Sunday, 4 May 2025
झुंझुनूं जिले के ब्राह्मण समाज को एक बहुत बड़ी क्षति ---
भारत की प्राचीन गुरुकुल आधारित शिक्षा-व्यवस्था, और गौ-आधारित कृषि-व्यवस्था, -- ही भारत को अपने प्राचीन गौरव और परम वैभव को प्राप्त करा सकती है।
भारत की प्राचीन गुरुकुल आधारित शिक्षा-व्यवस्था, और गौ-आधारित कृषि-व्यवस्था, -- ही भारत को अपने प्राचीन गौरव और परम वैभव को प्राप्त करा सकती है।
मेरा एकमात्र कर्तव्य परमात्मा के प्रकाश को अपनी पूरी क्षमता और सत्यनिष्ठा से फैलाना है। उस से बड़ा और कोई कर्तव्य मेरे लिए नहीं है। चारों ओर के वर्तमान घटनाक्रम से मैं भ्रमित और विचलित सा हो गया था। यह मेरी कमी थी। अब स्वयं को संयत कर लिया है। यह सृष्टि भगवान की है, मेरी नहीं। मेरे बिना भी उनकी सृष्टि चलेगी। भगवान को मेरी सलाह की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे जब उनसे स्पष्ट आश्वासन और मार्गदर्शन प्राप्त है, तब मेरा किसी भी बात पर उद्वेलित होना मेरी कमी है, जो अब और नहीं होनी चाहिए। अपनी भूल सुधार रहा हूँ।
मैं सोशियल मीडिया पर रहूँ या न रहूँ, आप अपने में हृदयस्थ सर्वव्यापक ईश्वर के साथ मुझे हर समय निरंतर पाओगे। एक माइक्रोसेकंड के लिए भी मैं आपसे दूर नहीं हूँ।
हम भगवान के किस रूप की, कौन सी साधना, किस विधि से करें? ---
Saturday, 3 May 2025
परमात्मा को उपलब्ध होने के लिए विरक्त होना आवश्यक है ?
परमात्मा को उपलब्ध होने के लिए विरक्त होना आवश्यक है ?
जीवन में एकमात्र आकर्षण सच्चिदानंद का है ---
जीवन में एकमात्र आकर्षण सिर्फ सच्चिदानंद का है। हमें परमात्मा के अतिरिक्त अन्य किसी के साथ की आवश्यकता नहीं है। अपने हृदय के सर्वश्रेष्ठ सर्वोत्तम प्रेम का उपहार परमात्मा को दें। सारी सृष्टि सच्चिदानंदमय है। सारी सृष्टि (सारी आकाशगंगाएँ -- अपने नक्षत्रों, ग्रहों, उपग्रहों के साथ, समस्त जड़-चेतन, सारे प्राणी, और यह अनंतता) भगवान का ध्यान कर रही है। प्रणव की ध्वनि चारों ओर गूंज रही है। चारों ओर आनंद ही आनंद है। सच्चिदानंद भगवान विष्णु - इस सृष्टि के रूप में व्यक्त हो रहे हैं। चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश, और आनंद ही आनंद है। कहीं पर भी कोई अंधकार नहीं है। मेरे प्रभु ही यह "मैं" बन गए हैं।
अपनी इष्ट देवी/देवता या सद्गुरु के चरण-कमलों का सदा ध्यान करें। उनके चरण-कमलों का ध्यान ज्योतिर्मय-ब्रह्म के रूप में तब तक कीजिये जब तक उन की आनंदमय उपस्थिती का प्रत्यक्ष बोध न हो। फिर उनको अपने माध्यम से अपने अन्य सब आवश्यक कार्य करने दीजिये। निरंतर परमात्मा की चेतना में रहें। जीवन के हर क्षण स्वयं के माध्यम से परमात्मा को व्यक्त करें। कौन क्या कहता है, इसका कोई महत्व नहीं है। हम परमात्मा की दृष्टि में क्या हैं? -- महत्व सिर्फ इसी का है।
Friday, 2 May 2025
समष्टि मुझ से पृथक नहीं है, सूक्ष्म जगत की अनंतता, और सम्पूर्ण सृष्टि मेरे अस्तित्व का भाग है ---
समष्टि मुझ से पृथक नहीं है, (स्वयं भगवान विष्णु ही यह "मैं" बन गए हैं) सूक्ष्म जगत की अनंतता, और सम्पूर्ण सृष्टि मेरे अस्तित्व का भाग है ---