Tuesday, 2 November 2021
सदा हमारी रक्षा हो ---
अस्तित्व -- या तो परमात्मा का ही हो सकता है, या सिर्फ मेरा; दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते ---
अस्तित्व -- या तो परमात्मा का ही हो सकता है, या सिर्फ मेरा। दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते। यह द्वैत बड़ा ही कष्टप्रद है। पहले मैं सोचता था कि मैं इस जीवन में कुछ प्राप्त करना चाहता हूँ, या कुछ होना चाहता हूँ। समय के साथ-साथ जैसे-जैसे परिपक्वता बढ़ी है, अब यह स्पष्ट हो गया है कि जो कुछ भी बना जा सकता है, या प्राप्त किया जा सकता है, वह तो मैं स्वयं हूँ।
मनुष्य जीवन का एकमात्र उद्देश्य निज जीवन में परमात्मा की पूर्ण अभिव्यक्ति है ---
Sunday, 31 October 2021
अक्षरब्रह्म योग व भूमा ---
जिन्हें इसी जीवनकाल में मुक्ति या मोक्ष चाहिए, उनके लिए श्रीमद्भगवद्गीता का आठवाँ अध्याय "अक्षरब्रह्म योग" है। इसका सिद्धान्त पक्ष तो कोई भी विद्वान आचार्य सिखा देखा, लेकिन व्यावहारिक पक्ष सीखने के लिए विरक्त तपस्वी महात्माओं का सत्संग करना होगा, और स्वयं को भी तपस्वी महात्मा बनना होगा।
एक पथ-प्रदर्शक गुरु का सान्निध्य चाहिए जो हमें उठा कर अमृत-कुंड में फेंक सके। यदि सत्यनिष्ठा है तो भगवान उसकी भी व्यवस्था कर देते हैं।।
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हम भगवान के साथ एक हैं, उन से पृथक नहीं ---
हम भगवान के साथ एक हैं, उन से पृथक नहीं ---