Monday, 13 February 2017

हृदय की एक घनीभूत पीड़ा व्यक्त हुई है .....

मैं सुदर्शन चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण और धनुर्धारी भगवान श्रीराम को नमन करता हूँ जिन्होंने आतताइयों के संहार के लिए अपने हाथों में अस्त्र धारण कर रखे हैं| उनकी चेतना सभी भारतवासियों में जागृत हो| ॐ ॐ ॐ ||
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भारत की प्रत्येक नारी आत्मरक्षा में प्रवीण हो, आतताई के प्राण लेने में भी सक्षम हो, और सदैव अपनी अस्मिता की रक्षा हेतु आत्मोत्सर्ग करने में भी तत्पर हो|
उसे सदा यह बोध रहे कि जीवन में मृत्यु में हर परिस्थिति में भगवान शिव की शक्ति निरंतर उसकी रक्षा कर रही है और करेगी|
हर नारी अबला नहीं सबला बने, भोग्या नहीं पूज्या बने, धर्मरक्षिका बने| ॐ ॐ ॐ ||
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यदि हम आत्मरक्षा करने में समर्थ नहीं हैं, संगठित नहीं हैं, हमारे में समाज व राष्ट्र की चेतना नहीं है, हमारे में आत्म-सम्मान नहीं है, तो हमारा वैभव, समृद्धि, संस्कृति, धर्म, घर-परिवार कुछ भी सुरक्षित नहीं है| न तो हमारे साधू-संत बचेंगे, न हमारे धर्मग्रन्थ, न हमारे देवालय, हमारा भौतिक अस्तित्व भी नहीं बचेगा|
भारत का कितना वैभव था, उस पर विचार करें| हमारी यह स्थिति कैसे हुई उस पर भी विचार करें|
आज जब हमारी अस्मिता पर मर्मान्तक प्रहार हो रहे हैं, तब हमें आत्म-रक्षा में समर्थ और संगठित होना ही होगा|
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अखंड भारत में कितना वैभव था, कितने भव्य मंदिर थे, कितनी महान संस्कृति थी, ज्ञान-विज्ञान की पराकाष्ठा थी, हमारे कितने गुरुकुल थे, कितने महान आचार्य थे, पर आज वह सब कहाँ है? हम क्यों पददलित हुए? हमारा अस्तित्व और हमारी अस्मिता प्रभु की परम कृपा से ही थोड़ी बहुत बची है| उस पर भी आसुरी शक्तियाँ प्रहार कर रही हैं| हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान इतना अधिक क्यों गिर गया है?
चेतना का हमारा स्तर इतना अधिक गिर गया है कि हम अपने अस्तित्व की रक्षा के प्रति भी निरपेक्ष बने हुए हैं|
कहीं न कहीं से कुछ न कुछ हमें पुनः आरम्भ करना ही होगा| हम अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं, इस पर हमें विचार करना ही होगा| ॐ ॐ ॐ ||
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हम आत्महीनता के बोध से मुक्त हों| हमें अपने धर्म और संस्कृति पर अभिमान हो| यह हमारा धर्म ही है जो अहैतुकी भक्ति और परोपकार की शिक्षा देता है| अन्य सभी मतों ने परोपकार के नाम पर परपीडन ही किया है| अन्य मत एक तरह की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्थाएं हैं जिन्होंने अपने मत का उपयोग अपने साम्राज्य विस्तार और अर्थलोलूपता के लिए किया है|
हम विदेशी प्रभाव से मुक्त हों| गर्व से कहो हम हिन्दू हैं| सत्य सनातन धर्म की जय| ॐ ॐ ॐ

जब तक पकिस्तान का अस्तित्व है, तब तक भारत में कभी सुख-शांति नहीं हो सकती .....

Feb.13, 2017.

