Tuesday, 10 December 2024

जीवन में सुख, शांति और समृद्धि से भी अधिक महत्वपूर्ण है परमात्मा से परम प्रेम ---

जीवन में सुख, शांति और समृद्धि से भी अधिक महत्वपूर्ण है परमात्मा से परम प्रेम और स्वयं में परमात्मा की अभिव्यक्ति| इसके लिए स्वयं को निरंतर अभ्यास करना होता है| जब कोई कुआँ खोदता है तब प्रचुर जल प्राप्त होने तक जल के सिवा प्राप्त अन्य सब कुछ दूर हटा देता है| सोने की खदान में टनों मिटटी हटाने पर कुछ ग्राम सोना प्राप्त होता है| धैर्य खो देने पर कुछ भी नहीं मिलता| उसी लगन से परमात्मा की खोज हमें करनी होती है| वह तभी होगी जब हमें उस से प्रेम होगा| उस प्रेम को निरंतर समर्पित करते रहो| ॐ ॐ ॐ ||

१० दिसंबर २०१७

ये प्रश्न उन लोगों से है जिन्होंने देश पर छः दशकों से अधिक तक राज्य किया है .......

 ये प्रश्न उन लोगों से है जिन्होंने देश पर छः दशकों से अधिक तक राज्य किया है .......

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(१) जब हम "राम जन्मभूमि" की बात करते थे तो कहा जाता था कि मामला न्यायालय में है| पर अब नेशनल हेराल्ड का मामला क्या न्यायालय में नहीं है जो संसद को नहीं चलने दिया जा रहा है ? यह मुकदमा न्यायालय में तब से चल रहा है जब भाजपा सत्ता में नहीं थी, और माननीय श्री सुब्रमनियम स्वामी भी भाजपा में नहीं थे|
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(२) आज संसद में नारे लगे .... मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी, नहीं चलेगी ..... | भारत के समझदार लोगों से निवेदन हैं कि वे स्वविवेक से निर्णय करें की तानाशाह कौन कौन थे ?
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(३) जो लोग तानाशाह थे उन्होंने जी हजूरी न करने पर अपने ही सम्माननीय लोगों के साथ क्या व्यवहार किया?
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देश के प्रथम राष्ट्रपति डा.राजेंद्र प्रसाद के साथ, और दो बार कार्यकारी प्रधानमन्त्री और बहुत लम्बे समय तक केन्द्रीय मंत्री रहे श्री गुलझारीलाल नंदा के साथ, और अन्य कई सम्माननीय लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया गया ?
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जब 12 वर्षों तक देश के रा्ष्ट्रपति रहने के पश्चात राजेन्द्र बाबू राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के पश्चात् पटना जाकर रहने लगे तो उनके लिए वहाँ पर एक सरकारी आवास तक की व्यवस्था नहीं की.गयी| उनके पास अपना कोई निजी मकान नहीं था| उनके स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा गया| दिल्ली से पटना पहुंचने पर वे बिहार विद्यापीठ, सदाकत आश्रम के एक सीलनभरे कमरे में रहने लगे थे| उनकी तबीयत पहले से खराब रहती थी जो पटना जाकर ज्यादा खराब रहने लगी| वे दमा के रोगी थे| सीलनभरे कमरे में रहने के बाद उनका दमा ज्यादा बढ़ गया| उनके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं की गयी|
जब उनका देहांत हो गया तब देश के तत्कालीन प्रधानमन्त्री ने उनकी अंत्येष्टि में जाना भी उचित नहीं समझा| डा,संपूर्णानंद ने लिखा था कि उन्हें देश के प्रधानमन्त्री ने डा.राजेंद्र प्रसाद के अंतिम दर्शनों के लिए नहीं जाने दिया| दिल्ली से अन्य नेताओं को भी नहीं जाने दिया गया|
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केंद्र में गृहमंत्री और दो बार कार्यकारी प्रधान मंत्री रह चुके श्री गुलझारी लाल नंदा पद मुक्त होने के पश्चात एक किराये के मकान में रहे जिसका किराया चुकाने के रुपये भी उनके पास नहीं थे| मकान मालिक ने सामान फुटपाथ पर फेंक दिया पर सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली| अपना इलाज़ कराने के रूपये भी उनके पास नहीं थे|
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देश के प्रधानमंत्री रहे श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु का रहस्य भी अभी नहीं खुला है|
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विचारों से सहमती नहीं होने के कारण अपने ही लोगों के साथ कांग्रेस के नेताओं ने बहुत दुर्व्यवहार किया|
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जब माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय कोई भी ऐसा आरोप नहीं है जो उन पर नहीं लगाया गया था, कोई भी ऐसी निंदा नहीं है जो उनकी नहीं की गयी थी, और कोई भी ऐसी जाँच नहीं है जो उनके विरुद्ध नहीं बैठाई गयी थी| उनकी जितनी बुराई की गयी थी उतनी तो स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी की भी नहीं की गयी थी| फिर भी वे विचलित नहीं हुए और हर परिस्थिति का डटकर सामना किया| उन्होंने पलट कर किसी से कुछ नहीं कहा और देवाधिदेव महादेव की तरह चुपचाप विषपान किया| यह उनकी महानता का लक्षण है|
दूसरी ओर न्यायालय के एक सम्मन मात्र से पूर्व राजमाता मैडम एंटोनिया माईनो उर्फ़ सोनिया गांधी विचलित हो गयी हैं| वे ही नहीं उनके राजकुमार और सारे चेले चेलियाँ धुआँ फेंकने लगे हैं| सम्मन तो कोर्ट से मिला है और उत्तर संसद में दे रहे हैं| पूरी कांग्रेस पार्टी ही पागलों की तरह उन्मादग्रस्त हो गयी है|
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भगवन देशवासियों को सद्बुद्ध दे| ॐ नमः शिवाय | ॐ ॐ ॐ ||
१० दिसंबर २०१५

