Saturday, 10 January 2026

ब्राह्मण की शक्ति का स्त्रोत है -- प्राणायाम, गायत्री मंत्र, और सविता देव की भर्गः ज्योति का विधिवत् ध्यान ---

 ब्राह्मण की शक्ति का स्त्रोत है -- प्राणायाम, गायत्री मंत्र, और सविता देव की भर्गः ज्योति का विधिवत् ध्यान। इनके बिना ब्राह्मण शक्तिहीन है।

.
जिन का उपनयन संस्कार हो चुका है उन को प्रातः कम से कम दस बार गायत्री मंत्र का मानसिक जप करना चाहिए। जो दिन में एक बार भी गायत्री मंत्र का जप नहीं करता वह ब्राह्मणत्व से च्युत हो जाता है, और उसे प्रायश्चित करना पड़ता है।
.
गायत्री मंत्र के जो सविता देव हैं, वे ही वेदान्त के ब्रह्म हैं, श्रीमद्भगवद्गीता के कूटस्थ पुरुषोत्तम, व परमशिव और नारायण भी वे ही हैं। यह अनुभूति का विषय है जो बुद्धि से परे है। उन्हीं की हम उपासना और ध्यान करें।
ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
७ जनवरी २०२६ . पुनश्च: --- हम निरंतर ब्राह्मी-स्थिति / कूटस्थ-चैतन्य / कैवल्य-पद में रहें। यही ब्रह्म-तेज है, और यही ब्रह्म-शक्ति है जो साधना द्वारा स्वयं जागृत हो जाती है।

No comments:

Post a Comment