मेरी बात आपको बुरी लग सकती है, लेकिन सत्य है। भगवान तो मिले हुए हैं, वे ही सारा अस्तित्व हैं, वे कहीं दूर नहीं हैं, फिर किसको पाने की कामना कर रहे हो? यह कामना ही सबसे बड़ा धोखा है। वे निकटतम से भी अधिक निकट और प्रियतम से भी अधिक प्रिय हैं।
Tuesday, 10 September 2024
भगवान को पाने की कामना ही भगवान की प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधक है ---
भगवान का ध्यान कैसे करें? (अति अति महत्वपूर्ण लेख)
इस प्रश्न का उत्तर बड़ा कठिन है। श्रुति भगवती तो किन्हीं श्रौत्रीय ब्रह्मनिष्ठ आचार्य की शरण में जाने को कहती हैं। श्रौत्रीय ब्रह्मनिष्ठ आचार्य की शरण तो लेनी ही होगी। उसके बिना काम नहीं चलेगा। श्रुति-भगवती जो कहती है, वही प्रमाण है, जिसके विरुद्ध कुछ भी कहने का किसी को भी अधिकार नहीं है।
Saturday, 7 September 2024
(प्रश्न) : मन में बुरे विचार न आयें, विचारों पर नियंत्रण रहे, कोई अनावश्यक और फालतू बातचीत न हो, निरंतर सकारात्मक चिंतन हो, और परमात्मा की स्मृति हर समय बनी रहे। इसके लिए हमें क्या करना चाहिए ?
(उत्तर) : मैं जो लिखने जा रहा हूँ इसे गंभीरता से लें, हँसी में न उड़ायें। यदि आप इसे गंभीरता से लेंगे और निरंतर अभ्यास करेंगे तो आपका इतना अधिक कल्याण होगा, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
श्रेष्ठतम गुरु वह ही होता है जो शिष्य को परमात्मा से जोड़ दे ---
मैं जब गुरु पर ध्यान करता हूँ, उस समय मुझ में, गुरु में, और परमात्मा में कोई भेद नहीं होता। हम तीनों एक होते हैं। ऐसे ही जब मैं परमात्मा के किसी भी रूप पर ध्यान करता हूँ तब भी हमारे में कोई भेद नहीं होता।
शांति स्थापित होने का समय व्यतीत हो गया है ---
शांति स्थापित होने का समय व्यतीत हो गया है, अब महाविनाश निश्चित है। इस पृथ्वी पर सनातन स्थापित होने जा रहा है। केवल और केवल भगवान की कृपा ही अपने भक्तों की रक्षा करेगी। यह समय कायरता दिखाने का या रणभूमि से भागने का नहीं है। गीता में भगवान कहते है --
मंदिर जिसके विग्रह के दर्शन मात्र से करेंट लगता है ---
मुझे अपने जीवनकाल में ऐसे अनेक देवस्थानों पर जाने का तो अनुभव हुआ है जहाँ जाते ही साधक समाधिस्थ हो जाता है। लेकिन विग्रह के सामने से दर्शन करने मात्र से करेंट लगने की अनुभूति एक ही स्थान में हुई है। एक बार जोधपुर के मेरे एक मित्र मुझे घुमाने रामदेवड़ा (जिला जैसलमेर) में बाबा रामदेव के मंदिर में ले गए। मेरे साथ में तीन लोग और थे जो हर दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। हम रामदेवड़ा ऐसे समय में गए थे जब वहाँ कोई भीड़ नहीं होती। वह अति सामान्य दिन था, मंदिर में उस समय दर्शनार्थी बहुत कम, नहीं के बराबर ही थे।
कुरुक्षेत्र का युद्ध निरंतर हमारी चेतना में चल रहा है ---
भगवान के हरेक भक्त को कुरुक्षेत्र का युद्ध निमित्त मात्र बन कर (भगवान को कर्ता बनाकर) स्वयं लड़ना ही पड़ेगा। इसका कोई विकल्प नहीं है। यह युद्ध हमें जीतना ही होगा। पूर्ण विजय से अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ही हमारे मार्गदर्शक गुरु और एकमात्र कर्ता हैं।