जब तक पकिस्तान का अस्तित्व है, तब तक भारत में कभी सुख-शांति नहीं हो सकती .....
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कश्मीर के कुलगाम जिले में कल शहीद हुए दो जवानों व दो नागरिकों को श्रद्धांजलि| भगवान उनको सद्गति प्रदान करे| घायल हुए जवान शीघ्र स्वस्थ हों|
आतंकवादियों के समर्थन में अलगाववादियों ने आज पूरी कश्मीर घाटी में बंद कर रखा है| जिस समय आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ चल रही थी, कई सौ लोगों की भीड़ आतंकवादियों के समर्थन में नारे लगा रही थी और सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंक रही थी| इतना अधिक भ्रमित कर रखा है पकिस्तान ने कश्मीर के लोगों को मजहब के नाम पर जैसे पकिस्तान में मिलने पर वे स्वर्ग में पहुँच जायेंगे|
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कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान की वास्तविकता का नहीं पता है कि पृथ्वी पर यदि कहीं कोई नर्क है तो वह पकिस्तान ही है| पाक अधिकृत कश्मीर के लोग पाकिस्तानियों के हाथों कितने दुखी हैं और नर्क की यंत्रणा झेल रहे हैं, इसका पता संभवतः कश्मीरियों को नहीं है| वहाँ के लोग पकिस्तान से मुक्ति चाहते हैं| पंजाब को छोड़कर पकिस्तान के सभी प्रांत, पाकिस्तान से मुक्त होना चाह्ते हैं|
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पाकिस्तान जैसे कट्टर इस्लामिक देश की चीन जैसे कट्टर नास्तिक देश से मित्रता का एकमात्र कारण भारत से द्वेष है| चीन में मस्जिदों में अज़ान पर, रमजान के महीने में रोज़े रखने पर और इस्लाम की शिक्षा पर पूर्ण प्रतिबन्ध है| चीन में इमामों को सडक पर नचाया जाता है और उनसे कसम दिलवाई जाती है कि वे बच्चों को इस्लाम की शिक्षा नहीं देंगे| चीन में जो मुसलमान सरकारी कर्मचारी हैं उनसे नारे लगवाये जाते हैं कि उनका वेतन अल्लाह से नहीं बल्कि चीन की सरकार से मिलता है| आश्चर्य की बात तो यह है कि मुस्लिम जगत में कोई भी चीन के इस कदम का विरोध नही करता है| भारत के मानवाधिकारवादी भी शांत रहते हैं| दुखद बात तो यह है की भारत में पकिस्तान का विरोध करने वाले को साम्प्रदायिक की उपाधी तुरंत दे दी जाती है| पाकिस्तान एक असत्य और अन्धकार की शक्ति है, जिसका जितनी शीघ्र नाश हो जाए उतनी ही शीघ्र इस विश्व में शान्ति होगी|
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ॐ ॐ ॐ ||

सहज योग .....