भारतवर्ष और सनातन/हिन्दू धर्म रक्षार्थ अब धर्माचरण और धर्मजागरण अति आवश्यक है ----

 भारतवर्ष और सनातन/हिन्दू धर्म रक्षार्थ

अब धर्माचरण और धर्मजागरण अति आवश्यक है ----
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परम दानव आसुरी शक्तियों द्वारा सनातन हिन्दू धर्म और संस्कृति पर योजनाबद्ध रूप से वर्तमान में जितने मर्मान्तक प्रहार हो रहे हैं उससे हमारे भावी अस्तित्व पर एक प्रश्नचिह्न लगता दिखाई दे रहा है| हिन्दुओं को अपने धर्म का ज्ञान भी बढ़ाना होगा और कट्टर (जो कट कर भी ना टरे) बन कर उस पर आचरण भी करना पडेगा| साथ साथ दैवीय शक्तियों का जागरण भी करना होगा|
हमें अपनी संख्या भी बढ़ानी होगी क्योंकि हिन्दुओं के अल्पसंख्यक होने पर अब पाकिस्तान नहीं बल्कि खुरासान नाम से इराक बनेगा| फिर भारत में यज़ीदियों के स्थान पर हिन्दू होंगे और वो ही घटनाक्रम दोहराया जाएगा जो वर्तमान में इराक में हो रहा है और विगत में भारत में होता रहा है|
खुल कर डंके की चोट हिन्दू संगठनों को 'घर वापसी' का कार्यक्रम करना चाहिए| कोई अपराध बोध नही होना चाहिए| अन्यथा न संविधान होगा न पार्लियामेंट , तब सिर्फ एक ऐसा कानून होगा जिसमे संशोधन का सवाल ही नही और हिन्दुओं के लिए के लिए उसमे मृत्यु के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नही होगा|
कुछ बिछुड़े हुए भाइयों की घर वापसी पर रुदन प्रलाप करने वाले उस समय कहाँ मर जाते हैं जब ईसाई मिशनरियां आदिवासी क्षेत्रों में हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन करती हैं| अब हिन्दू चुप नहीं बैठेगा| यह परिवर्तन नहीं परावर्तन है| पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू कहाँ लुप्त हो गए? उन्हें आसमान खा गया या धरती निगल गयी?
निकट भविष्य में देवासुर संग्राम निश्चित है ..सही समय की प्रतीक्षा है|
वैसे भी अत्यधिक लोभ के कारण विनाश मंडरा रहा है| जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न वैश्विक उष्णता से ध्रुवों की बर्फ पिघल कर पृथ्वी को अस्थिर कर रही है| अकाल और प्रलय का खतरा मंडरा रहा है| तीसरा विश्व युद्ध भी अवश्यम्भावी है|
पर एक बात निश्चित है कि सनातन धर्म ही भारत का भविष्य है, भारत का भविष्य ही इस पृथ्वी का भविष्य है, और इस पृथ्वी का भविष्य ही इस सृष्टि का भविष्य है| यदि सनातन हिन्दू धर्म ही नष्ट हो गया तो यह सृष्टि भी नष्ट हो जायेगी| फिर नई सृष्टि ही बसेगी|
धर्म का आचरण ही धर्म की रक्षा है| भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि थोड़ी-बहुत अल्प मात्रा में भी धर्म का आचरण महा भय से हमारी रक्षा करता है| हमारे सब कष्टों का कारण धर्म का आचरण नहीं करना ही है| हम धर्म का आचरण करेंगे तभी भगवान हमारी रक्षा करेंगे, अन्यथा विनाश के लिए तैयार रहें|
ॐ नमः शिवाय| जय श्रीराम| ॐ ॐ ॐ ||
१० दिसंबर २०१४

"हिन्दू स्वयंसेवक संघ" के प्रमुख माननीय श्री रविकुमार जी से भेंट ---

आज वयोवृद्ध माननीय श्री रवि कुमार जी से बहुत अच्छा सत्संग हुआ| आप हिन्दुत्व के एक अंतर्राष्ट्रीय चिंतक, प्रखर तपस्वी विद्वान और लेखक हैं| मूल रूप से आप तमिलनाडु से हैं पर आपका हिन्दी का ज्ञान अनुपम है| भारत से बाहर के 40 देशों में जा कर वहाँ रहने वाले हिंदुओं को संगठित करने हेतु पूरे विश्व में 1500 के लगभग इकाइयाँ खोलने में आपका बहुत बड़ा योगदान है| आप रा.स्व.संघ के पूर्णकालिक प्रचारक हैं जिन का कार्य विदेशों में "हिन्दू स्वयंसेवक संघ" के नाम से प्रवासी भारतीय हिंदुओं को संगठित करना था| वर्तमान में आप संघ के प्रखर विचारकों में से एक हैं जिनका कार्य देश के प्रबुद्ध लोगों से मिलकर उन्हें संगठित करना है| .

दूसरा सत्संग अरविंदाश्रम के श्री चंद्रप्रकाश जी खेतान से हुआ जो अब तो पूर्णतः अति उच्च कोटि के एक आध्यात्मिक साधक हैं, पर कभी अर्थशास्त्री के रूप में कनाडा सरकार के आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं| .
प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक श्री हनुमान प्रसाद जी से भी प्रकृति के प्रदूषण आदि विषयों पर आज अच्छी चर्चा हुईं| कृपा शंकर
10 दिसंबर 2019

हमारा अन्नदाता कौन है?

