Thursday, 16 February 2017

मैं कौन हूँ ? ..... दिव्यतम परम चैतन्य .....

मैं कौन हूँ ? ..... दिव्यतम परम चैतन्य .....
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कल्पना कीजिये अधिकतम तापमान जहाँ सब कुछ भस्म हो जाए, कोई भौतिक अवशेष भी न बचे, उससे भी परे जहाँ सारे अणु-परमाणु भी विखंडित हो जाएँ, उस दिव्यतम ऊर्जा, चेतना और विचार से भी परे जो अचिन्त्य है, जो सूक्ष्मतम से विराटतम समस्त अस्तित्व का स्त्रोत है ..... वह परमात्मा है|
वह ही हमारी गति है और वह ही हमारा साध्य, उपास्य और सर्वस्व है|
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उसने स्वयं को ओंकार रूप में व्यक्त किया है जिससे समस्त अस्तित्व की सृष्टि हुई है| ओंकार ही जिसको उपलब्ध होने का मार्ग है ........ वह अन्य कोई नहीं, अंतरतम में हम स्वयं हैं| हम यह देह या कोई विचार नहीं, उससे भी परे का जो अचिन्त्य रूप है वह ही हैं|
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उस चैतन्य की एक झलक मिलते ही, उसका आभास होते ही, निरंतर उसकी चेतना में बने रहना भी स्वाभाविक सहज ध्यान साधना है|
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हम स्वयं ही सम्पूर्ण सृष्टि हैं| जो भी सृष्ट हुआ है और जो नहीं भी हुआ है वह स्वयं हम ही हैं| जो भी सुख, आनंद, प्रेम और समृद्धि हम ढूँढ रहे हैं वह तो हम स्वयं ही हैं| हम स्वयं सच्चिदानंद परम ब्रह्म और परम शिव हैं| हम यह देह नहीं, बल्कि सम्पूर्ण अस्तित्व हैं|
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त्यागी कौन ????? .....
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वास्तव में असली त्यागी तो संसारी लोग हैं, जिन्होनें नश्वर सांसारिक सुखों के लिए और अपने अहंकार की तृप्ति के लिए परमात्मा को त्याग रखा है|
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कर्म प्रधान विश्व की रचना ......
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“कर्म प्रधान विस्व रचि राखा, जो जस करहिं तो तस फल चाखा”
ईश्वर ने संसार को कर्म प्रधान बना रखा है, इसमें जो मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है| हम जो सोचते हैं, जैसा विचार करते हैं वह ही हमारा कर्म है| हर सोच, हर विचार फलीभूत होता है| हर क्रिया की प्रतिक्रया होती है| अतः अपने विचारों और अपनी सोच का निरंतर ध्यान रखें| हमारी हर सोच, हर विचार और हर भाव ही हमारी सृष्टि है| ॐ ॐ ॐ ||
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सार .....
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इस सृष्टि में सब कुछ परमात्मा का है| कोई हमारा नहीं है और हम किसी के नहीं हैं| एक दिन अचानक ही सब कुछ छूट जाएगा और सिर्फ परमात्मा ही हमारे साथ रहेंगे| अतः जब तक उसका दिया समय है उसमें उसको उपलब्ध हो जाना ही सार है|
उस अनंत यात्रा के लिए अभी से स्वयं को तैयार करना ही सार्थकता है|
हे प्रभु, तुम कितने सुन्दर हो! कृपा करो| ॐ ॐ ॐ ||
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आप सब परमात्म रुपी निज आत्माओं को नमन !
ॐ नमः शिवाय ! ॐ ॐ ॐ ||
16फरवरी2016

Monday, 13 February 2017

परमात्मा के प्रेम में हम स्वयं प्रेममय हो जाएँ .....

