इस संसार में जवानी भी देखी, बुढ़ापा भी देखा, और भगवान से दिल लगाकर भी देख लिया। अब और देखने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। इसलिये सभी को राम राम !! वंदे मातरम् !! भारत माता की जय॥
Tuesday, 30 December 2025
इस संसार में जवानी भी देखी, बुढ़ापा भी देखा, और भगवान से दिल लगाकर भी देख लिया। अब और देखने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।
Monday, 29 December 2025
इस जन्म में मैं स्वाभिमान और गर्व सहित सनातनी हिन्दू हूँ ---
इस जन्म में मैं स्वाभिमान और गर्व सहित सनातनी हिन्दू हूँ। हिन्दू का अर्थ है जो हिंसा से दूर है। मनुष्य में हिंसा का जन्म लोभ व अहंकार से होता है। लोभ व अहंकार ही राग-द्वेष है। राग-द्वेष से मुक्ति ही वीतरागता है। वीतराग व्यक्ति ही महत् तत्व से जुड़कर महात्मा बनता है। वीतराग व्यक्ति ही स्थितप्रज्ञता को प्राप्त होता है जो ईश्वर प्राप्ति की अवस्था है। स्थितप्रज्ञता ही कैवल्य/ब्राह्मी-स्थिति/कूटस्थ-चैतन्य आदि है। हम शाश्वत आत्मा हैं, इसलिए हमारा स्वधर्म परमात्मा से परमप्रेम और समर्पण है। इस पृथ्वी पर वह हर व्यक्ति हिन्दू है जिसे परमात्मा से प्रेम है, व जो परमात्मा को उपलब्ध होना चाहता है। हिन्दुत्व ही हमें आत्मा की शाश्वतता, पुनर्जन्म और कर्मफलों की शिक्षा देता है। घृणा व क्रोध से मुक्त होकर, ईश्वर की चेतना में रहते हुए हम अपने शत्रुओं का संहार करें। हमारे मन में शत्रुभाव का अभाव तो सदा रहे, लेकिन शत्रुबोध सदा बना रहे।
कांग्रेस के नेताओं को अपनी हार के लिए अपने अलावा सब जिम्मेदार लगते हैं ---
कांग्रेस के नेताओं को अपनी हार के लिए अपने अलावा सब जिम्मेदार लगते हैं
"राम" नाम पर सबका जन्मसिद्ध अधिकार है ---
"राम" नाम पर सबका जन्मसिद्ध अधिकार है। इसने पता नहीं अब तक कितने असंख्य लोगों को तारा है और कितनों को तारेगा। यह हमें परमात्मा का सबसे बड़ा उपहार है। ध्यानमुद्रा शांभवी में तो इसका विधिवत जप करें ही, लेकिन चलते-फिरते, उठते-बैठते, शौच-अशौच और देश-काल आदि के सब बंधनों से स्वयं को मुक्त कर इसका हर समय मानसिक जप कर सकते हैं।
रहस्यों का रहस्य ---
हमारा कार्य केवल परमात्मा के प्रकाश का विस्तार करना है ---
हमारा कार्य केवल परमात्मा के प्रकाश का विस्तार करना है, अन्य सब उनकी यानि परमात्मा की समस्या है।
यह वृद्धावस्था बड़ी खराब चीज है --
यह वृद्धावस्था बड़ी खराब चीज है -- (भगवान के भजन करने के इस मौसम में यह शरीर महाराज पूरा सहयोग नहीं करता। बड़ा धोखेबाज़ मित्र है)
आजकल मुझे निमित्त बनाकर भगवान श्रीकृष्ण अपनी साधना स्वयं कर रहे हैं ---
आजकल मुझे निमित्त बनाकर भगवान श्रीकृष्ण अपनी साधना स्वयं कर रहे हैं। मैं जहां भी हूँ, आप सब के हृदय में हूँ। आप सबसे मिले प्रेम के कारण मैं अभिभूत हूँ। आप सब कृतकृत्य हों, और आपका जीवन कृतार्थ हो।
सद्गुरु कौन हो सकता है? गुरु की आवश्यकता क्यों है? --- (Amended & Re-Posted)
सद्गुरु कौन हो सकता है? गुरु की आवश्यकता क्यों है? --- (Amended & Re-Posted)
जो वेदान्त के ब्रह्म हैं, वे ही साकार रूप में भगवान श्रीकृष्ण हैं। यह अनुभूतिजन्य सत्य है ---
निज जीवन में बहुत अधिक भटकाव के पश्चात मैं अब अपने विचारों पर दृढ़ हूँ। जो वेदान्त के ब्रह्म हैं, वे ही साकार रूप में भगवान श्रीकृष्ण हैं। यह अनुभूतिजन्य सत्य है। किसी भी तरह का कोई संशय नहीं है। द्वैत-अद्वैत / साकार-निराकार ये सब मन की अवस्थाएँ हैं। किसी भी रूप में भगवान अपनी साधना करें, यह उनकी इच्छा है। भगवान अपनी ज्योतिर्मय अनंतता व उससे भी परे की अनुभूतियाँ करा रहे हैं, यह उनकी कृपा है। उनकी कृपा से ही ये साँसे चल रही हैं, और उन्हीं की कृपा से यह शरीर जीवित है। अपनी साधना भी वे स्वयं ही कर रहे हैं।
३१ दिसंबर की रात्रि "निशाचर रात्रि" होती है। निशाचर लोग अभिसारिकाओं की खोज में रहते हैं, और अभिसारिकायें निशाचरों की खोज में ---
३१ दिसंबर की रात्रि "निशाचर रात्रि" होती है। निशाचर लोग अभिसारिकाओं की खोज में रहते हैं, और अभिसारिकायें निशाचरों की खोज में। वहाँ धोखा ही धोखा है। मद्यपान, नाचगाना और हो-हुल्लड़ के सिवाय और कुछ भी नहीं होता। जिस रात भगवान का भजन नहीं होता वह राक्षस-रात्रि है, और जिस रात भगवान का भजन हो जाए वह देव-रात्रि है। मेरी बात की लोग हंसी उड़ायेंगे, लेकिन मुझ पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं वही कहूँगा जिससे आपका कल्याण हो।
परमात्मा ही मेरा वास्तविक स्वरूप है ---
परमात्मा ही मेरा वास्तविक स्वरूप है ---
मेरे द्वारा सबसे बड़ी सेवा क्या हो सकती है ??
