अपने अस्तित्त्व की रक्षा के लिये हमें भगवान् की शरण लेकर समर्पित होना ही पड़ेगा, अन्यथा नष्ट होने के लिये तैयार रहें ---
Monday, 20 January 2025
अपने अस्तित्त्व की रक्षा के लिये हमें भगवान् की शरण लेकर समर्पित होना ही पड़ेगा, अन्यथा नष्ट होने के लिये तैयार रहें ---
भगवान की कृपा हो तो हमारे पूर्व जन्मों के अच्छे संस्कार जागृत हो कर हृदय में भक्ति जागृत कर देते हैं ---
भगवान की कृपा हो तो हमारे पूर्व जन्मों के अच्छे संस्कार जागृत हो कर हृदय में भक्ति जागृत कर देते हैं। अन्यथा अपनी बुराइयों और कमियों से इस मायावी संसार के पाशों से ही हम सदा बंधे ही रहते हैं। आध्यात्मिक मार्ग पर बिना वीतराग (राग-द्वेष से मुक्त) हुए प्रगति नहीं होती। फिर भय और क्रोध से भी मुक्त होना पड़ता है। तभी हम स्थितप्रज्ञ हो सकते हैं। जो स्थितप्रज्ञ है, वही मुनि या सन्यासी है। भगवान कहते हैं --
देवासुर-संग्राम हर युग में सदा से ही चलते आये हैं, और चलते रहेंगे ---
देवासुर-संग्राम हर युग में सदा से ही चलते आये हैं, और चलते रहेंगे। वर्तमान में भी चल रहे हैं। हमें आवश्यकता है -- आत्म-साक्षात्कार, यानि भगवत्-प्राप्ति की। फिर जो कुछ भी करना है, वह स्वयं परमात्मा करेंगे। हम परमात्मा के उपकरण बनें, परमात्मा में स्वयं को विलीन कर दें। अब परमात्मा के बिना नहीं रह सकते, उन्हें इसी क्षण यहीं आना ही पड़ेगा।
आध्यात्म और भक्ति में भगवान से अन्य कुछ प्राप्ति की कामना/भावना हमारी अज्ञानता है। हमारा उद्देश्य केवल भगवत्-प्राप्ति है, न कि कुछ और --- .
आध्यात्म और भक्ति में भगवान से अन्य कुछ प्राप्ति की कामना/भावना हमारी अज्ञानता है। हमारा उद्देश्य केवल भगवत्-प्राप्ति है, न कि कुछ और ---
धन्य हैं वे सब भजनानंदी, जो भगवान का दिन-रात निरंतर भजन करते हैं ---
धन्य हैं वे सब भजनानंदी, जो भगवान का दिन-रात निरंतर भजन करते हैं ---
सांसारिक सफलता का मापदंड क्या है? क्या हम अपना Career, विवाह के बाद नहीं बना सकते? ---
सांसारिक सफलता का मापदंड क्या है? क्या हम अपना Career, विवाह के बाद नहीं बना सकते? ---
Sunday, 19 January 2025
इस समय राष्ट्र को ब्रह्मत्व की आवश्यकता है, स्वयं के शिवत्व को प्रकट करें ---
इस समय राष्ट्र को ब्रह्मत्व की आवश्यकता है| स्वयं के शिवत्व को प्रकट करें| वर्तमान नकारात्मक घटना क्रमों की पृष्ठभूमि में आसुरी शक्तियाँ हैं| राक्षसों, असुरों और पिशाचों से मनुष्य अपने बल पर नहीं लड़ सकते| सिर्फ ईश्वर ही रक्षा कर सकते हैं| अपने अस्तित्त्व की रक्षा के लिये हमें भगवान् की शरण लेकर समर्पित होना ही होगा, अन्यथा नष्ट होने के लिये तैयार रहें|