(प्रश्न) : राष्ट्रसेवा/देशसेवा/समाजसेवा किसे कहते हैं?
Friday, 7 February 2025
राष्ट्रसेवा/देशसेवा/समाजसेवा किसे कहते हैं ?
Thursday, 6 February 2025
महात्मा कौन है ?
एक वीतराग (राग-द्वेष और अहंकार से मुक्त) और स्थितप्रज्ञ (जिसकी प्रज्ञा परमात्मा में स्थिर है) व्यक्ति ही वास्तविक महात्मा है, जो महत् तत्व से जुड़ा है। कोई दुराचारी व्यक्ति महात्मा नहीं हो सकता। ऐसी मेरी मान्यता है।
हमारे पतन का कारण हमारा तमोगुण है ---
किसी भी कालखंड में जब भी हमारा पतन हुआ, उसका मुख्य और एकमात्र कारण हमारे जीवन में तमोगुण की प्रधानता का होना था। हमारी जो भी प्रगति हो रही है, वह तमोगुण का प्रभाव घटने, और रजोगुण में वृद्धि के कारण हो रही है।
Wednesday, 5 February 2025
भगवान की "अनन्य-अव्यभिचारिणी भक्ति" एक बहुत बड़ा आशीर्वाद है ---
गीता में बताई हुई भगवान की "अनन्य-अव्यभिचारिणी भक्ति" भगवान का एक बहुत बड़ा आशीर्वाद और बहुत बड़ी उपलब्धि है, कोई सामान्य क्रिया नहीं ---
हम आध्यात्म के मार्ग पर चल पड़े हैं, यह चलना ही महत्वपूर्ण है ---
फरवरी १९७९ में मैंने ध्यान साधना के मार्ग पर चलना आरंभ किया था| उस समय तक मैं दिशाहीन था| कोई विशेष व्यवहारिक जानकारी नहीं थी| हालाँकि एक संस्कारी उच्च ब्राहमण परिवार में जन्म लेने के कारण अच्छे धार्मिक संस्कार और अनेक आगम ग्रन्थों का स्वाध्याय था| जैसे-जैसे साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने लगा, वैसे-वैसे अज्ञान का आवरण हटता गया|
कोई सांसारिक अभिलाषा अब नहीं रही है ---
कोई सांसारिक अभिलाषा अब नहीं रही है ---



मैं सारी सृष्टि में व्याप्त हूँ, और सभी के हृदयों में उपासना कर रहा हूँ; भगवान मुझे नित्य प्राप्त हैं ---



