Tuesday, 17 April 2018

कहते हैं मनुष्य को घमंड नहीं करना चाहिए .....

कहते हैं मनुष्य को घमंड नहीं करना चाहिए .....
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बड़े बड़े सुलतान जिनके नाम से दुनिया काँपती थीं, उनकी सल्तनतें मिटटी में मिल गईं और उनके वारिसों को अपना सब कुछ छोड़ कर भागना पड़ा| बात कर रहा हूँ सल्तनत-ए-उस्मानिया (Ottoman Empire) यानि खिलाफत-ए-उस्मानिया की जिसकी स्थापना उस्मान गाज़ी ने २७ जुलाई १२९९ को की थी और जिसका पतन नवम्बर १९२२ में हो गया| सत्ता में आखिरी सुलतान खलीफा-ए-इस्लाम महमद-VI को अपने महल के पिछवाड़े से निकल कर इटली भागना पड़ा|
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महल से भागते हुए सुलतान की फोटो इस लेख में दिए लिंक को दबाने से आ जायेगी| कमेन्ट बॉक्स में सल्तनत के नक़्शे की लिंक भी दी हुई है, जो दिखाता है कि यह कितनी बड़ी सल्तनत थी| खलीफा-ए-इस्लाम महमद-VI के उत्तराधिकारी अब्दुल मजीद (१९२२-२४) को तो अपने वतन की हवा भी नसीब नहीं हुई| वह १९२४ में फ़्रांस में निर्वासित जीवन जीते हुए ही मर गया|
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भारत में महात्मा गाँधी ने खलीफा-ए-इस्लाम को बापस गद्दी पर बैठाने के लिए खिलाफत आन्दोलन चलाया पर मुस्तफा कमाल पाशा ने महात्मा गाँधी को कोई भाव नहीं दिया| गाँधी के खिलाफत आन्दोलन ने भारत का बहुत अधिक अहित किया| केरल में लाखों हिन्दुओं की हत्याएँ हुईं और पकिस्तान की नींव पडी| पकिस्तान के राष्ट्रपिता वास्तव में महात्मा गाँधी ही घोषित होने चाहिए थे| पाकिस्तान बनाने में बहुत बड़ा योगदान तो महात्मा गाँधी और जवाहर लाल नेहरु का था, मोहम्मद अली जिन्ना से भी अधिक|
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खिलाफत-ए-उस्मानिया से पहले खिलाफत-ए अब्बासिया थी जिसका पतन भी अत्यधिक हिंसा से हुआ| १२५८ में खिलाफत-ए-अब्बासिया का तातारियों के हाथों कत्ल-ए-आम के साथ खातमा हुआ| अंतिम अब्बासी खलीफा-ए-ईस्लाम मुस्तअसिम बिल्लाह को जानवर की खाल में लपेट कर घोडे दौड़ा कर कुचल दिया गया था|
"है अयां फितना ए तातार के अफसाने से ! पासबां मिल गए काबे को सनम खाने से" !!
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कहते हैं बाद में यही तातारी कौम मुसलमान हो गई और तुर्क नस्ल के नाम से मशहूर हुई| आगे का इतिहास बहुत लंबा है जो इतिहास के विद्यार्थियों के लिए है| अभी तो इतना ही|
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सभी को साभार धन्यवाद और नमन| ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१६ अप्रेल २०१८

Mehmed VI, the last sultan of the Ottoman Empire and caliph of Islam, leaves from a backdoor of the Dolmabahçe Palace in Istanbul, November 1922.
https://images.google.co.in/imgres…

जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार की नीति कुछ समझ में नहीं आ रही है ....


जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार की नीति कुछ समझ में नहीं आ रही है|
ऐसे ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में अध्यादेश क्या आत्मघाती नहीं होगा? फैसले में क्या गलत है?
धारा ३७० व ३५-ऐ की समाप्ति, समान नागरिक संहिता, राम मंदिर का निर्माण और रोहिंगिया बापसी का काम, क्या अगले जन्म में होगा?
कुछ समझ में नहीं आ रहा है|
क्या तिल तिल कर मरने की बजाय लोग एक साथ कोंग्रेस को वोट देकर आत्म-ह्त्या करना पसंद नहीं करेंगे?
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कहीं श्री नरेन्द्र मोदी, ..... राहुल गांधी और कांग्रेस की आक्रामकता से डर तो नहीं गए हैं? कहीं उनका विश्वास अपने स्वयं के लोगों से ही डगमगा तो नहीं गया है? क्या केंद्र में भाजपा की सरकार २०१९ तक टिक पायेगी? बीच में ही क्या पता अविश्वास प्रस्ताव और गुप्त मतदान द्वारा गिरा दी जाए| हो सकता है भाजपा के सांसदों को कोंग्रेस ने खरीद ही लिया हो| आज के जमाने में किसी का भरोसा नहीं है| क्या पता मोदी जी को इस बात का पता चल गया हो और वे अन्दर ही अन्दर से डर गए हों|
सोनिया गाँधी अपना पूरा धन २०१९ के चुनावों में राहुल को प्रधान मंत्री बनाने में लगा देगी| राहुल गाँधी का चीनी राजदूत से मिलना क्या सन्देश देता है? क्या पता कोंग्रेस ने अपना धन चीन में ही रखवा दिया हो|
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भारत की समाचार मीडिया राहुल गाँधी के पक्ष में है| सारे वरिष्ठ सरकारी अधिकारी कोंग्रेस के समय से ही नियुक्त और कोंग्रेस के वफादार हैं| भाजपा के स्वयं के ही बहुत सारे भ्रष्ट लोग मोदी से नाराज हैं| अकेला मोदी क्या कर लेगा ? मायावती का और कोंग्रेस का वोट बैंक कभी भी नरेन्द्र मोदी को वोट नहीं देगा| मोदी जी उनका तुष्टिकरण कर के अपने परम्परागत वोट बैंक को नाराज कर के दूर खिसका रहे हैं| अतः भारत का राजनीतिक भविष्य मुझे तो अंधकारमय लग रहा है| भगवान करे ऐसा न हो|

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मोदी, लोकतंत्र, वोटबैंक, के संवैधानिक मकड़ी के जाले में फँस चुके हैं। इतिहास में लोग पढ़ेंगे rise and fall of Narendra Modi, who became hero to zero., Just within five years. ज्यादा संभावना तो यही दिखाई दे रही है। उनके सलाहकारों का समूह उन्हें घेर कर SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के भँवर में ले जा रहे हैं।
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जनता ने सुशासन और भ्रष्टाचार मिटाने के वायदे पर स्पष्ट बहुमत दिया था। राजस्थान में जिस तरह से भ्रष्टाचार को मोदी सरकार ने अभयदान दिया है इससे राजस्थान की जनता का भाजपा से मोह भंग हो चुका है।
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(General Knowledge) क्या भाजपा के किसी भी नेता को पता है कि .....
(१) डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे जिन्होनें कश्मीर में भारत के विलय के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे? क्या देश में कहीं उनके नाम पर कोई स्मारक या संस्था है? क्या उनकी ह्त्या हुई थी? देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का उनके साथ क्या सम्बन्ध था?
(२) वर्त्तमान भाजपा किस पूर्व राजनीतिक दल का एक रूपान्तरण मात्र है? क्या उस दल का नाम भारतीय जनसंघ था? उसकी स्थापना किसने की थी?
(३) पं.दीनदयाल उपाध्याय कौन थे ?
उपरोक्त प्रश्न पूछने के लिए इस लिए बाध्य हुआ हूँ क्योंकि मैनें कुछ भाजपा नेताओं को आपस में एक दूसरे से पूछते हुए सुना है कि यह दीनदयाल उपाध्याय कौन हैं? आजकल भाजपा के सभी नेता बाबा साहब अम्बेडकर के नाम की माला फेरते हैं, पहले बापू के नाम की फेरते थे| भाजपा के नए नेताओं को तो पता ही नहीं है कि डॉ.श्यामा प्रसाद मुख़र्जी कौन थे|
क्या जम्मू के हिन्दू भारतीय नहीं हैं? उनके साथ अब अत्याचार क्यों हो रहे हैं?

सिद्धि स्वयं के प्रयासों से नहीं, भगवत कृपा से मिलती है .....

