अब तक जो हुआ सो हुआ, जन्म-जन्मांतरों के सारे पाप-पुण्य, बुरे-अच्छे सारे कर्म और उन के फल, बुराई-अच्छाई सब कुछ, और बचा-खुचा सारा शेष जीवन -- भगवान के श्रीचरणों में समर्पित है| किसी से कुछ भी नहीं चाहिए| उन की इच्छा ही मेरी इच्छा है| उन के सिवाय अन्य किसी का साथ भी नहीं चाहिए| भगवान की भक्ति -- हमारे और भगवान के मध्य का व्यक्तिगत विषय है| उनके सिवाय अन्य कोई है ही नहीं, मैं भी नहीं| यह "मैं" भी उन्हीं की एक अभिव्यक्ति है|
Wednesday, 25 December 2024
गीता जयंती --- आज मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को गीता जयंती है ---
कहने को तो बहुत सारी बातें हैं, लेकिन काम की बात एक ही है >>>
जहाँ भगवान से अनन्य प्रेम है, वहाँ अंधकार नहीं हो सकता। वे स्वयं ज्योतिर्मय हैं ---
भगवान के सर्वव्यापी ज्योतिर्मय रूप के ध्यान से असत्य और अज्ञान का सारा अंधकार नष्ट हो जाता है। जहाँ भगवान से अनन्य प्रेम है, वहाँ अंधकार नहीं हो सकता। वे स्वयं ज्योतिर्मय हैं।
सर्वव्यापी ज्योतिर्मय ब्रह्म का ध्यान ही हमारा स्वभाविक जीवन है ---
सर्वव्यापी ज्योतिर्मय ब्रह्म का ध्यान ही हमारा स्वभाविक जीवन है। यही श्रीमद्भगवद्गीता में बताई हुई ब्राह्मी-स्थिति, और कूटस्थ-चैतन्य है। यही हरेक उत्सव -- दीवाली, होली, क्रिसमस, नववर्ष, और अन्य सब कुछ है। पूरी सृष्टि इसमें समाहित, और यह पूरी सृष्टि में व्याप्त है। हम यह भौतिक देह नहीं, सर्वव्यापी ज्योतिर्मय ब्रह्म के साथ एक हैं। हर समय उस की चेतना में रहें। इस ज्योति में से प्रणव यानि अक्षर-ब्रह्म की एक मधुर ध्वनि निःसृत हो रही है। इस ज्योति और अक्षर में स्वयं का विलय कर दें। उस अक्षर-ब्रह्म का मानसिक जप करते रहें। बीच-बीच में कभी कभी आँखें खोलकर इस भौतिक शरीर को भी देख कर मानसिक रूप से कह दें कि मैं यह शरीर नहीं, प्रत्यक्ष ब्रह्म हूँ। यह शरीर तो इस लोकयात्रा के लिए मिला हुआ एक वाहन मात्र है।
(प्रश्न) : मन में आ रहे फालतू और भटकाने वाले विचारों से ध्यान हटा कर भगवान में मन कैसे लगाएँ?
(प्रश्न) : मन में आ रहे फालतू और भटकाने वाले विचारों से ध्यान हटा कर भगवान में मन कैसे लगाएँ?
Monday, 23 December 2024
भगवत्-प्राप्ति ही हमारा स्वधर्म, और सनातन धर्म का सार है ---
भगवत्-प्राप्ति ही हमारा स्वधर्म, और सनातन धर्म का सार है। भारत को सबसे बड़ा खतरा अधर्मियों से है। आज के दिन भारत और सनातन धर्म की रक्षा के लिए अधिकाधिक साधना करें।
भारत के लिए स्वतंत्र, सुरक्षित, सुचारु अंतर्राष्ट्रीय नौपरिवहन अति आवश्यक है ---
भारत के लिए ये ५ जलडमरूमध्य स्वतंत्र और सुचारू अंतर्राष्ट्रीय नौपरिवहन के लिए अति आवश्यक हैं -- मलक्का, बाब-अल-मंडेब, होरमुज, बास्फोरस और जिब्राल्टर। स्वेज़ और पनामा नहरों का चालू रहना भी बहुत अधिक आवश्यक है।