भगवान हैं, इसी समय हैं, सर्वदा हैं, यहीं पर हैं, सर्वत्र हैं ---
Wednesday, 14 July 2021
भगवान हैं, इसी समय हैं, सर्वदा हैं, यहीं पर हैं, सर्वत्र हैं ---
अनन्य-अव्यभिचारिणी-भक्ति ---
अनन्य-अव्यभिचारिणी-भक्ति ....
शिव सहस्त्रनाम की महिमा ---
यदि संभव हो तो श्रावण के इस पवित्र माह में भी, और सदा नित्य, भगवान शिव की उपासना, महर्षि तंडी द्वारा अवतरित परम सिद्ध स्तवराज "शिवसहस्त्रनाम" से भी करें| किसी भी पवित्र शिवालय में श्रद्धा-भक्ति से इसका मानसिक रूप से पाठ कर भगवान शिव को बिल्व-पत्र और जल अर्पित कर आराधना करें|
Monday, 12 July 2021
कूटस्थ चैतन्य ---
कूटस्थ चैतन्य ---.
शिवनेत्र होकर (बिना तनाव के दोनों नेत्रों के गोलकों को नासामूल के समीपतम लाकर भ्रूमध्य में दृष्टी स्थिर कर, जीभ को ऊपर पीछे की ओर मोड़कर) प्रणव यानि ओंकार की ध्वनि को सुनते हुए उसी में लिपटी हुई सर्वव्यापी ज्योतिर्मय अंतर्रात्मा का चिंतन करते रहें| विद्युत् की चमक के समान देदीप्यमान ब्रह्मज्योति ध्यान में प्रकट होगी|
ब्रह्मज्योति का प्रत्यक्ष साक्षात्कार करने के बाद उसी की चेतना में रहें| यह ब्रह्मज्योति अविनाशी है, इसका कभी नाश नहीं होता| लघुत्तम जीव से लेकर ब्रह्मा तक का नाश हो सकता है पर इस ज्योतिर्मय ब्रह्म का कभी नाश नहीं होता| यही कूटस्थ है, और इसकी चेतना ही कूटस्थ चैतन्य है|
आज्ञाचक्र ही योगी का ह्रदय है, भौतिक देह वाला ह्रदय नहीं| आरम्भ में ज्योति के दर्शन आज्ञाचक्र से थोड़ा सा ऊपर होता है, वह स्थान कूटस्थ बिंदु है| आज्ञाचक्र का स्थान Medulla Oblongata यानि मेरुशीर्ष के ऊपर खोपड़ी के मध्य में पीछे की ओर है| यही जीवात्मा का निवास है|
ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||
१३ जुलाई २०२०
परमशिव ---
परमशिव ---
Friday, 9 July 2021
भगवान् की जाति क्या है? भगवान् का वर्ण क्या है? भगवान् का घर कहाँ है? ---
Thursday, 8 July 2021
साधनाकाल के आरंभ में हमारा मेरुदंड ही हमारी पूजा की वेदी बन जाता है ---
साधनाकाल के आरंभ में हमारा मेरुदंड ही हमारी पूजा की वेदी बन जाता है ---