मैं जो लिखने जा रहा हूँ इसे गंभीरता से लें, हँसी में न उड़ायें। यदि आप इसे गंभीरता से लेंगे और निरंतर अभ्यास करेंगे तो आपका इतना अधिक कल्याण होगा, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
Sunday, 25 August 2024
मन में बुरे विचार न आयें, विचारों पर नियंत्रण रहे, कोई अनावश्यक और फालतू बातचीत न हो, निरंतर सकारात्मक चिंतन हो, और परमात्मा की स्मृति हर समय बनी रहे। इसके लिए हमें क्या करना चाहिए ?
जन्माष्टमी की मोहरात्रि पूरी सृष्टि के लिए मंगलमय हो ---
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मेरे चैतन्य में निरंतर हो रहा है। मैं कैसे वर्णन करूँ? अनन्तकोटि ब्रह्माण्डों का ऐश्वर्य जिनका अंशमात्र हैं, ऐसे तेज:स्वरूप वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण हर समय निरंतर मेरे समक्ष हैं। उनका रूप इतना तेजस्वी है कि उनकी ओर देखा भी नहीं जा रहा है। मैं तृप्त हूँ, मैं धन्य हूँ उन्हें पाकर !! वे मेरे प्राण हैं, इससे अधिक कुछ भी नहीं कह सकता।
हम चाह कर भी आध्यात्मिक साधना क्यों नहीं कर पाते? हम भगवान का भजन करना चाहते हैं, लेकिन नहीं कर पाते। इसका कारण क्या है?
इसके सिर्फ दो ही कारण हैं, कोई तीसरा कारण नहीं है।
Tuesday, 26 March 2024
भ्रामरी-गुफा का रहस्य ---
गुरु की आज्ञा से हम जब भ्रूमध्य पर ध्यान करते हैं, तब बंद आँखों के अंधकार के पीछे शनैः शनैः गुरुकृपा से एक दिन विद्युतप्रभा के सदृश एक ब्रहमज्योति ध्यान में प्रकट होती है। उस ब्रह्मज्योति के सर्वव्यापी प्रकाश को हम 'ज्योतिर्मय ब्रह्म' कहते हैं जिसका ध्यान किया जाता है। उसमें सारी सृष्टि समाहित होती है। उसे "कूटस्थ" कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने इस शब्द का प्रयोग श्रीमद्भगवद्गीता में अनेक बार किया है। कूटस्थ पर ध्यान करते करते आरंभ में धीरे-धीरे भ्रमर-गुंजन की सी एक ध्वनि सुनाई देने लगती है। उस ध्वनि को 'अनाहत नाद' कहते हैं, जिसे सुनते हुए गुरु-प्रदत्त बीजमंत्र का मानसिक जप करते हैं। अनाहत-नाद की ध्वनि का रूप भी हर चक्र पर पृथक-पृथक होता है। यह आध्यात्मिक साधना, गुरु की आज्ञा से गुरु के निर्देशन में ही की जाती है।
Saturday, 21 January 2023
हमारा 'लोभ' और 'अहंकार' -- हमारे सबसे बड़े शत्रु हैं ---
हमारा 'लोभ' और 'अहंकार' -- हमारे सबसे बड़े शत्रु हैं; हमारी 'भक्ति' और 'सत्यनिष्ठा' -- हमारे सबसे बड़े मित्र हैं --- (यह बहुत अधिक महत्वपूर्ण और गंभीर लेख है)







भारत निश्चित रूप से विजयी होगा ---
असत्य और अंधकार की आसुरी/राक्षसी शक्तियों से सनातन-धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए हमें -- आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, मानसिक, आर्थिक, व भौतिक -- हरेक दृष्टिकोण से सशक्त व संगठित होना होगा।
आत्मा का धर्म है -- परमात्मा की अभीप्सा, पूर्ण प्रेम और पूर्ण समर्पण ---
आत्मा का धर्म है -- परमात्मा की अभीप्सा, पूर्ण प्रेम और पूर्ण समर्पण।