मुझे वर्षों पहिले साक्षात शिवस्वरूप एक सिद्ध संत ने कहा था कि एक एकांत कमरे की व्यवस्था कर लो और सब तरह के प्रपंचों से दूर रहते हुए निरंतर 'शिव" का मानसिक जप और ध्यान करते रहो| उन्होंने यह भी कहा कि इधर-उधर की भागदौड़ करने की अब कोई आवश्यकता नहीं है| शिव का ध्यान करते करते तुम्हारी चेतना शिवमय हो जाएगी, और तुम शीघ्र ही जीवन-मुक्त हो जाओगे|
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पर मैं अपनी मानसिक कमजोरियों के कारण दुनियाँ के प्रपंचों से तो कभी दूर नहीं हो पाया| पर भगवान भी कृपा करते हैं जिस से अब तो दुनियाँ ही अपने प्रपंचों से दूर होने को मुझे बाध्य कर रही है| भगवान ने भी परम कृपा कर के अंतर्दृष्टि के दोषों को कम किया है, जिस से चेतना में और अधिक स्पष्टता आई है|
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एक बात तो निश्चित तौर से कह सकता हूँ कि किसी भी साधना में सिद्धि स्वयं के प्रयासों से नहीं, भगवत कृपा से ही मिलती है| प्रयास तो करते रहना चाहिए, पर यह परमात्मा की मर्जी है कि वे कब सफलता दें| इसी लिए बिना किसी शर्त के साधना करने का आदेश दिया जाता है| यह एक परीक्षा है जिस में उतीर्ण होना ही होता है| जहाँ थोड़ी सी भी अपेक्षा की वहीं अनुतीर्ण हो गए|
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और भी कई बाते हैं जिनका सार्वजनिक उल्लेख वर्जित है| परमात्मा के सर्वश्रेष्ठ साकार रूप आप सब को शुभ कामनाएँ और नमन ! ॐ तत्सत ! ॐ ॐ ॐ !!
१३ अप्रेल २०१८

जम्मू-कश्मीर की समस्या एक धार्मिक समस्या है, राजनीतिक नहीं .....

जम्मू-कश्मीर की समस्या एक धार्मिक समस्या है, राजनीतिक नहीं .....
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भारत की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में कश्मीर की समस्या का कोई हल नहीं है| इस के लिए अति सफल कूटनीति और दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता है| यह कोई राजनीतिक समस्या नहीं है, बल्कि धार्मिक समस्या है| जम्मू-कश्मीर में पुलिस भी थी, सेना भी थी, न्यायालय भी था, सरकार भी थी, दिल्ली में केंद्र सरकार भी थी, माननीय सुप्रीम कोर्ट भी थी, और समाचार मीडिया भी थी, फिर भी रातों-रात लाखों हिन्दुओं को मार-काट कर वहाँ से भगा दिया गया, उनकी महिलाओं की अत्यधिक दुर्गति की गयी और अनगिनत हत्याएँ हुईं| किसी भी वैधानिक संस्था ने उनकी कोई सहायता नहीं की| उपरोक्त सब वैधानिक संस्थाएँ पूर्ण रूप से विफल रहीं| आज तक कश्मीरी हिन्दू विस्थापितों को उनकी भूमि बापस नहीं दिलाई गयी| किसी भी जिम्मेदार अपराधी को आज तक कोई सजा नहीं मिली है| अब लगता है जम्मू को भी हिन्दू-विहीन करने का षडयंत्र हो रहा है| केंद्र सरकार की निष्क्रियता गलत सन्देश दे रही है| यह अक्षम्य अपराध है|
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पूरा कश्मीर पकिस्तान को दे दो तो भी वह संतुष्ट नहीं होगा| उसका असली लक्ष्य तो पूरे भारत को पकिस्तान बनाना है| कश्मीर को एक स्वतंत्र देश बना दो यह भी कोई स्थायी समाधान नहीं है| पाकिस्तान सैन्य आक्रमण कर के चीन की सहायता से उस पर अधिकार कर लेगा| कश्मीर घाटी में सुन्नी मुसलमान अधिक हैं, वे पाकिस्तान में मिलना चाहते हैं| बाकी कश्मीर में शिया मुसलमान अधिक हैं जो भारत के साथ रहना चाहते हैं| जम्मू में हिदू बहुमत है, लद्दाख में बौद्ध बहुमत है जो भारत के साथ रहना चाहते हैं| असली समस्या कश्मीर घाटी में है| पाक अधिकृत कश्मीर में विशेषकर बाल्टीस्तान और गिलगिट में शिया बहुमत है जो पकिस्तान का साथ नहीं चाहते| पर फौजी ताकत से दबाकर उन्हें रखा गया है| पूर्व तानाशाह जिया-उल-हक ने पाक अधिकृत कश्मीर का जनसांख्यिकी परिवर्तन करने के लिए लाखों सुन्नियों को कश्मीर में बसाया ताकि शियाओं को दबा कर रखा जा सके| जब तक पकिस्तान का अस्तित्व है तब तक कश्मीर में कोई शांति नहीं हो सकती|
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कश्मीर की समस्या का एक मात्र हल है ....... अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक और सैन्य सहयोग से पकिस्तान को चार टुकड़ों में बाँट दिया जाए| बलूचिस्तान, सिंध और कबायली इलाकों सहित पख्तूनख्वा को .... पंजाब से पृथक कर दिया जाए| पूरा पकिस्तान सिर्फ पाकिस्तानी पंजाब तक ही सीमित रह जाए| इसके लिए हमें अमेरिका, रूस, इजराइल, फ़्रांस और ईरान जैसे देशों से पूर्ण सक्रीय सहयोग भी लेना पड़ेगा| चीन को भी एक बार तो मनाना ही होगा| पकिस्तान का अस्तित्व विश्व शांति के लिए खतरा है| पकिस्तान को नष्ट किये बिना विश्व में सुख-शांति नहीं हो सकती| भारत के हित में पाकिस्तान को विखंडित करना अति आवश्यक है|
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उस से पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य को तीन भागों में विभाजित किया जाय| जम्मू एक अलग राज्य हो, लेह-लद्दाख मिलाकर एक अलग राज्य हो और कश्मीर एक अलग राज्य हो| भविष्य में पकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी वर्तमान कश्मीर का ही भाग हो| पकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर अधिकार लेने के लिए अमेरिका का सहयोग आवश्यक होगा क्योंकि गिलगिट में एक बहुत बड़ा अमेरिकी सैनिक अड्डा है|
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ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ ||
१७ अप्रेल २०१७
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Monday, 16 April 2018

