भारतवर्ष में जन्म लेकर भी जिसने भगवान का भजन नहीं किया वह बहुत ही अभागा और इस पृथ्वी पर भार है।
Thursday, 5 August 2021
हर साँस एक पुनर्जन्म है ---
चीन ने तिब्बत पर अधिकार किया, इसका असली कारण वहाँ की अथाह जल राशि, और भूगर्भीय संपदा है ---
चीन ने तिब्बत पर अधिकार किया, इसका असली कारण वहाँ की अथाह जल राशि, और भूगर्भीय संपदा है, जिसका अभी तक दोहन नहीं हुआ है। तिब्बत में कई ग्लेशियर हैं, और कई विशाल झीलें हैं। भारत की तीन विशाल नदियाँ -- ब्रह्मपुत्र, सतलज, और सिन्धु -- तिब्बत से आती हैं| गंगा में आकर मिलने वाली कई छोटी नदियाँ भी तिब्बत से आती हैं। चीन इस विशाल जल संपदा पर अपना अधिकार रखना चाहता है इसलिए उसने तिब्बत पर अधिकार किया। हो सकता है भविष्य में वह इस जल-धारा का प्रवाह चीन की ओर मोड़ दे। इस से भारत में तो हाहाकार मच जाएगा पर चीन का एक बहुत बड़ा क्षेत्र हरा भरा हो जाएगा।
अचानक ही अफगानिस्तान छोडकर जाना USA के लिए एक आत्मघाती निर्णय था ---
सं.रा.अमेरिका को कायराना तरीके से अचानक ही अफगानिस्तान छोडकर भागने के निर्णय पर भविष्य में बहुत अधिक पछताना पड़ेगा। यह USA के लिए एक आत्मघाती निर्णय था, जिस की प्रतिक्रिया USA में आरंभ भी हो गई है। भारत को इससे बहुत अधिक हानि पहुँचने की संभावना है। यह पूरी तरह भारत के हितों के विरुद्ध तो है ही, अमेरिकी हितों के भी विरुद्ध था। अब अफगानिस्तान में धीरे-धीरे बापस तालिबानी मुजाहिदीन सत्ता में आ गये तो वे पूर्ववत भारत के शत्रु ही होंगे।
अभी लिखने के लिए और कुछ भी नहीं बचा है ---









समय बहुत कम बचा है, अब सोच-विचार करने, या इधर-उधर भाग-दौड़ करने का समय नहीं है ---
समय बहुत कम बचा है। अब सोच-विचार करने, या इधर-उधर भाग-दौड़ करने का समय नहीं है। धर्मग्रंथों का और उपदेशों का कोई अंत नहीं है, कहाँ-कहाँ ध्यान देंगे? वासनाओं का भी अंत नहीं है, कब तक उनके पीछे-पीछे भागते रहेंगे?
Wednesday, 4 August 2021
कश्मीर का अतीत बहुत अधिक गौरवशाली रहा है ---
कश्मीर का अतीत बहुत अधिक गौरवशाली रहा है| कश्यप ऋषि की तपोभूमि है कश्मीर जहाँ की शारदा पीठ कभी वैदिक शिक्षा की सर्वोच्च पीठों में से एक थी| वहाँ ललितादित्य जैसे महान सम्राट, आचार्य अभिनव गुप्त जैसे महान दार्शनिक, और लल्लेश्वरी देवी जैसी महान शिवभक्त हुई हैं| कश्मीरी शैव दर्शन का वहाँ जन्म और विकास हुआ जिसके ग्रंथ शैवागमों और तंत्रागमों में प्रमुख स्थान रखते हैं| बौद्धमत का भी वहाँ खूब प्रचार हुआ था| चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (玄奘) जो राजा हर्षवर्धन के समय में भारत आया था, ने अपने ग्रंथों में कश्मीर में ढाई हजार मठों के होने की बात लिखी है| उस समय तक्षशिला तक का शासन कश्मीर के आधीन था| आचार्य अभिनव गुप्त को भगवान् पतंजलि की तरह शेषावतार कहा जाता है| उनकी परंपरा के आचार्यों ने उन्हें ‘योगिनीभू’ और भगवान शिव का अवतार बताया है| आचार्य शंकर भी वहाँ गए थे| श्रीनगर को सम्राट अशोक ने बसाया था| ऐसा कश्मीर अपने अतीत के गौरव को पुनः प्राप्त करेगा, निश्चित रूप से करेगा| धर्म की वहाँ पुनर्स्थापना होगी|
जब भगवान स्वयं ही समक्ष हों तो उनकी किस विधि से उपासना करें? ---