मेरे द्वारा सबसे बड़ी सेवा क्या हो सकती है ??
Friday, 26 December 2025
चित्त वृत्ति निरोध ------
जब ह्रदय शांत और और आज्ञा चक्र जागृत होने लगता है तभी चित्त की वृत्तियों का निरोध होना आरम्भ होने लगता है|
Thursday, 25 December 2025
मन में आ रहे फालतू और भटकाने वाले विचारों से ध्यान हटा कर भगवान में मन कैसे लगाएँ?
(प्रश्न) : मन में आ रहे फालतू और भटकाने वाले विचारों से ध्यान हटा कर भगवान में मन कैसे लगाएँ?
Wednesday, 24 December 2025
भारत के लिए ये ५ जलडमरूमध्य स्वतंत्र और सुचारू अंतर्राष्ट्रीय-नौपरिवहन के लिए बहुत आवश्यक हैं-- मलक्का, बाब-अल-मंडेब, होरमुज, बास्फोरस और जिब्राल्टर। स्वेज़ और पनामा नहरों का चालू रहना भी बहुत अधिक आवश्यक है।
भारत के लिए ये ५ जलडमरूमध्य स्वतंत्र और सुचारू अंतर्राष्ट्रीय-नौपरिवहन के लिए बहुत आवश्यक हैं-- मलक्का, बाब-अल-मंडेब, होरमुज, बास्फोरस और जिब्राल्टर। स्वेज़ और पनामा नहरों का चालू रहना भी बहुत अधिक आवश्यक है।
भविष्य में एक दिन ईसा मसीह के सारे अनुयायी -- सत्य-सनातन-धर्म को अपना लेंगे।
आज रात्रि को मैं पूर्ण प्रयास करूंगा कि आज की पूरी रात्री परमात्मा के ध्यान में ही व्यतीत हो। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में एक दिन ईसा मसीह के सारे अनुयायी -- सत्य-सनातन-धर्म को अपना लेंगे। यह प्रक्रिया आरंभ भी हो गई है। भारत की सबसे अधिक हानि भी उन्हीं लोगों ने की है।
Monday, 22 December 2025
जब तक मैं परमात्मा से दूर था ---
जब तक मैं परमात्मा से दूर था, यह जीवन अपने केंद्र-बिन्दु से बहुत दूर एक मरीचिका (Mirage) यानि दृष्टिभ्रम या एक झूठा प्रतिबिंब (false image) मात्र ही था। एक झूठी आशा के पीछे भाग रहा था। सत्य का बोध तो अभी हो रहा है। भगवान श्रीकृष्ण का गीता में यह आश्वासन एक नयी दृष्टि और बोध दे रहा है --
उस आभामंडल को ही अपना काम करने दें ---
निरंतर परमात्मा के चिंतन से हमारे चारों और एक आध्यात्मिक आभामंडल का निर्माण हो जाता है। वह आभामंडल ही चुम्बकत्व की तरह उन सब चीजों को आकर्षित करेगा जो जीवन में सर्वश्रेष्ठ है। उस आभामंडल को ही अपना काम करने दें।
प्रकाश का अभाव ही अंधकार है ---
Sunday, 21 December 2025
उत्तरायण की शुभ कामनाएँ ---
उत्तरायण की शुभ कामनाएँ ---
Tuesday, 16 December 2025
परमात्मा को निश्चित रूप से हम कैसे उपलब्ध हों?
(प्रश्न) : परमात्मा को निश्चित रूप से हम कैसे उपलब्ध हों?
हे प्रभु, स्वयं को मुझ में व्यक्त करो, आप और मैं एक हैं ---
हे प्रभु, स्वयं को मुझ में व्यक्त करो, आप और मैं एक हैं ---