कृषि एक व्यवसाय है जो कृषक का धर्म है, कोई समाजसेवा नहीं| कृषक खेती कर के अन्न का उत्पादन करता है, अपने स्वयं का और अपने परिवार का पेट भरने के लिए| अतिरिक्त अन्न को बेचकर वह अपनी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करता है|

जिस काम के बदले में हमें धन मिलता है, वह व्यापार है, समाजसेवा नहीं| यह किसान-अन्नदाता, किसान-अन्नदाता का ढकोसला अब समाप्त होना चाहिए| किसान -- भगवान है क्या? अगर किसान पेट भरता है तो पिछले आठ-नौ महीनों से कोविड-१९ महामारी के काल में सरकार गरीबों को मुफ्त में राशन क्यों बाँट रही है? अन्नदाता यदि किसान है तो वह स्वयं अन्न क्यों नहीं बाँट रहा?
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यदि किसान भगवान है तो जुलाहे, बुनकर और दर्जी भी भगवान हैं| ये अपना धर्म नहीं निभाते तो हम क्या नंगे घूमते? जिसने बर्तन बनाए वह भी भगवान है, अन्यथा हम खाना किस में बनाते और खाते? जिसने बिजली बनाई, सड़कें बनाईं, और अन्य सब कुछ बनाया, वे सब भी फिर भगवान ही हैं| जिसने दवाइयाँ बनाईं, कागज, कलम आदि बनाए, वे भी भगवान हैं| मेडिकल, शिक्षा, सफाई आदि से जुड़े सभी व्यवसायों के लोग भी भगवान ही हैं, सिर्फ किसान ही क्यों? सृष्टि में हर कार्य का अपना-अपना महत्व है| जब धरती पर खेती-बाडी़ नहीं होती थी तब भी लोग जीवित थे|
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सृष्टि का पेट भगवान भरता है जिसने यह सृष्टि बनाई है| मेरे लिए तो मेरी अन्नदाता, माँ भगवती अन्नपूर्णा है| वे ही इस सृष्टि का पालन-पोषण कर रही हैं| जगन्माता के सब रूप उन्हीं के हैं| मैं तो उन्हीं का भिक्षान्न खाता हूँ|
"भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी||"
सार की बात :--- हम सभी का अन्नदाता स्वयं परमात्मा है, जिस ने इस सृष्टि की रचना की है और सभी प्राणियों का पालन-पोषण कर रहा है|
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पुनश्च: --- तैत्तिरीयोपनिषद् में अन्न को ब्रह्म बताया गया है ---
"सः अन्नं ब्रह्म इति व्यजानात् हि |"
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१० दिसंबर २०२० > पुनश्च: ---
1― बीज खरीदने के लिए सब्सिडी।
2― कृषि उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी।
