आध्यात्म में कुछ पाने या प्राप्ति की कामना एक मरीचिका है। जो कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है, वह तो हम "स्वयं" हैं। आध्यात्मिक मार्ग पर मार्ग-दर्शन सब को प्राप्त होता है। कोई यदि यह कहे कि उसे मार्ग-दर्शन नहीं मिला है तो वह झूठ बोल रहा है। भगवान की कृपा सब पर समान रूप से है।
Monday, 24 January 2022
आध्यात्म में कुछ पाने या प्राप्ति की कामना एक मरीचिका है ----
हमारी मौन प्रार्थना निश्चित रूप से कब सुनी जाती है? ---
(प्रश्न) : हमारी मौन प्रार्थना निश्चित रूप से कब सुनी जाती है?
सारी साधनाएँ एक बहाना मात्र है, वैसे ही जैसे किसी बच्चे के हाथ में खिलौना ---
सारी साधनाएँ एक बहाना मात्र है, वैसे ही जैसे किसी बच्चे के हाथ में खिलौना ---
दूसरों के सिर काट कर, या पंजों के बल चलकर, कोई बड़ा नहीं बन सकता ---
दूसरों के सिर काट कर, या पंजों के बल चलकर, कोई बड़ा नहीं बन सकता। भौतिक, मानसिक, बौद्धिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक -- हर दृष्टी से हमें स्वयं को बलशाली बनना होगा। पर्वत-शिखर से यदि तालाब में जल आता है तो दोष पर्वत-शिखर का नहीं है। हमें स्वयं को पर्वत शिखर बनना होगा।
अब कोई कामना नहीं है, एकमात्र अभीप्सा है परमात्मा को पाने की यानि आत्म-साक्षात्कार की ---
इस जीवन में मेरी सदा से ही यह इच्छा रही थी कि मुझे ऐसे ही लोगों का साथ मिले जो जीवन में हर दृष्टिकोण से सफल भी हों, और जिनमें भगवान की भक्ति भी कूट कूट कर भरी हो। जहाँ ऐसे लोग रहते हों, उन्हीं स्थानों पर रहने की इच्छा भी थी। लेकिन मेरी ये मनोकामनायें कभी पूर्ण नहीं हुईं। इतने अच्छे मेरे प्रारब्ध कर्म नहीं थे।
सनातन धर्मावलम्बियों को चाहिए कि वे ---
सनातन धर्मावलम्बियों को चाहिए कि वे ---