सहज योग .....
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मेरे प्रिय निजात्मगण, सप्रेम अभिवादन !
'सहज' का अर्थ क्या होता है ? सहज का अर्थ .... 'आसान' नहीं है| 'सहज' का अर्थ है .... 'सह+ज' यानि जो साथ में जन्मा है| साथ में जो जन्मा है उसके माध्यम से या उसके साथ योग ही सहज योग है|
कोई भी प्राणी जब जन्म लेता है तो उसके साथ जिसका जन्म होता है वह है उसका श्वास| अत: श्वास-प्रश्वास ही सह+ज यानि 'सहज' है|
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महर्षि पतंजलि ने चित्त की वृत्तियों के निरोध को 'योग' परिभाषित किया है| चित्त और उसकी वृत्तियों को समझना बड़ा आवश्यक है| उसको समझे बिना आगे बढना ऐसे ही है जैसे प्राथमिक कक्षाओं को उतीर्ण किये बिना माध्यमिक में प्रवेश लेना|
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चित्त है हमारी चेतना का सूक्ष्मतम केंद्र बिंदु, जिसे समझना बड़ा कठिन है|
चित्त स्वयं को दो प्रकार से व्यक्त करता है .... एक तो मन व वासनाओं के रूप में, और दूसरा श्वास-प्रश्वास के रूप में|
मन व वासनाओं को पकड़ना बड़ा कठिन है| हाँ, साँस को पकड़ा जा सकता है|
योगी लोग कहते हैं कि मानव देह और मन के बीच की कड़ी .... 'प्राण' है|
चंचल प्राण ही मन है| प्राणों को स्थिर कर के ही मन पर नियन्त्रण किया जा सकता है|
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भारत के योगियों ने अपनी साधना से बड़े बड़े महान प्रयोग किये और योग-विज्ञान को प्रकट किया| योगियों ने पाया की श्वास-प्रश्वास कोई स्वतंत्र क्रिया नहीं है बल्कि सूक्ष्म देह में प्राण प्रवाह की ही प्रतिक्रिया है| जब तक देह में प्राणों का प्रवाह है तब तक साँस चलेगी| प्राण प्रवाह बंद होते ही साँस भी बंद हो जायेगी|
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योगियों की स्वयं पर प्रयोग कर की गयी महानतम खोज इस तथ्य का पता लगाना है कि श्वास-प्रश्वास पर ध्यान कर के प्राण तत्व को नियंत्रित किया जा सकता है, और प्राण तत्व पर नियन्त्रण कर के मन पर विजय पाई जा सकती है, मन पर विजय पाना वासनाओं पर विजय पाना है| यही चित्त वृत्तियों का निरोध है|
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फिर चित्त को प्रत्याहार यानि अन्तर्मुखी कर एकाग्रता द्वारा कुछ सुनिश्चित धारणा द्वारा ध्यान किया जा सकता है, और ध्यान द्वारा समाधि लाभ प्राप्त कर परम तत्व यानि परमात्मा के साथ 'योग' यानि समर्पित होकर जुड़ा या उपलब्ध हुआ जा सकता है| फिर इस साधना में सहायक हठ योग आदि का आविष्कार हुआ| फिर यम नियमों की खोज हुई| फिर इस समस्त प्रक्रिया को क्रमबद्ध रूप से सुव्यवस्थित कर योग विज्ञान प्रस्तुत किया गया|
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मूल आधार है श्वास-प्रश्वास पर ध्यान| यही सहज (सह+ज) योग है|
बौद्ध मतानुयायी साधकों ने इसे विपासना यानि विपश्यना और अनापानसति योग कहा जिसमें साथ में कोई मन्त्र नहीं होता है| योगदर्शन व तंत्रागमों और शैवागमों में श्वास-प्रश्वास के साथ दो बीज मन्त्र 'हँ' और 'स:' जोड़कर एक धारणा के साथ ध्यान करते हैं| इसे अजपाजाप कहते हैं|
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इनमें यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) और नियम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान) की अनिवार्यता इसलिए कर दी गयी क्योंकि योग साधना से कुछ सूक्ष्म शक्तियों का जागरण होता है| यदि साधक के आचार विचार सही नहीं हुए तो या तो उसे मस्तिष्क की कोई गंभीर विकृति हो सकती है या सूक्ष्म जगत की आसुरी शक्तियां उस को अपने अधिकार में लेकर अपना उपकरण बना सकती हैं|
(प्राणायाम एक दुधारी तलवार है| यदि साधक के आचार-विचार सही हैं तो वह उसे देवता बना देती है, और यदि साधक कुविचारी है तो वह असुर यानि राक्षस बन जाता है| इसीलिए सूक्ष्म प्राणायाम साधना को गोपनीय रखा गया है| वह गुरु द्वारा प्रत्यक्ष शिष्य को प्रदान की जाती है| गुरु भी यह विद्या उसकी पात्रता देखकर ही देता है|)
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भारत की विश्व को सबसे बड़ी देन .... आध्यात्म, विविध दर्शन शास्त्र, अहैतुकी परम प्रेम यानि भक्ति व समर्पण की अवधारणा, वेद, वेदांग, पुराणादि अनेक ग्रन्थ, सब के उपकार की भावना के साथ साथ योग दर्शन भी है जिसे भारत की आस्तिक और नास्तिक (बौद्ध, जैन आदि) दोनों परम्पराओं ने स्वीकार किया है||
इस चर्चा का समापन यहीं करता हूँ| धन्यवाद|
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ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

धारणा व ध्यान .....

धारणा व ध्यान .....
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मेरा कोई लक्ष्य नहीं है, मेरे लिए कोई उपलब्धि नहीं है| हर लक्ष्य, हर उपलब्धि मैं स्वयं हूँ| मैं शाश्वत और सम्पूर्ण अस्तित्व हूँ| मैं परमात्व तत्त्व हूँ| मैं यह देह नहीं बल्कि असीम सम्पूर्ण अनंतता हूँ| मेरे सिवा कोई अन्य नहीं है|
शिव शिव शिव | शिवोहं शिवोहं अहं ब्रह्मास्मि | ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ||
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सारी सृष्टि परमात्मा का साकार रूप है| सम्पूर्ण अस्तित्व परमात्मा है| विविधता उसकी लीला है|
यह मैं, मेरे गुरु और परमात्मा सब एक हैं, उनमें कोई भेद नहीं है| पृथकता का बोध माया है|
ॐ ॐ ॐ ||

ज्ञान का स्त्रोत ....

