Saturday, 23 August 2025

ब्रह्मलीन स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर उनको नमन ---

ब्रह्मलीन स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर उनको नमन! उनके प्रभाव से ओडिशा के वनवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा किये जा रहे धर्मान्तरण के कार्य लगभग बंद होने लगे थे| ईसाई बन चुके वनवासियों की सनातन हिन्दू धर्म में बापसी आरम्भ हो गयी थी| इस से बौखला कर कुछ धर्मद्रोहियों ने आज से दस वर्ष पूर्व २३ अगस्त २००८ को उनकी निर्मम ह्त्या कर दी| पहले उन्हें गोली मारी गयी फिर कुल्हाड़े से उनके शरीर को कई टुकड़ों में काट डाला गया| उस क्षेत्र के लोग कहते हैं कि उनकी ह्त्या मिशनरियों ने नक्सलवादियों के साथ मिल कर करवाई|

.
ऐसे संतों की भारत भूमि पर कृपा बनी रहे, धर्मोद्धार के लिए पवित्र भारतभूमि पर उनका अवतरण होता रहे| ॐ नमो नारायण ! ॐ ॐ ॐ !! कृपा शंकर
२३ अगस्त २०१९

मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है ---

मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है। मुझे मेरी सब कमियों का पता है, लेकिन उनके समक्ष मैं असहाय हूँ। भगवान से मैंने प्रार्थना की तो भगवान ने कहा कि अपने सब शत्रु मुझे सौंप दो, लेकिन उनसे पहले स्वयं को (यानि अपने को) मुझे (यानि भगवान को) अर्पित करना होगा। स्वयं को अर्पित करने में बाधक है मेरा लोभ और अहंकार, यानि कुछ होने का और खोने का भाव।

.
मेरी चेतना और प्रज्ञा दोनों ही परमात्मा को समर्पित ही नहीं, परमात्मा में स्थित है। इस जीवन का बहुत थोड़ा सा भाग बाकी बचा है, यानि इस दीपक में बहुत कम ईंधन बाकी बचा है। अब उसकी चिंता नहीं है। सारी चेतना, प्रज्ञा और सारा अस्तित्व, परमात्मा को समर्पित है। मेरी कोई मृत्यु नहीं है, मैं शाश्वत हूँ।
ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२३ अगस्त २०२५
.
पुनश्च: --- जैसे एक सुपात्र शिष्य की रक्षा गुरु-परंपरा करती है, वैसे ही भगवान को अपना अन्तःकरण (मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार) सौंप देने वाले भक्त की रक्षा का दायित्व भगवान स्वयं लेते हैं ...
"क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।
कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति॥९:३१॥"
अर्थात् हे कौन्तेय, वह शीघ्र ही धर्मात्मा बन जाता है और शाश्वत शान्ति को प्राप्त होता है| तुम निश्चयपूर्वक सत्य जानो कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता ||

बचपन में हम लोग गणेश-चतुर्थी कैसे मनाते थे। (चथड़ा चौथ भादुड़ों, दे दे माई लाडुडो)

 गणेशचतुर्थी पर मैं एक बहुत पुराना बच्चों द्वारा गाये जाने वाला एक राजस्थानी गीत प्रस्तुत करना चाहता था जिसे ५०-६० वर्षों पूर्व गणेश चतुर्थी पर बच्चे लोग गाया करते थे, और किसी भी सहपाठी या परिचित के घर लड्डू खाने चले जाते थे| जिस के भी घर जाते वह बच्चों को लड्डू, गुड़-धाणी तो बड़े प्रेम से खिलाता ही, साथ में कुछ पैसे भी देता| मुझे वह गीत ठीक से याद नहीं आ रहा था और नेट पर भी कहीं मिल नहीं रहा था| आज एक मित्र ने भेजा है, जिसे प्रस्तुत कर रहा हूँ ...

"चौक च्यानणी भादूड़ो,
दे दे माई लाडूड़ो |
आधौ लाडू भावै कौनी,
सा'पतौ पाँती आवै कौनी ||
सुण सुण ऐ गीगा की माँ,
थारौ गीगौ पढ़बा जाय |
पढ़बा की पढ़ाई दै,
छोराँ नै मिठाई दै ||
आळो ढूंढ दिवाळो ढूंढ,
बड़ी बहु की पैई ढूंढ |
ढूंढ ढूंढा कर बारै आ,
जोशी जी कै तिलक लगा ||
लाडूड़ा में पान सुपारी,
जोशी जी रै हुई दिवाळी |
जौशण जी ने तिलिया दै,
छोराँ नै गुड़-धाणी दै |
ऊपर ठंडो पाणी दै ||
एक विद्या खोटी,
दूजी पकड़ी . चोटी |
चोटी बोलै धम धम,
विद्या आवै झम झम ||"
.
२३ अगस्त २०२०

