ब्रह्मलीन स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर उनको नमन! उनके प्रभाव से ओडिशा के वनवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा किये जा रहे धर्मान्तरण के कार्य लगभग बंद होने लगे थे| ईसाई बन चुके वनवासियों की सनातन हिन्दू धर्म में बापसी आरम्भ हो गयी थी| इस से बौखला कर कुछ धर्मद्रोहियों ने आज से दस वर्ष पूर्व २३ अगस्त २००८ को उनकी निर्मम ह्त्या कर दी| पहले उन्हें गोली मारी गयी फिर कुल्हाड़े से उनके शरीर को कई टुकड़ों में काट डाला गया| उस क्षेत्र के लोग कहते हैं कि उनकी ह्त्या मिशनरियों ने नक्सलवादियों के साथ मिल कर करवाई|
Saturday, 23 August 2025
ब्रह्मलीन स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर उनको नमन ---
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है ---
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है। मुझे मेरी सब कमियों का पता है, लेकिन उनके समक्ष मैं असहाय हूँ। भगवान से मैंने प्रार्थना की तो भगवान ने कहा कि अपने सब शत्रु मुझे सौंप दो, लेकिन उनसे पहले स्वयं को (यानि अपने को) मुझे (यानि भगवान को) अर्पित करना होगा। स्वयं को अर्पित करने में बाधक है मेरा लोभ और अहंकार, यानि कुछ होने का और खोने का भाव।
बचपन में हम लोग गणेश-चतुर्थी कैसे मनाते थे। (चथड़ा चौथ भादुड़ों, दे दे माई लाडुडो)
गणेशचतुर्थी पर मैं एक बहुत पुराना बच्चों द्वारा गाये जाने वाला एक राजस्थानी गीत प्रस्तुत करना चाहता था जिसे ५०-६० वर्षों पूर्व गणेश चतुर्थी पर बच्चे लोग गाया करते थे, और किसी भी सहपाठी या परिचित के घर लड्डू खाने चले जाते थे| जिस के भी घर जाते वह बच्चों को लड्डू, गुड़-धाणी तो बड़े प्रेम से खिलाता ही, साथ में कुछ पैसे भी देता| मुझे वह गीत ठीक से याद नहीं आ रहा था और नेट पर भी कहीं मिल नहीं रहा था| आज एक मित्र ने भेजा है, जिसे प्रस्तुत कर रहा हूँ ...
झुंझनूं नगर के टीबड़ेवालों के मोहल्ले में स्थित सेठ कनीराम-नृसिंहदास टीबड़ेवाल की प्रसिद्ध हवेली का प्रवेश-द्वार
यह राजस्थान के झुंझनूं नगर के टीबड़ेवालों के मोहल्ले में स्थित सेठ कनीराम-नृसिंहदास टीबड़ेवाल की प्रसिद्ध हवेली का प्रवेश-द्वार है। यह हवेली हमारी पारिवारिक हवेली से बहुत पास लगभग ४० फीट दूर ही है। इस हवेली से मेरे बचपन की बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं। शाम के समय नित्य मैं इस हवेली में खेलने जाया करता था। टीबड़ेवाल परिवार के सभी सदस्यों से मेरी घनिष्ठ आत्मीयता थी। इसमें रहने वाले परिवार अब तो कोलकाता व मुंबई में बस गए हैं, पर जब भी इनका कोई सदस्य आता है, तब मुझे अवश्य याद करता है। इसको संभालने कोलकाता से मुख्यतः मेरे बचपन के मित्र श्री किशन लाल जी टीबड़ेवाल ही आते हैं। टीबड़ेवाल परिवार की और भी बहुत सारी सम्पतियाँ हैं।
Thursday, 21 August 2025
हमें सत्यनिष्ठा से अपने स्वधर्म पर अडिग औए दृढ़ रहना चाहिये, क्योंकि स्वधर्म ही हमारी रक्षा कर सकेगा ---
हमें सत्यनिष्ठा से अपने स्वधर्म पर अडिग औए दृढ़ रहना चाहिये, क्योंकि स्वधर्म ही हमारी रक्षा कर सकेगा। भगवान पर श्रद्धा, विश्वास और आस्था रखें। नित्य व्यायाम करें और भगवान का खूब ध्यान हर समय करें। सकारात्मक सोच रखें। इस समय बहुत दीर्घकाल से सारी परिस्थितियाँ हमारे विरुद्ध है, लेकिन भगवान हमारी रक्षा निश्चित रूप से करेंगे। यह प्रतिकूल समय हमारे भी अनुकूल होगा।
Wednesday, 20 August 2025
हर हिन्दू परिवार प्रमुख का दायित्व ---
हर हिन्दू परिवार प्रमुख का दायित्व
पीढ़ियों में अंतर (Generation Gap) कैसे दूर हो? .....
पीढ़ियों में अंतर (Generation Gap) कैसे दूर हो? .....