ज्ञान का स्त्रोत ....
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पुस्तकों का अध्ययन अति आवश्यक है पर यह ध्यान रहे कि पुस्तकें मात्र सूचनाएँ देती हैं, ज्ञान नहीं| ज्ञान का स्त्रोत तो सिर्फ परमात्मा हैं|
पुस्तकों से प्राप्त सूचनाएँ तो एक उच्च स्तर का अज्ञान ही है जो सही ज्ञान पाने की प्रेरणा देता है| यही उसका उपयोग है|
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अच्छी पुस्तकें पढ़ने से सूचना और प्रेरणा तो मिलती ही हैं, साथ साथ लेखक से और जिन के बारे में वह लिखी गयी है से सत्संग भी होता है| अतः सत्साहित्य का खूब स्वाध्याय करना चाहिए|
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पर उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है ---- भगवन की अहैतुकी भक्ति और उन का ध्यान| जो लाभ आठ घंटे के स्वाध्याय से होता है, उससे भी अधिक लाभ एक घंटे की ध्यान साधना से होता है| ध्यान ..... परमात्मा के साथ सत्संग है|
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ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||
कृपा शंकर

Saturday, 11 February 2017

एक फूल की स्मृति में जो बिना खिले ही मुरझा गया .....

ॐ ऐं सरस्वत्ये नमः .....बसंत पंचमी की शुभ कामनाएँ ........
एक फूल की स्मृति में जो बिना खिले ही मुरझा गया .....
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बसंत पंचमी का दिन पतझड़ के बाद नए फूल खिलने की शुरुआत करता है, लेकिन इस दिन एक फूल बिना खिले मुरझा गया। इसी दिन धर्मांधों ने 14 साल के मासूम हकीकत राय की नाजुक गर्दन धड़ से अलग कर दी थी बाल शहीद वीर हकीकत राय ने जान दे दी पर धर्म नहीं छोड़ा| वीर बालक हकीक़त राय को कत्ल कर दिया गया। वह शहीद हो गया, उसने अपना बलिदान दे दिया लेकिन धर्म से डिगा नहीं|
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हकीकत राय नाम का बालक था धर्म परायण और वीर। मुगल राज़ था। एक मदरसे मे पढता था वह वीर बालक| एक दिन साथ के कुछ मुस्लिम बच्चे उसे चिढ़ाने के लिए हिंदू देवी दुर्गा को गाली देने लगे| उस सहनशील बालक ने कहा अगर यह सब मैं बीबी फातिमा के लिए कहूँ तो तुम्हे कैसा लगेगा। इतना सुन कर हल्ला मच गया कि हकीकत ने गाली दी| बात बड़े काजी तक पहुँची| फ़ैसला सुनाया गया इस्लाम स्वीकार कर लो या मरो। उस बालक ने कहा मैंने गलत नही कहा मैं इस्लाम नही स्वीकार करूँगा। उसके पास भगवद्गीता थी जिसमें उसने पढ़ा था कि आत्मा अमर है| यह गीता का ज्ञान ही उसका संबल था|
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बाद में यह मामला स्यालकोट के शासक अमीर बेग की अदालत में पहुँचा। हकीकत राय ने दोनों जगह सही बात बता दी। मुल्लाओं की राय ली गई तो उन्होंने कहा कि हकीकत राय के मन में इस्लाम के अपमान का विचार आया, इसीलिए उसे मृत्युदण्ड दिया जाए।
लाहौर के सूबेदार की कचहरी में भी यही निर्णय बहाल रहा। तब मुल्लाओं ने कहा कि हकीकत राय इस्लाम धर्म ग्रहण कर ले तो उसके प्राण बच सकते हैं। माता-पिता और पत्नी ने इसे मान लेने का अनुरोध किया, पर हकीकत राय इसके तैयार नहीं हुए। 1740 ई. में उनका कत्ल कर दिया गया|
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हकीकत राय का जन्म 1724 ई. में स्यालकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता का नाम भागमल खत्री था। हकीकत राय बचपन से ही बड़ी धार्मिक प्रवृत्ति के थे। उनकी माता गौराँ देवी अत्यंत धार्मिक स्त्री थीं। हकीकत राय की सगाई बटाला के कादी हट्टी मुहल्ला के रहने वाले उप्पल गौत्र के किशन सिंह खत्री की बेटी लक्ष्मी के साथ हुई थी। कुछ इतिहासकार उसका नाम सावित्री भी बताते हैं| उनकी अभी गौना नहीं हुआ था इसलिए लक्ष्मी अपने मायके में ही रह रही थी।
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जब हकीकत राय की शहादत की खबर बटाला पहुंची तो सारे शहर में शोक की लहर फैल गई। लक्ष्मी ने सती होने की इच्छा व्यक्त की। परिवार द्वारा काफी मनाने के बावजूद वो नहीं मानी और शहर से बाहर एक स्थान पर आकर सती हो गई। लाहौर से दो मील पूर्व की ओर हकीकत राय की समाधि बनी हुई थी जहाँ विभाजन से पूर्व हर वर्ष मेला भरा करता था बसंत पंचमी के दिन भारी संख्या में लोग शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए नतमस्तक होते हैं।
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जय सनातन वैदिकी संस्कृति ! जय श्रीराम !

