भारत का साम्यवाद, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षतावाद ---
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भारत का साम्यवाद, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षतावाद ---
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सुषुम्ना के सात चक्रों की अग्नियों के साथ विश्वरूपमहाग्नि में हवन ---
हमारी निम्न प्रकृति में और हमारे अवचेतन मन में बहुत अधिक विकार भरे पड़े हैं, उन से मुक्त कैसे हों? उन से मुक्त हुए बिना कोई आध्यात्मिक प्रगति नहीं हो सकती| इसके लिए अनेक साधनायें हैं| इस विषय पर मेरा अनेक महात्माओं के साथ विचार-विमर्श और सत्संग हुआ है| सब ने अपने-अपने मतानुसार अपने विचार व्यक्त किए हैं| कोई भी साधक जो भी साधना करे, अपनी-अपनी गुरुपरंपरानुसार किन्हीं सिद्ध आचार्य के मार्गदर्शन में ही करें|
लक्ष्य दूर नहीं, अति समीप है ---
चलते-फिरते हर समय भगवान की चेतना में कैसे रहें?
मानसिक आरती :--- (यह एक महात्मा द्वारा बताई हुई विधि है).
सारे अरब कई सौ वर्षों तक तुर्कों के गुलाम थे। तुर्की का कोई खलीफा कभी हज करने नहीं गया। एक बार सऊदी अरब के बादशाह ने तुर्की से आजादी मांगी। तुर्की की फौज सऊदी बादशाह को और वहाँ के मुख्य इमाम को जंजीरों से बांधकर कुस्तुनतुनिया (इस्तांबूल) ले आई। वहाँ की मुख्य शाही मस्जिद हागिया सोफिया के सामने सऊदी बादशाह की गर्दन कलम कर दी गई। हजारों की भीड़ ने तालियाँ बजाईं और पटाखे छोड़े। मुख्य इमाम की गर्दन वहाँ के मुख्य बाजार में कलम की गई।