ध्यान साधना क्या है? ---
Monday, 24 January 2022
ध्यान साधना क्या है? ---
पूर्व जन्मों के अच्छे संस्कार जागृत हो कर हृदय में भक्ति जागृत कर देते हैं ---
भगवान की कृपा हो तो हमारे पूर्व जन्मों के अच्छे संस्कार जागृत हो कर हृदय में भक्ति जागृत कर देते हैं। अन्यथा अपनी बुराइयों और कमियों से इस मायावी संसार के पाशों से ही हम सदा बंधे ही रहते हैं। आध्यात्मिक मार्ग पर बिना वीतराग (राग-द्वेष से मुक्त) हुए प्रगति नहीं होती। फिर भय और क्रोध से भी मुक्त होना पड़ता है। तभी हम स्थितप्रज्ञ हो सकते हैं। जो स्थितप्रज्ञ है, वही मुनि या सन्यासी है। भगवान कहते हैं --
आध्यात्मिक रूप से हमारा सबसे बड़ा शत्रु -- हमारी स्वयं की अधोगामी निम्न प्रकृति है ---
आध्यात्मिक रूप से हमारा सबसे बड़ा शत्रु -- हमारी स्वयं की अधोगामी निम्न प्रकृति है। यह अधोगामी निम्न प्रकृति ही हमारी सभी बुराइयों की जड़ है, जो हमारे अहंकार को प्रबल कर हमें परमात्मा से दूर करती है। यह गीता के १४वें अध्याय "गुण-त्रय-विभाग योग" का सार है। इसका स्वाध्याय बार-बार तब तक करना चाहिए जब तक यह पूरी तरह समझ में नहीं आ जाये।
आध्यात्मिक दृष्टि से हमारा शत्रु व मित्र कौन है? सत्य-मुक्ति का उपाय क्या है? ---
आध्यात्मिक दृष्टि से हमारा शत्रु व मित्र कौन है? सत्य-मुक्ति का उपाय क्या है?
परमात्मा की खोज अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकती ---
ॐ श्री गुरुभ्यो नमः !! जीवन में सब कुछ प्रतीक्षा कर सकता है, लेकिन परमात्मा की खोज अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकती ---
Sunday, 23 January 2022
स्वयं भगवान के शब्दों में, भगवान को कौन प्राप्त कर सकता है? :---
स्वयं भगवान के शब्दों में, भगवान को कौन प्राप्त कर सकता है? :---



हमारा लक्ष्य आत्म-तत्व यानि परमात्मा की प्राप्ति है, न कि स्वर्ग आदि की कामना ---
हमारा लक्ष्य आत्म-तत्व यानि परमात्मा की प्राप्ति है, न कि कुछ अन्य आकर्षक सिद्धान्त, विभूति, या स्वर्ग आदि की कामना| सर्वप्रथम हम परमात्मा को प्राप्त करें, फिर उन की चेतना में रहते हुए, उन के उपकरण बन कर संसार के अन्य सारे कार्य करें| जब भी जीवन में परमात्मा को पाने की अभीप्सा जागृत हो, हमें उसी समय विरक्त होकर आत्मानुसंधान में लग जाना चाहिए| संसार में रहते हुए परमात्मा की खोज लगभग असंभव है| हमारे जैसे सामान्य मनुष्य, राजा जनक नहीं बन सकते|