3― यूरिया (खाद) खरीदने के लिए सब्सिडी।
4― ट्रेक्टर ट्रोली खरीदने पर सब्सिडी।
5― पशुधन खरीदने पर सब्सिडी।
6― खेती पर लगने वाले अन्य खर्च के लिए सब्सिडी युक्त कर्ज।
7― किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज।
8― जैविक खेती करने पर सब्सिडी।
9― खेत में डिग्गी बनाने हेतू सब्सिडी।
10― फसल प्रदर्शन हेतू सब्सिडी।
11― फसल का बीमा।
12― सिंचाई पाईप लाईन हेतू सब्सिडी।
13― स्वचालित कृषि पद्धति अपनाने वाले किसानों को सब्सिडी।
14― जैव उर्वरक खरीदने पर सब्सिडी।
15― नई तरह की खेती करने वालो को फ्री प्रशिक्षण।
16― कृषि विषय पर पढ़ने वाले बच्चों को अनुदान।
17― सोलर एनर्जी के लिए सब्सिडी।
18― बागवानी के लिए सब्सिडी।
19― पंप चलाने हेतु डीजल में सब्सिडी।
20― खेतो में बिजली उपयोग पर सब्सिडी।
इसके अलावा
21― सूखा आए तो मुआवजा।
22― बाढ़ आए तो मुआवजा।
23― टिड्डी-कीट जैसे आपदा पर मुआवजा।
24― सरकार बदलते ही सभी तरह के कर्ज माफी।
25― सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए अनेकों और तरह की योजनाएं बनाई है, जिसमें डेयरी उत्पाद मत्स्य पालन बागवानी फल व सब्जी पर भी अनेकों प्रकार की सब्सिडी दे रही है।
और इसके अलावा
26― इन्हीं से 20 रुपए किलो गेहूं खरीद कर 2 रुपए किलो में इन्हें दिया जा रहा है।
27― पक्के मकान बनाने के लिए 3 लाख रुपए तक सब्सिडी दी जा रही है।
28― शौचालय निर्माण फ्री में किया जा रहा है।
29― घर पर गंदा पानी की निकासी के लिए होद फ्री में बनवाई जा रही है।
30― साफ पीने का पानी फ्री में दिया जा रहा है।
31― बच्चों को पढ़ने खेलने व अन्य तरह के प्रशिक्षण फ्री में करवाए जा रहे हैं।
32― साल के 6000 रुपए खाते में फ्री में आ रहे हैं।
33― तरह-तरह की पेंशन वगैरा आ रही है।
34― मनरेगा में बिना कार्य किए रुपए दिए जा रहे हैं।
अगर उसके बावजूद भी इस देश के किसानों को सरकार से अपना हक नहीं मिल रहा तो शायद कभी नहीं मिलेगा।
एक निगाह उन मजदूरों, छोटे रेहड़ी वालों, छोटे व्यवसायियों दुकानदार, वकीलों, डॉक्टर, ड्राइवर, सुरक्षा बल, pvt नौकरी वाले, पढ़े-लिखे बेरोजगारों, कचरा बीन कर पेट पालने वालों पर डालो।
रोज नई नई समस्या से जूझते हैं, रोज रोज मरते हैं परन्तु कभी भीड इकट्ठा कर क़ानून को बंधक नही बनाया ।