परमात्मा के प्रेम में हम स्वयं प्रेममय हो जाएँ .....
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वे लोग बहुत भाग्यशाली हैं जो भगवान से प्रेम करते करते स्वयं प्रेममय हो जाते हैं| इस परमप्रेम की परिणिति ही आनंद है| सबसे बड़ा, सर्वश्रेष्ठ, महानतम, दिव्य प्रेम और रोमांस ..... परमात्मा के साथ किया गयां प्रेम है|
कितना सुन्दर और प्रिय लगेगा जब हम परमात्मा को सर्वत्र पाएंगे, जब भगवान स्वयं हमसे बातचीत करेंगे और हमारा मार्गदर्शन करेंगे| यहाँ किसी दार्शनिकता और वाद-विवाद में पड़ने की आवश्यकता नहीं है| किसी से किसी मार्गदर्शन की आवश्यकता भी नहीं है| बस प्रभु को प्रेम करो जो सर्वत्र व्याप्त है, जो सब के ह्रदय में धड़क रहा है, कण कण में व्याप्त है और पूरे जीवन का स्त्रोत है|
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यही भारत की परम्परा है जहाँ एक से बढ़ कर एक प्रभुप्रेमी हुए हैं| हमारे आदर्श भारतवर्ष के असंख्य भक्त ही हो सकते हैं, कोई वेलेंटाइन पादरी नहीं|
जैसे जैसे हम भगवान को प्रेम करेंगे वैसे वैसे ही वे हमारी रक्षा और मार्गदर्शन भी करेंगे, हमारा सारा भार भी वे ही ले लेंगे| बस सिर्फ भगवान् से प्रेम करो| प्रेम की उच्चतम आदर्श अभिव्यक्ति श्रीराधा जी और हनुमान जी द्वारा हुई है| उनके ह्रदय में जो प्रेम था उसका एक कणमात्र भी हमें धन्य कर देगा| भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण साक्षात प्रेम हैं| उन्हें अपने ह्रदय में स्थान दो और दिन रात उनका निरंतर चिंतन करो और प्रेममय हो जाओ| यही हमारा परम धर्म है|
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मैं जो बात कह रहा हूँ अपने अनुभव से कह रहा हूँ कोई निरी कल्पना नहीं है| खूब दुनिया देखी है| जीवन का सार भगवान की भक्ति में ही है, अन्य किसी विषय में नहीं|
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आप सब मेरी ही निजात्मा हो, आप सब भगवान के अंश हो, आप सब को मेरे ह्रदय का गहनतम प्यार समर्पित है|
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ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ !!
कृपाशंकर
हमारी रक्षा कैसे हो ? .......
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यह एक अनुभूत सत्य है| इसके लिए हमें भावजगत में जाना होगा और परमात्मा से जुड़ना होगा| एक भाव निरंतर रखने का अभ्यास करें कि भगवान श्रीराम हर समय हमारी रक्षा कर रहे हैं| भगवान का वचन है .....
"सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते| अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम||"
(He who seeks refuge in me just once, telling me that “I am yours”, I shall give him assurance of safety against all types of beings. This is my solemn pledge)
भगवान ने यहाँ तक कहा है कि ....... “यदि वा रावणः स्वयम्” ........ यदि रावण स्वयं भी मेरी शरण में आ जाए तो उसे भी मैं अभय दूंगा|
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हिन्दू बालिकाओं को तो निरंतर यह अपनी स्मृति में रखना चाहिए|
यदि आप किसी अन्य इष्टदेव के रूप को मानना चाहते हैं तो भी कोई बात नहीं| भगवान शिव या माँ दुर्गा का त्रिशूल, भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र, या हनुमान जी स्वयं निरंतर आपकी रक्षा कर रहे हैं| महत्त्व है निरंतर स्मरण और श्रद्धा-भक्ति का|
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ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

Would You Be My Valentine ? " "क्या आप मुझसे शादी करेंगे ? ....

