इस समय राष्ट्र को ब्रह्मत्व की आवश्यकता है| स्वयं के शिवत्व को प्रकट करें| वर्तमान नकारात्मक घटना क्रमों की पृष्ठभूमि में आसुरी शक्तियाँ हैं| राक्षसों, असुरों और पिशाचों से मनुष्य अपने बल पर नहीं लड़ सकते| सिर्फ ईश्वर ही रक्षा कर सकते हैं| अपने अस्तित्त्व की रक्षा के लिये हमें भगवान् की शरण लेकर समर्पित होना ही होगा, अन्यथा नष्ट होने के लिये तैयार रहें|
Sunday, 19 January 2025
इस समय राष्ट्र को ब्रह्मत्व की आवश्यकता है, स्वयं के शिवत्व को प्रकट करें ---
चित्त की वृत्तियों का निरोध करना ..........
चित्त की वृत्तियों का निरोध करना ..........
मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि "स्थितप्रज्ञता" है ---
मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि "स्थितप्रज्ञता" है ---
Saturday, 18 January 2025
महत्व केवल इसी बात का है कि भगवान क्या चाहते हैं ---
इस बात का अब कोई महत्व नहीं रह गया है कि मेरी स्वयं से क्या अपेक्षाएँ हैं। महत्व केवल इसी बात का है कि भगवान क्या चाहते हैं। भगवान चाहते हैं --
Friday, 17 January 2025
हमारा समर्पण सिर्फ और सिर्फ भगवान की अनंत असीम समग्रता के प्रति है, न कि उनकी किसी अभिव्यक्ति पर ---
हमारा समर्पण सिर्फ और सिर्फ भगवान की अनंत असीम समग्रता के प्रति है, न कि उनकी किसी अभिव्यक्ति पर। जब तक हम स्वयं को यह शरीर मानते हैं, तब तक आध्यात्मिक साधना में कोई प्रगति नहीं कर सकते। हमारी प्रगति उसी क्षण से प्रारंभ होती है जिस क्षण यह लगे कि हम यह शरीर नहीं हैं, और साधक साध्य व साधना सिर्फ भगवान हैं। भगवान अपनी साधना स्वयं कर रहे हैं, हम तो एक निमित्त मात्र हैं। वे ही दृष्टा, दृश्य व दृष्टि हैं। यह भौतिक सूक्ष्म व कारण शरीर, अंतकरण (मन बुद्धि चित्त अहंकार), कर्मेन्द्रियाँ, ज्ञानेंद्रियाँ, व उनकी तन्मात्राएं -- परमात्मा की सिर्फ अभिव्यक्तियाँ हैं।
Thursday, 16 January 2025
उपासना ---
उपासना ---