झुंझनूं नगर के टीबड़ेवालों के मोहल्ले में स्थित सेठ कनीराम-नृसिंहदास टीबड़ेवाल की प्रसिद्ध हवेली का प्रवेश-द्वार

 यह राजस्थान के झुंझनूं नगर के टीबड़ेवालों के मोहल्ले में स्थित सेठ कनीराम-नृसिंहदास टीबड़ेवाल की प्रसिद्ध हवेली का प्रवेश-द्वार है। यह हवेली हमारी पारिवारिक हवेली से बहुत पास लगभग ४० फीट दूर ही है। इस हवेली से मेरे बचपन की बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं। शाम के समय नित्य मैं इस हवेली में खेलने जाया करता था। टीबड़ेवाल परिवार के सभी सदस्यों से मेरी घनिष्ठ आत्मीयता थी। इसमें रहने वाले परिवार अब तो कोलकाता व मुंबई में बस गए हैं, पर जब भी इनका कोई सदस्य आता है, तब मुझे अवश्य याद करता है। इसको संभालने कोलकाता से मुख्यतः मेरे बचपन के मित्र श्री किशन लाल जी टीबड़ेवाल ही आते हैं। टीबड़ेवाल परिवार की और भी बहुत सारी सम्पतियाँ हैं।

.
भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी को टीबड़ेवाल परिवार की कुलदेवी खेमीसती माता का मेला भी झुंझुनू में भरता है। उसके अगले ही दिन यानि भाद्रपद अमावस्या को झुंझुनू में विश्व प्रसिद्ध श्रीराणीसती माता का मेला भरता है।
.
हमारे आसपास के मंडावा, फतेहपुर, रामगढ़ आदि कस्बों की सेठ साहूकारों की हवेलियाँ विश्व प्रसिद्ध हैं। झुंझुनू जिले के हर कसबे में बहुत शानदार हवेलियाँ हैं। कभी यहाँ बहुत अधिक समृद्धि रही थी। इस क्षेत्र शेखावाटी के मारवाड़ी सेठ साहूकारों ने पूरे भारत के हर कोने में अपने वाणिज्यिक कौशल की छाप छोडी है|
.
यह हवेली राजस्थान की प्रसिद्ध हवेलियों में से एक है। इस प्राचीन और भव्य हवेली का निर्माण झुंझनूं के एक प्रसिद्ध व्यापारी नृसिंहदास टीबड़ेवाल ने सन १८८३ में करवाया था। इसे देखने अब फ्रांस और जर्मनी के पर्यटक आते हैं। टीबड़ेवाल हवेली की दीवारों पर उकेरित बेलबूटों पर सोने की पॉलिश की गई थी। यहां दीवारों पर हाथ में दर्पण लिए सुंदर स्त्री, पगड़ी पहने एक पुरूष और दंपत्ति के साथ बच्चों की मौजूदगी के भित्तिचित्र हैं जो इलाके की समृद्धि दर्शाते हैं। यह हवेली कई चौकों से युक्त है। चौक के चारों ओर सुंदर कक्ष बने हुए हैं। बरामदों के स्तंभों के बीच धनुषाकार आकृति बनी है। चौक से छत पर जाने के लिए जीने बने हुए हैं। चौक आम तौर पर खुले और बड़े हैं। पूरा शेखावाटी इस तरह की भव्य व कलात्मक हवेलियों के लिये प्रसिद्ध है। आप भी यहाँ आयें और इनको निहारें। ये हवेलियाँ किसी अजूबे से कम नहीं हैं।

Thursday, 21 August 2025

हमें सत्यनिष्ठा से अपने स्वधर्म पर अडिग औए दृढ़ रहना चाहिये, क्योंकि स्वधर्म ही हमारी रक्षा कर सकेगा ---

हमें सत्यनिष्ठा से अपने स्वधर्म पर अडिग औए दृढ़ रहना चाहिये, क्योंकि स्वधर्म ही हमारी रक्षा कर सकेगा। भगवान पर श्रद्धा, विश्वास और आस्था रखें। नित्य व्यायाम करें और भगवान का खूब ध्यान हर समय करें। सकारात्मक सोच रखें। इस समय बहुत दीर्घकाल से सारी परिस्थितियाँ हमारे विरुद्ध है, लेकिन भगवान हमारी रक्षा निश्चित रूप से करेंगे। यह प्रतिकूल समय हमारे भी अनुकूल होगा।

नदी का विलय जब महासागर में हो जाता है, तब नदी का कोई नाम-रूप नहीं रहता, सिर्फ महासागर ही महासागर रहता है। वैसे ही हमारा भी विलय जब परमात्मा में हो जाता है, तब सिर्फ परमात्मा ही रहते हैं, हम नहीं।
हमारा समर्पण पूर्ण हो।

ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
२१ अगस्त २०२३

Wednesday, 20 August 2025

हर हिन्दू परिवार प्रमुख का दायित्व ---

 हर हिन्दू परिवार प्रमुख का दायित्व

>>>>>
हरेक हिन्दू सनातन धर्मावलम्बी परिवार प्रमुख का यह दायित्व है कि वह अपने परिवार में एक भयमुक्त प्रेममय वातावरण का निर्माण करे | अपने बालक बालिकाओं में इतना साहस विकसित करें कि वे अपनी कोई भी समस्या या कोई भी उलझन बिना किसी भय और झिझक के अपने माता/पिता व अन्य सम्बन्धियों को बता सकें | बच्चों की समस्याओं को ध्यान से सुनें, उन्हें डांटें नहीं, उनके प्रश्नों का उसी समय तुरंत उत्तर दें | इससे generation gap की समस्या नहीं होगी | बच्चे भी माँ-बाप व बड़े-बूढों का सम्मान करेंगे | हम अपने बालकों की उपेक्षा करते हैं, उन्हें डराते-धमकाते हैं, इसीलिए बच्चे भी बड़े होकर माँ-बाप का सम्मान नहीं करते |
.
परिवार के सभी सदस्य दिन में कम से कम एक बार साथ साथ बैठकर पूजा-पाठ/ ध्यान आदि करें, और कम से कम दिन में एक बार साथ साथ बैठकर प्रेम से भोजन करें | इस से परिवार में एकता बनी रहेगी |
.
बच्चों में परमात्मा के प्रति प्रेम विकसित करें, उन्हें प्रचूर मात्रा में सद बाल साहित्य उपलब्ध करवाएँ और उनकी संगती पर निगाह रखें | माँ-बाप स्वयं अपना सर्वश्रेष्ठ सदाचारी आचरण का आदर्श अपने बच्चों के समक्ष रखें |
.
इस से पीढ़ियों में अंतर (generation gap) की समस्या नहीं रहेगी और बच्चे बड़े होकर हमारे से दूर नहीं भागेंगे | लड़कियाँ भी घर-परिवार से भागकर लव ज़िहाद का शिकार नहीं होंगी |
ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||
२० अगस्त २०१७

पीढ़ियों में अंतर (Generation Gap) कैसे दूर हो? .....

 पीढ़ियों में अंतर (Generation Gap) कैसे दूर हो? .....

.
पीढ़ियों में अंतर (Generation Gap) पूरे विश्व में , विशेषकर भारत में एक बहुत बड़ी समस्या है जिसका कारण घर-परिवार के बड़े-बूढ़ों की नासमझी और अहंकार है| इसको दूर करने के लिए विशेष प्रशिक्षण और विवेक की आवश्यकता है| जिस परिवार में यह समस्या होती है उस परिवार के बच्चे बड़े होकर अपने माँ-बाप व बुजुर्गों का कोई सम्मान नहीं करते|
.
हर परिवार प्रमुख का यह दायित्व है कि वह अपने परिवार में एक भयमुक्त प्रेममय वातावरण का निर्माण करे| अपने बालक बालिकाओं में इतना साहस विकसित करें कि वे अपनी कोई भी समस्या या कोई भी उलझन बिना किसी भय और झिझक के अपने माता/पिता व अन्य सम्बन्धियों को बता सकें| बच्चों की समस्याओं को ध्यान से सुनें, उनके साथ मारपीट नहीं करें, उन्हें डांटें नहीं, और उनके प्रश्नों का तुरंत उसी समय उत्तर दें|
.
इससे generation gap की समस्या नहीं होगी| बच्चे भी माँ-बाप व बड़े-बूढों का सम्मान करेंगे| हम अपने बालकों की उपेक्षा करते हैं, उन्हें डराते-धमकाते हैं, इसीलिए बच्चे भी बड़े होकर माँ-बाप का सम्मान नहीं करते| परिवार के सभी सदस्य दिन में कम से कम एक बार साथ साथ बैठकर पूजा-पाठ/ ध्यान आदि करें, और कम से कम दिन में एक बार साथ साथ बैठकर प्रेम से भोजन करें| इस से परिवार में एकता बनी रहेगी |
.
बच्चों में परमात्मा के प्रति प्रेम विकसित करें, उन्हें प्रचूर मात्रा में सद बाल साहित्य उपलब्ध करवाएँ और उनकी संगती पर निगाह रखें| माँ-बाप स्वयं अपना सर्वश्रेष्ठ सदाचारी आचरण का आदर्श अपने बच्चों के समक्ष रखें| इस से पीढ़ियों में अंतर (generation gap) की समस्या नहीं रहेगी और बच्चे बड़े होकर हमारे से दूर नहीं भागेंगे | लड़कियाँ भी घर-परिवार से भागकर लव ज़िहाद का शिकार नहीं होंगी|
.
ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||
कृपा शंकर
२० अगस्त २०१७