बसंत पंचमी की शुभ कामनाएँ ........


बसंत पंचमी की शुभ कामनाएँ ........
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सभी को बसंत पंचमी की शुभ कामनाएँ और अभिनन्दन .......
माँ सरस्वती की कृपा हम सब पर बनी रहे|

वसंत ऋतु में प्रकृति का कण-कण खिल उठता है| सारे प्राणी उल्लास से भर उठते हैं| आज माघ शुक्ल ५ को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व हमारे जन जीवन को सदा प्रभावित करता आया है| मुझे मेरे बचपन की एक बहुत अच्छी स्मृति है ..... बसंत पंचमी के दिन हर मंदिर में भजन-कीर्तन होते थे, गुलाल उडती थी, प्रसाद बँटता था, और सभी विद्यालयों में सरस्वति पूजा होती थी| अब वे सारे रीति-रिवाज धर्म-निरपेक्षता की भेंट चढ़कर समाप्त हो गए हैं|
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हमारे देश की संस्कृति, इतिहास और परम्पराओं में बसंत पंचमी का बड़ा महत्व रहा है| कुछ का यहाँ विवरण दे रहा हूँ .....
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लोक कथाओं में बसंत पंचमी के ही दिन बालक भगवान् श्रीकृष्ण ने श्रीराधा जी का शृंगार किया था| पूरी प्रकृति ही उस दिन अपने पूर्ण सौंदर्य में सँज-सँवर गयी थी|
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बसंत पंचमी का ही दिन था जब भगवान श्रीराम शबरी माँ की कुटिया में पधारे थे|
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वसंत पंचमी के ही दिन सन 1192 ई.में पृथ्वीराज चौहान ने तीर चलाकर मोहम्मद घोरी को मार गिराया था| उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया और उनकी आंखें फोड़ दीं|
इसके बाद की घटना तो जगप्रसिद्ध ही है| गौरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा| पृथ्वीराज के साथी कवि चंदबरदाई के परामर्श पर गौरी ने ऊंचे स्थान पर बैठकर तवे पर चोट मारकर संकेत किया| तभी चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया .......
चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण|
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान||
पृथ्वीराज चौहान ने इस बार भूल नहीं की| उन्होंने तवे पर हुई चोट और चंदबरदाई के संकेत से अनुमान लगाकर जो बाण मारा, वह गौरी के सीने में जा धंसा| इसके बाद चंदबरदाई और पृथ्वीराज ने भी एक दूसरे के पेट में छुरा भौंककर आत्मबलिदान दे दिया|
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वीर बालक हकीकत राय की ह्त्या आज बसंत पंचमी के ही दिन कर दी गयी थी| लाहौर निवासी वीर बालक हकीक़त राय एक विद्यालय का विद्यार्थी था जिसे एक मौलवी उस्ताद चलाते थे| एक दिन जब मौलवी किसी काम से विद्यालय छोड़कर चले गये, तो सब बच्चे खेलने लगे, पर हकीकत राय पढ़ता रहा| जब अन्य बच्चों ने उसे छेड़ा, तो हकीक़त राय ने उनको माँ दुर्गा की सोगंध दी| मुस्लिम बालकों ने माँ दुर्गा की हँसी उड़ाई| हकीकत ने कहा कि यदि मैं तुम्हारी बीबी फातिमा के बारे में कुछ कहूँ, तो तुम्हें कैसा लगेगा?