" Would You Be My Valentine ? " "क्या आप मुझसे शादी करेंगे ?"
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योरोप और अमेरिका में पहले कोई स्थायी विवाह नहीं करता था| लोग बिना विवाह के रखैलें रखते थे| स्त्री का महत्त्व सिर्फ एक उपयोगी वस्तु की तरह होता था, अप्रिय हो गयी तो बदल ली| वहाँ के सारे दार्शनिक और सम्राट अनेक स्त्रियाँ रखते थे| लोग पशुओं की तरह ही रहते थे| सन 478 ई. में इटली में वेलेंटाइन नाम के एक पादरी ने लोगों को समझा बुझाकर उनके विवाह करवाने आरम्भ कर दिए| वहाँ के सम्राट क्लोडियस को यह बात बुरी लगी और उसने सन 14 फ़रवरी 498 ई को सार्वजनिक रूप से वेलेंटाइन को फांसी दे दी| फांसी से पहिले उन सब को वहाँ साक्षी के रूप में खडा किया जिनका विवाह वेलेंटाइन ने करवाया था| उन सब लोगों ने वेलेंटाइन की याद में वेलेंटाइन डे मनाना आरम्भ कर दिया| वेलेंटाइन डे के सन्देश का अर्थ है .... क्या आप मुझसे विवाह करोगे? अब आप लोगों की इच्छा है आप इस वेलेंटाइन डे को कैसे मनाएँ|
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जो लोग वेलेंटाइन दिवस मनाते हैं उन सब लडके, लडकियों और लड़कियों के नाम से फेसबुक पर खाता चलाने वाले लडकों को भी वेलेंटाइन डे की शुभ कामनाएँ ....... भगवान आपको सद्बुद्धि दे|

परमात्मा का मार्ग .......

परमात्मा का मार्ग .......
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जहाँ तक मेरी सीमित और अल्प बुद्धि सोच सकती है, सुषुम्ना पथ ही परमात्मा का मार्ग है| सुषुम्ना मार्ग से सहस्त्रार और ब्रह्मरंध्र पार कर अनंत ब्रह्म से एकाकार होना योगमार्ग की साधना है|
सभी योगी जो परमात्मा के साक्षात्कार हेतु ध्यान साधना करते हैं, साधनाकाल में अपना मेरुदंड यानि कमर सीधी रखते है और भ्रूमध्य में दृष्टी स्थिर रखते हैं|
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इसका कारण यह है कि जब इन्द्रियों से चेतना हटने लगती है तो प्राण ऊर्जा, आध्यात्मिक नेत्र जिसे तृतीय नेत्र भी कह सकते हैं जो दोनों भौतिक नेत्रों के मध्य में है के और आज्ञाचक्र के मध्य की ओर स्वतः निर्देशित होती है| आध्यात्मिक नेत्र ----- आज्ञा चक्र (जो मस्तिकग्रंथी/मेरुशीर्ष यानि Medulla Oblongata में है) का प्रतिबिम्ब है| आज्ञा चक्र से प्रकाश दोनों आँखों में आता है| भ्रूमध्य में ध्यान से वह प्रकाश भ्रूमध्य में स्थिर रूप से दिखना आरम्भ हो जाता है और योगी की चेतना ब्राह्मीचेतना होने लगती है और ज्योतिर्मय ब्रह्म का आभास होने लगता है| अनाहत नाद भी धीरे धीरे सुनाई देने लगता है|
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भावजगत में सम्पूर्ण समष्टि के साथ स्वयं को एकाकार करें| आप यह देह नहीं बल्कि परमात्मा की अनंतता और उनका सम्पूर्ण प्रेम हैं| शिवनेत्र होकर कूटस्थ में सर्वव्यापी सद्गुरु रूप शिव का ध्यान करें|
निष्ठावान मुमुक्षु का सारा मार्गदर्शन निश्चित रूप से भगवान स्वयं करते हैं और उसकी रक्षा भी होती है| आपकी सारी जिज्ञासाओं के उत्तर और सारी समस्याओं का समाधान परमात्मा में ही मिलेगा|
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यहाँ तक की और इससे आगे की प्रगति साधक गुरु रूप में परमात्मा की कृपा से ही कर सकता है|
गुरुकृपा का पात्र साधक तभी हो सकता है जब उसके आचार विचार सही हों, व भक्ति और समर्पण की पूर्ण भावना हो|
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हठयोग की साधनाओं का उद्देश्य यही है कि साधक स्वस्थ हो और सुषुम्ना पथ पर अग्रसर हो|
पर सबसे महत्वपूर्ण है ----- भक्ति यांनी प्रभु के प्रति परम प्रेम, और उन्हें समर्पित होने की प्रबल अभीप्सा|
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हे परमशिव प्रभु, आप सब का कल्याण करो, आपकी सृष्टि में सब सुखी हों, कोई दुःखी ना हो, सबके ह्रदय में आपके प्रति परम प्रेम जागृत हो, और सब आनंदमय हों|
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ॐ नमः शिवाय! ॐ शिव! ॐ ॐ ॐ||