परमप्रेम और समर्पण ....

परमप्रेम और समर्पण ....
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हम जीवन की संपूर्णता व विराटता को त्याग कर लघुता को अपनाते हैं तो निश्चित रूप से विफल होते हैं| दूसरों का जीवन हम क्यों जीते हैं? दूसरों के शब्दों के सहारे हम क्यों जीते हैं? पुस्तकों और दूसरों के शब्दों में वह कभी नहीं मिलता जो हम ढूँढ रहे हैं, क्योंकि अपने ह्रदय की पुस्तक में वह सब लिखा है|
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कुछ बनने की कामना से हम कुछ नहीं बन सकेंगे, क्योंकि जो हम बनना चाहते हैं, वह तो पहले से ही हैं|
कुछ पाने की खोज में भटकते रहेंगे, कुछ नहीं मिलेगा क्योंकि ----- जो हम पाना चाहते हैं वह तो हम स्वयं ही हैं|
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जीव और शिव, आत्मा और परमात्मा, भक्त और भगवान ------ इन सब के बीच की कड़ी है ..... परमप्रेम और समर्पण| जब हम स्वयं ही वह परमप्रेम बन जाते हैं तो फिर बीच में कोई भेद नहीं रहता| यही है रहस्यों का रहस्य | उठो इस नींद से, और पाओ कि हम स्वयं ही अपने परम प्रिय हैं| हम खंड नहीं, अखंड हैं| हम यह देह नहीं बल्कि सम्पूर्णता हैं| हम स्वयं ही मूर्तिमंत परम प्रेम हैं|
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जिसने हमें अब तक भ्रम में डाल रखा था वे हैं हमारे ही चित्त की तरल चंचल वृत्तियाँ जिन्हें हम कभी शांत नहीं कर सके| अतः अब बापस हम उन्हें परमात्मा को समर्पित कर रहे हैं| ये चित्त की चंचलता पता नहीं कब से भटका रही है| शांत होने का नाम ही नहीं ले रही है| इन्हें बापस स्वीकार कीजिये क्योंकि इन्हें शांत करना अब हमारे वश की बात नहीं है| देना ही है तो अपना स्थायी परम प्रेम दीजिये, इसके अलावा और कुछ भी नहीं चाहिए|
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अज्ञान के अनंत अन्धकार से घिरे इस दुर्गम अशांत महासागर के पथ पर सिर्फ एक ही मार्गदर्शक ध्रुव तारा है, और वह है आपका प्रेम| वह ही हमारी एकमात्र संपदा है जो कभी कम ना हो|
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न तो हमें श्रुतियों और स्मृतियों आदि शास्त्रों का कोई ज्ञान है और न ही उन्हें समझने की क्षमता| इस देह रूपी वाहन में भी अब कोई क्षमता नहीं बची है| हमारी इन सब लाखों कमियों, दोषों, और अक्षमताओं को बापस आपको अर्पित कर रहे हैं| सारे गुण-दोष, क्षमताएँ-अक्षमताएँ, पाप-पुण्य, अच्छे-बुरे संचित व प्रारब्ध सब कर्मों के फल और सम्पूर्ण पृथक अस्तित्व, सब कुछ बापस आपको अर्पित है, इसे स्वीकार करें| आप के अतिरिक्त अब हमें और कुछ भी नहीं चाहिए|
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आपकी अनंतता हमारी अनंतता है, आपका प्रेम हमारा प्रेम है, और आपका अस्तित्व हमारा अस्तित्व है| आप और हम एक हैं| आपका यह परम प्रेम सबको बाँटना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है|

