एक दिन ध्यान में गुरु महाराज आये, उनकी देह भुवन-भास्कर की तरह देदीप्यमान और घनीभूत प्रकाशमय थी। उनकी आँखें बड़ी तेजस्वी थीं, जिनकी ओर देखा भी नहीं जा रहा था। कुछ समय तक उन्होने बड़े ध्यान से मेरी ओर देखा और मुंह से कुछ कहे बिना ही एक उपदेश देकर अपनी घनीभूत प्रकाशमय देह को परमात्मा के प्रकाश में विलीन कर दिया।
Tuesday, 17 December 2024
एक दिन ध्यान में गुरु महाराज आये थे ---
16 दिसंबर को विजय दिवस है ----
कल 16 दिसंबर को विजय दिवस है जो 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस युद्ध के अंत में ढाका में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। इस युद्ध में लगभग 3,900 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए और 9851 घायल हुए।
सन १९७१ के युद्ध में झुंझुनूं के ही मेरे एक पूर्व नौसैनिक मित्र द्वारा किया गया अद्वितीय पराक्रम ---
भारत का अभ्युदय एक प्रचंड आध्यात्मिक शक्ति से होगा --- .
भारत का अभ्युदय एक प्रचंड आध्यात्मिक शक्ति से होगा ---
भक्ति का दिखावा, भक्ति का अहंकार, और साधना का समर्पण ---
भक्ति का दिखावा, भक्ति का अहंकार, और साधना का समर्पण ......
हमारी साँसें प्राणों से नियंत्रित होती हैं या प्राण साँसों से ---
हमारी साँसें प्राणों से नियंत्रित होती हैं या प्राण साँसों से नियंत्रित होते हैं इसका मुझे नहीं पता, लेकिन दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। साँसों पर ध्यान करने से ही प्राण-तत्व की अनुभूति होती है, और प्राण-तत्व ही हमें परमात्मा की अनुभूति कराता है।
अनिर्वचनीय परमप्रेम ---
एक बात तो निश्चित है कि हम अपना कल्याण स्वयं नहीं कर सकते। यह हमारे सामर्थ्य के बाहर की बात है। पता नहीं कितने जन्मों से यह प्रयास चल रहा है। अब थक-हार कर अंततः भगवान के समक्ष समर्पण करना ही होगा। फिर यह समस्या भगवान की हो जाएगी कि हमारा कल्याण कैसे हो। गीता में भगवान कहते हैं --
एक बात तो निश्चित है कि हम अपना कल्याण स्वयं नहीं कर सकते। यह हमारे सामर्थ्य के बाहर की बात है। पता नहीं कितने जन्मों से यह प्रयास चल रहा है। अब थक-हार कर अंततः भगवान के समक्ष समर्पण करना ही होगा। फिर यह समस्या भगवान की हो जाएगी कि हमारा कल्याण कैसे हो। गीता में भगवान कहते हैं --