हृदय की एक घनीभूत पीड़ा व्यक्त हुई है .....

मैं सुदर्शन चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण और धनुर्धारी भगवान श्रीराम को नमन करता हूँ जिन्होंने आतताइयों के संहार के लिए अपने हाथों में अस्त्र धारण कर रखे हैं| उनकी चेतना सभी भारतवासियों में जागृत हो| ॐ ॐ ॐ ||
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भारत की प्रत्येक नारी आत्मरक्षा में प्रवीण हो, आतताई के प्राण लेने में भी सक्षम हो, और सदैव अपनी अस्मिता की रक्षा हेतु आत्मोत्सर्ग करने में भी तत्पर हो|
उसे सदा यह बोध रहे कि जीवन में मृत्यु में हर परिस्थिति में भगवान शिव की शक्ति निरंतर उसकी रक्षा कर रही है और करेगी|
हर नारी अबला नहीं सबला बने, भोग्या नहीं पूज्या बने, धर्मरक्षिका बने| ॐ ॐ ॐ ||
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यदि हम आत्मरक्षा करने में समर्थ नहीं हैं, संगठित नहीं हैं, हमारे में समाज व राष्ट्र की चेतना नहीं है, हमारे में आत्म-सम्मान नहीं है, तो हमारा वैभव, समृद्धि, संस्कृति, धर्म, घर-परिवार कुछ भी सुरक्षित नहीं है| न तो हमारे साधू-संत बचेंगे, न हमारे धर्मग्रन्थ, न हमारे देवालय, हमारा भौतिक अस्तित्व भी नहीं बचेगा|
भारत का कितना वैभव था, उस पर विचार करें| हमारी यह स्थिति कैसे हुई उस पर भी विचार करें|
आज जब हमारी अस्मिता पर मर्मान्तक प्रहार हो रहे हैं, तब हमें आत्म-रक्षा में समर्थ और संगठित होना ही होगा|
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अखंड भारत में कितना वैभव था, कितने भव्य मंदिर थे, कितनी महान संस्कृति थी, ज्ञान-विज्ञान की पराकाष्ठा थी, हमारे कितने गुरुकुल थे, कितने महान आचार्य थे, पर आज वह सब कहाँ है? हम क्यों पददलित हुए? हमारा अस्तित्व और हमारी अस्मिता प्रभु की परम कृपा से ही थोड़ी बहुत बची है| उस पर भी आसुरी शक्तियाँ प्रहार कर रही हैं| हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान इतना अधिक क्यों गिर गया है?
चेतना का हमारा स्तर इतना अधिक गिर गया है कि हम अपने अस्तित्व की रक्षा के प्रति भी निरपेक्ष बने हुए हैं|
कहीं न कहीं से कुछ न कुछ हमें पुनः आरम्भ करना ही होगा| हम अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं, इस पर हमें विचार करना ही होगा| ॐ ॐ ॐ ||
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हम आत्महीनता के बोध से मुक्त हों| हमें अपने धर्म और संस्कृति पर अभिमान हो| यह हमारा धर्म ही है जो अहैतुकी भक्ति और परोपकार की शिक्षा देता है| अन्य सभी मतों ने परोपकार के नाम पर परपीडन ही किया है| अन्य मत एक तरह की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्थाएं हैं जिन्होंने अपने मत का उपयोग अपने साम्राज्य विस्तार और अर्थलोलूपता के लिए किया है|
हम विदेशी प्रभाव से मुक्त हों| गर्व से कहो हम हिन्दू हैं| सत्य सनातन धर्म की जय| ॐ ॐ ॐ