ॐ नमःशिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ ॐ ॐ ||
कृपाशंकर
१७ अप्रेल २०१६

"धर्म" और "अधर्म" में भेद क्या है .....

(१७ अप्रेल २०१४)
"धर्म" और "अधर्म" में भेद क्या है .....
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'धर्म' और 'अधर्म' इन पर जितनी चर्चाएँ हुई हैं, वाद विवाद, युद्ध और अति भयावह क्रूरतम अत्याचार और हिंसाएँ हुई हैं, उतनी अन्य किसी विषय पर नहीं| धर्म के नाम पर, अपनी मान्यताएं थोपने के लिए, अनेक राष्ट्रों और सभ्यताओं को नष्ट कर दिया गया, धर्म के नाम पर लाखों करोड़ मनुष्यों की हत्याएँ कर दी गईं जो आज भी अनवरत चल रही हैं| मनुष्य के अहंकार ने धर्म सम्बन्धी अपनी अपनी मान्यताएँ अन्यों पर थोपने के लिए सदा हिंसा का सहारा लिया है|

पर धर्म के तत्व को समझने का प्रयास सिर्फ भारतवर्ष में हुआ है| भारत का प्राण -- धर्म है| भारत सदा धर्म-सापेक्ष रहा है| धर्म की शरण में जाने का आह्वान सिर्फ भारतवर्ष से ही हुआ है| धर्म की रक्षा के लिए स्वयं भगवान ने यहाँ समय समय पर अवतार लिए है| धर्म की रक्षा हेतु ही यहाँ के सम्राटों ने राज्य किया है| धर्म की रक्षा के लिए ही असंख्य स्त्री-पुरुषों ने हँसते हँसते अपने प्राण दिए हैं|

भारत में धर्म की सर्वमान्य परिभाषा -- "परहित" को ही माना गया है| कणाद ऋषि के ये वचन भी सबने स्वीकार किये हैं कि ---- जिससे अभ्युदय और निःश्रेयस की सिद्धि हो वह ही धर्म है| पर यह भी विचार का विषय है कि अभ्युदय और निःश्रेयस की सिद्धि कैसे हो सकती है|

महाभारत में एक यक्षप्रश्न के उत्तर में धर्मराज युधिष्ठिर कहते हैं ---"धर्मस्य तत्वं निहितं गुहायां" यानि धर्म का तत्व तो निविड़ अगम गुहाओं में छिपा है जिसे समझना अति दुस्तर कार्य है|
धर्म और अधर्म पर बहुत चर्चाएँ होती हैं| पर जहाँ तक मेरी अल्प और सीमित बुद्धि की समझ है ---- प्रत्येक व्यक्ति के ह्रदय की गुफा में धर्म छिपा है| यदि कोई अपने ह्रदय को पूछे तो हृदय सदा सही उत्तर देगा| मन और बुद्धि गणना कर के स्वहित यानि अपना स्वार्थ देखेंगे पर ह्रदय स्वहित नहीं देखेगा और सदा सही धर्मनिष्ठ उत्तर देगा|