जिनके मन में नन्दलाल बसे, तिन और को नाम लियो न लियो ---

"जिनके मन में नन्दलाल बसे, तिन और को नाम लियो न लियो।

जिसने बृंदावन धाम कियो, तिन औनहु धाम कियो न कियो।" 🌹🌹🌹
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पिछले कुछ समय में मेरे अनेक प्रियजन, असमय काल-कवलित हुये हैं| तीन माह पूर्व मेरे अतिप्रिय बड़े भाई साहब भी अचानक ही चले गए थे| जीवन का कोई भरोसा नहीं है| पता नहीं कौन सी साँस अंतिम हो| अतः हर समय भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए|
मेरे बाल्यकाल और युवावस्था के मित्रों में से सिर्फ एक ही मित्र जीवित बचा है| वह भी रुग्ण चल रहा है| रामचरितमानस की ये पंक्तियाँ ही सांत्वना देती हैं ---
"सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहुँ मुनिनाथ |
हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ||"
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गीता में भगवान कहते हैं :--
"जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य| तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि||२:२७||"
अर्थात् जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है; इसलिए जो अटल है अपरिहार्य - है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये||
"वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि |
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही ||२:२२||"
जैसे मनुष्य जीर्ण वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नये वस्त्रों को धारण करता है, वैसे ही देही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है||
जीवात्मा सदा निर्विकार ही रहती है|
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कवि नाथुराम शास्त्री "नम्र" की लिखी यह प्रसिद्ध कविता आज याद आ रही है ---
"क्षणभंगुर - जीवन की कलिका,
कल प्रात को जाने खिली न खिली |
मलयाचल की शुचि शीतल मन्द,
सुगन्ध समीर मिली न मिली || 🌹🙏🌹
कलि काल कुठार लिए फिरता,
तन नम्र से चोट झिली न झिली |
कहले हरिनाम अरी रसना,
फिर अन्त समय में हिली न हिली || 🌹🙏🌹
मुख सूख गया रोते रोते,
फिर अमृत ही बरसाया तो क्या |
जब भव सागर में डूब चुके,
तब नाविक को लाया तो क्या || 🌹🙏🌹
युगलोचन बन्द हमारे हुए,
तब निष्ठुर तू मुस्काया तो क्या |
जब जीवन ही न रहा जग मे,
तब आकर दरश दिखाया तो क्या || 🌹🙏🌹
बली जाऊँ सदा इन नैनन की,
बलिहारी छटा पे में होता रहूँ |
मुझे भूले न नाम तुम्हारा प्रभु,,
जागृत या स्वप्न में सोता रहूँ || 🌹🙏🌹
हरे कृष्ण ही कृष्ण पुकारूँ सदा,
मुख आँसुओ से नित धोता रहूँ |
बृजराज तुम्हारे बियोग में मैं,
बस यूँ ही निरन्तर रोता रहूँ || 🌹🙏🌹