जब तक पकिस्तान का अस्तित्व है, तब तक भारत में कभी सुख-शांति नहीं हो सकती .....

Feb.13, 2017.

जब तक पकिस्तान का अस्तित्व है, तब तक भारत में कभी सुख-शांति नहीं हो सकती .....
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कश्मीर के कुलगाम जिले में कल शहीद हुए दो जवानों व दो नागरिकों को श्रद्धांजलि| भगवान उनको सद्गति प्रदान करे| घायल हुए जवान शीघ्र स्वस्थ हों|
आतंकवादियों के समर्थन में अलगाववादियों ने आज पूरी कश्मीर घाटी में बंद कर रखा है| जिस समय आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ चल रही थी, कई सौ लोगों की भीड़ आतंकवादियों के समर्थन में नारे लगा रही थी और सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंक रही थी| इतना अधिक भ्रमित कर रखा है पकिस्तान ने कश्मीर के लोगों को मजहब के नाम पर जैसे पकिस्तान में मिलने पर वे स्वर्ग में पहुँच जायेंगे|
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कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान की वास्तविकता का नहीं पता है कि पृथ्वी पर यदि कहीं कोई नर्क है तो वह पकिस्तान ही है| पाक अधिकृत कश्मीर के लोग पाकिस्तानियों के हाथों कितने दुखी हैं और नर्क की यंत्रणा झेल रहे हैं, इसका पता संभवतः कश्मीरियों को नहीं है| वहाँ के लोग पकिस्तान से मुक्ति चाहते हैं| पंजाब को छोड़कर पकिस्तान के सभी प्रांत, पाकिस्तान से मुक्त होना चाह्ते हैं|
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पाकिस्तान जैसे कट्टर इस्लामिक देश की चीन जैसे कट्टर नास्तिक देश से मित्रता का एकमात्र कारण भारत से द्वेष है| चीन में मस्जिदों में अज़ान पर, रमजान के महीने में रोज़े रखने पर और इस्लाम की शिक्षा पर पूर्ण प्रतिबन्ध है| चीन में इमामों को सडक पर नचाया जाता है और उनसे कसम दिलवाई जाती है कि वे बच्चों को इस्लाम की शिक्षा नहीं देंगे| चीन में जो मुसलमान सरकारी कर्मचारी हैं उनसे नारे लगवाये जाते हैं कि उनका वेतन अल्लाह से नहीं बल्कि चीन की सरकार से मिलता है| आश्चर्य की बात तो यह है कि मुस्लिम जगत में कोई भी चीन के इस कदम का विरोध नही करता है| भारत के मानवाधिकारवादी भी शांत रहते हैं| दुखद बात तो यह है की भारत में पकिस्तान का विरोध करने वाले को साम्प्रदायिक की उपाधी तुरंत दे दी जाती है| पाकिस्तान एक असत्य और अन्धकार की शक्ति है, जिसका जितनी शीघ्र नाश हो जाए उतनी ही शीघ्र इस विश्व में शान्ति होगी|
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ॐ ॐ ॐ ||