ह्रदय में साक्षात भगवान ऋषिकेष जो बैठे हैं वे ही धर्म और अधर्म का निर्णय लेंगे| हमारी क्या औकात है ????? पर कोई उन्हें पूछें तो सही|

आपकी देहरूपी रथ का रथी -- आत्मा है, और सारथी -- बुद्धि है| बुद्धि -- कुबुद्धि और अशक्त भी हो सकता है| उसे आप पहिचान नहीं सकते क्योंकि उसकी पीठ आपकी ओर है| धर्माचरण का सर्वश्रेष्ठ कार्य यही होगा कि आप अपनी बुद्धि को सेवामुक्त कर के भगवान पार्थसारथी को अपने रथ की बागडोर सौंप दें| जहाँ भगवान पार्थसारथी आपके सारथी होंगे वहाँ जो भी होगा वह -- 'धर्म' ही होगा, 'अधर्म' कदापि नहीं|

अंततः मेरा ह्रदय तो यही कहता ही कि जो भी कार्य अपने अहँकार को परमात्मा को समर्पित कर, समष्टि के कल्याण के लिए किया जाए वही धर्म है| व्यष्टि का अस्तित्व भी समष्टि के लिए ही हो| यही धर्म है|

आप सब में हृदयस्थ भगवान नारायण को प्रणाम| धन्यवाद|
कृपा शंकर
१७ अप्रेल २०१४

Sunday, 15 April 2018

इस संसार में दम घुटता है, तो क्या करें ?....

इस संसार में दम घुटता है, तो क्या करें ?
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संसार की बुराइयों को तो मिटा नहीं सकते | यह समुद्र के पानी को सुखाने का सा प्रयास है | हमें इन बुराइयों और भलाइयों से ऊपर उठना होगा, पर यह तो वेदान्त का विषय है जो एक सामान्य व्यक्ति को समझ में नहीं आ सकता | हम जैसे सामान्य व्यक्तियों का दृष्टिकोण तो उस साधू जैसा होना चाहिए जिसके बारे में संत कबीरदास जी ने कहा है .....
"साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय| सार-सार को गहि रहै थोथा देई उड़ाय"||
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हम इस संसार में उस चींटी की तरह रहें जो बालू रेत में मिली चीनी को तो खा लेगी पर बालू रेत को छोड़ देगी | अन्य कोई दूसरा रास्ता हमारे लिए नहीं है | हम लोग जब गन्ना चूसते हैं तब रस को तो चूस लेते हैं पर छिलका फेंक देते हैं | यह संसार बुराई और भलाई दोनों का मिश्रण है | संसार में यही दृष्टिकोण अपना होना चाहिए | निज विवेक से हम अच्छाई को तो ग्रहण कर लें और बुराई को छोड़ दें |
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एक समय था जब जीवन में मन अति अशांत और उद्वेलित रहता था| अशांत, निराश और उद्वेलित मन को शांत करने के लिए मैनें अनेक प्रयास किये थे, पर कभी सफल नहीं हुआ| फिर एक नया तरीका अपनाया| यह सोचना ही छोड़ दिया कि कहाँ क्यों व क्या हो रहा है और अन्य लोग क्या कर रहे हैं| सारा ध्यान इसी पर लगाया कि इसी क्षण अपना सर्वश्रेष्ठ मैं कैसे और क्या कर सकता हूँ| फिर पाया कि मन में कोई निराशा, अशांतता और बेचैनी नहीं रही है| वर्त्तमान में जीना और अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास जीवन में संतुष्टि प्रदान करता है| 
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हे गुरु महाराज, आपकी जय हो | आपकी कृपा सदा बनी रहे | जब से यह सिर आपके समक्ष झुका है, तब से एक बार भी नहीं उठा है, लगातार झुका हुआ ही है | मैं आपकी शरणागत हूँ | ॐ तत्सत ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१५ अप्रेल २०१८