बस फिर क्या था, मौलवी जी के आते ही उन शरारती छात्रों ने शिकायत कर दी कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है| फिर तो बात बढ़ते हुए काजी तक जा पहुंची| मुस्लिम शासन में वही निर्णय हुआ, जिसकी अपेक्षा थी| आदेश हो गया कि या तो बालक हकीकत राय मुसलमान बन जाये, अन्यथा उसे मृत्युदंड दिया जायेगा| सरहिंद के नवाब ने तो उसे अपनी शहजादी के साथ निकाह और आधे राज्य का भी प्रस्ताव दिया पर वीर बालक हकीकत राय ने यह स्वीकार नहीं किया और अपने धर्म पर अडिग रहा| परिणामत: उसे तलवार के घाट उतारने का फरमान जारी हो गया|
उसके घरवालों ने भी उससे आग्रह किया कि प्राणरक्षा के लिए तुम मुसलमान बन जाओ पर हकीक़त राय ने एक हाथ में गीता ली और कहा कि मेरी आत्मा अमर है जिसे कोई नहीं मार सकता और मैं अपने स्वधर्म में ही मरना चाहूँगा| उसके भोले मुख को देखकर जल्लाद के हाथ से तलवार गिर गयी| हकीकत ने तलवार उसके हाथ में दी और कहा कि जब मैं बच्चा होकर अपने धर्म का पालन कर रहा हूं, तो तुम बड़े होकर अपने धर्म से क्यों विमुख हो रहे हो? इस पर जल्लाद ने दिल मजबूत कर तलवार चला दी, पर उस वीर का शीश धरती पर नहीं गिरा, वह आकाशमार्ग से सीधा स्वर्ग चला गया।
यह घटना वसंत पंचमी (23.2.1734) को हुई थी| पाकिस्तान यद्यपि मुस्लिम देश है, पर हकीकत के आकाशगामी शीश की याद में वहां वसंत पंचमी पर पतंगें उड़ाई जाती है| हकीकत लाहौर का निवासी था| अत: पतंगबाजी का सर्वाधिक जोर लाहौर में रहता है|
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गुरू रामसिंह कूका का जन्म 1816 ई. में वसंत पंचमी पर लुधियाना के भैणी ग्राम में हुआ था| कुछ समय तो वे रणजीत सिंह की सेना में रहे, फिर घर आकर खेतीबाड़ी में लग गये, पर आध्यात्मिक प्रवृति होने के कारण इनके प्रवचन सुनने लोग आने लगे| धीरे-धीरे इनके शिश्यों का एक अलग पंथ ही बन गया, जो कूका पंथ कहलाया|
गुरू रामसिंह गोरक्षा, स्वदेशी, नारी उद्धार, अंतरजातीय विवाह, सामूहिक विवाह आदि पर बहुत जोर देते थे| उन्होंने भी सर्वप्रथम अंग्रेजी शासन का बहिष्कार कर अपनी स्वतंत्र डाक और प्रशासन व्यवस्था चलायी थी| प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर भैणी गांव में मेला लगता था| 1872 में मेले में आते समय उनके एक शिष्य को मुसलमानों ने घेर लिया| उन्होंने उसे पीटा और गोवध कर उसके मुंह में गोमांस ठूँस दिया। यह सुनकर गुरू रामसिंह के शिष्य भड़क गये| उन्होंने उस गांव पर हमला बोल दिया, पर दूसरी ओर से अंग्रेज सेना आ गयी अत: युध्द का पासा पलट गया|
इस संघर्ष में अनेक कूका वीर शहीद हुए और 68 पकड़ लिये गये। इनमें से 50 को सत्रह जनवरी 1872 को मलेरकोटला में तोप के मुँह से बाँधकर खड़ाकर उड़ा दिया गया| शेष 18 को अगले दिन फांसी दे दी गयी| दो दिन बाद गुरू रामसिंह को भी पकड़कर बर्मा की मांडले जेल में भेज दिया गया| 14 साल तक वहाँ कठोर अत्याचार सहकर 1885 ई. में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया|
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वसंत पंचमी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिवस भी है| निराला जी के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी| वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे डालते थे| इस कारण लोग उन्हें 'महाप्राण' कहते थे|

जय सनातन वैदिकी संस्कृति ! जय श्रीराम !