शाम भयी पर श्याम न आये,
श्याम बिना क्यों शाम सुहाये |
व्याकुल मन हर शाम से पूछे,
शाम बता क्यों श्याम न आये || 🌹🙏🌹
शाम ने श्याम का राज बताया,
शाम ने क्योंकर श्याम को पाया |
शाम ने श्याम के रंग में रंग कर,
अपने आप को श्याम बनाया || 🌹🙏🌹
वह पायेगा क्या रस का चस्का,
नहीं कृष्ण से प्रीत लगायेगा जो |
हरे कृष्ण उसे समझेगा वही,
रसिको के समाज में जायेगा जो || 🌹🙏🌹
ब्रज धूरी लपेट कलेवर में,
गुण नित्य किशोर के गायेगा जो |
हँसता हुआ श्याम मिलेगा उसे,
निज प्राणों की बाजी लगायेगा जो || 🌹🙏🌹
मन में बसी बस चाह यही,
प्रिय नाम तुम्हारा उचारा करूँ |
बिठला के तुम्हें मन मन्दिर में,
मनमोहिनी रूप निहारा करूँ ||🌹🙏🌹
भर के दृग पात्र में प्रेम का जल,
पद पंकज नाथ पखारा करूँ |
बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभो,
नित आरती भव्य उतारा करूँ || 🌹🙏🌹
जिनके मन में नन्दलाल बसे,
तिन और को नाम लियो न लियो |
जिसने बृंदावन धाम कियो,
तिन औनहु धाम कियो न कियो ||" 🌹🙏🌹
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आप अब को सादर सप्रेम नमन !! ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !! 🌹🙏🌹
कृपा शंकर
१० दिसंबर २०२०

भगवत्-प्राप्ति" (आत्म-साक्षात्कार) ही हमारा एकमात्र शाश्वत स्वधर्म है ---

"भगवत्-प्राप्ति" (आत्म-साक्षात्कार) ही हमारा एकमात्र शाश्वत स्वधर्म है।"

इसके अतिरिक्त अन्य सब परधर्म हैं।"
गीता में भगवान हमें स्वधर्म में ही स्थित रहने, को कहते हैं ---
"नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्॥२:४०॥"
"श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥३:३५॥"
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हमारे सब दुःखों, कष्टों, और पीड़ाओं का एकमात्र कारण स्वधर्म से विमुखता है। अन्य कोई कारण नहीं है। .
सत्य को समझने/जानने की जिज्ञासा और उसे निज जीवन में व्यक्त करने की अभीप्सा शाश्वत है। सत्य ही परमात्मा है। भगवान सत्य-नारायण हैं। हम उन के साथ एक हों, यही हमारा धर्म है। यह धर्म ही इस सृष्टि को चला रहा है। यह ही सनातन-धर्म है। भारत की विराट एकता का आधार भी यह धर्म है।
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इस धर्म की पुनः प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण हो, इसके लिए हमें ईश्वर की सूक्ष्म दैवीय शक्तियों को साधना द्वारा जागृत कर उनकी सहायता लेनी ही होगी। भगवान हमारी सहायता करेंगे। हम अपनी चेतना को परमात्मा की अनंत चेतना से जोड़ कर उनके साथ एक होकर ही समष्टि की सर्वश्रेष्ठ सेवा कर सकेंगे। तभी असत्य का अंधकार दूर होगा।
ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१० दिसंबर २०२३