारत से असत्य और अंधकार की शक्तियों का पराभव होगा, व सत्य-सनातन-धर्म की सम्पूर्ण विश्व में पुनः प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण होगा।
मुझे एक आतंरिक आश्वासन प्राप्त है कि निकट भविष्य में भारत से असत्य और अंधकार की शक्तियों का पराभव होगा, व सत्य-सनातन-धर्म की सम्पूर्ण विश्व में पुनः प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण होगा।
सभी प्रसन्न हों और निरंतर सदा परमात्मा की चेतना ब्राह्मीस्थिति में रहें ---
सभी प्रसन्न हों और निरंतर सदा परमात्मा की चेतना ब्राह्मीस्थिति में रहें। परमात्मा से पृथक हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। यह शरीर रहे या न रहे, इसका महत्व नहीं है। महत्व एक ही बात का है कि हमारे अस्तित्व के केंद्र बिन्दु केवल कूटस्थ ब्रह्म हों। गीता में भगवान कहते हैं --
- (१) भगवान के मोक्षदायी शाश्वत वचन। (२) भगवान का ध्यान किस रूप में करना चाहिये। (३) भगवान का नाम क्या है?
मुझे आदेश प्राप्त हुआ है कि मैं निम्न तीन विषयों पर सत्संग करूँ। आप इसे निज बुद्धि और विवेक के प्रकाश में समझ्न सकते हैं। मंत्रों के अर्थ और व्याख्या नहीं लिख रहा हूँ, अन्यथा लेख बहुत अधिक लंबा हो जाता, जिसे कोई नहीं पढ़ता। अतः मंत्रों के अर्थ और भाष्यों का अनुसंधान आप स्वयं करें।
भ्रूमध्य में गहन ध्यान -- त्रिवेणी संगम में स्नान है। हमारी चेतना जहां है, वहीं परमात्मा हैं, वहीं सारे तीर्थ हैं, और सारे संत-महात्मा वहीं हैं।
भ्रूमध्य में गहन ध्यान -- त्रिवेणी संगम में स्नान है। हमारी चेतना जहां है, वहीं परमात्मा हैं, वहीं सारे तीर्थ हैं, और सारे संत-महात्मा वहीं हैं।
क्या यह देश केवल आरक्षित वर्ग का ही है ?
क्या यह देश केवल आरक्षित वर्ग का ही है? क्या अनारक्षित वर्ग को आत्म-सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है? क्या भारत में कभी समान-नागरिक-संहिता लागू होगी?