Tuesday, 31 January 2017

हिंदुत्व की मेरी अवधारणा :---

हिंदुत्व की मेरी अवधारणा :---
हिंदुत्व हमारे लिए हमारे परम आदर्श भगवान श्रीराम के जीवन का अनुकरण है| हिंदुत्व निगमागम ग्रंथों व भगवत गीता का सारतत्व है| हिंदुत्व प्रभु श्री हनुमान जी की निस्वार्थ भक्ति, सेवा और साधना है| हिंदुत्व आचार्य चाणक्य की राष्ट्र साधना है| हिंदुत्व महाराणा प्रताप, महाराजा शिवाजी, महाराजा रणजीतसिंह व अन्य सहस्त्रों शूरवीरों का शौर्य और त्याग है| हिंदुत्व स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द व अन्य अनेकानेक संतों की राष्ट्रभक्ति है| हिंदुत्व महारानी पद्मिनी जैसी लाखों सतियों का सतीत्व है| हिंदुत्व खंड खंड में बंटे इस राष्ट्र को एकात्म करने का सूत्र और इस धर्म, राष्ट्र व संस्कृति का सृजनकर्ता है| हिंदुत्व हमारा प्राण. हमारी सांस और हमारा अस्तित्व है|
ॐ ॐ ॐ ||

ह्रदय की घनीभूत पीड़ा व उसका समाधान ...... जीवन का ध्रुव ........

ह्रदय की घनीभूत पीड़ा व उसका समाधान ...... जीवन का ध्रुव ........
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वर्षों पहिले युवावस्था में जय शंकर प्रसाद का 'कामायनी' महाकाव्य पढ़ा था जिसकी अनेक पंक्तियाँ आज भी याद हैं| उसका आरम्भ कुछ इस प्रकार होता है ....
"हिमगिरी के उत्तुंग शिखर पर बैठ शिला की शीतल छाँह,
एक व्यक्ति भीगे नयनों से देख रहा था प्रलय अथाह |"
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जीवन में जब अपनी आस्थाओं पर और मान्यताओं पर मर्मान्तक प्रहारों को होते हुए देखता हूँ तो बड़ी पीड़ा होती है और कई बार तो ऐसा लगता है कि हम भी उस असहाय व्यक्ति की ही तरह इस अथाह प्रलय को देख रहे हैं, और कुछ भी नहीं कर सकते| पर अगले ही क्षण निज विवेक कहता है ........ "नहीं", तुम असहाय नहीं हो, तुम दीन-हीन नहीं हो ........ |
निज विवेक कहता है ....... तुम बहुत कुछ कर सकते हो .......|
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जब स्वयं में अनेक कमियों को देखता हूँ तो निराश हो जाता हूँ| पर शीघ्र ही निज विवेक फिर कहता है ...... तुम, ये कमियाँ नहीं हो...... परमात्मा की शक्तियाँ तुम्हारे साथ हैं.....|
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इसी उधेड़बुन में जीवन निकल गया है, सोचकर फिर निराश हो जाता हूँ| तब फिर कोई छिपा हुआ विवेक ह्रदय के भीतर से कहता है ....... जीवन शाश्वत और अनंत है, अपने सपनों को साकार कर सकते हो ..... अपने संकल्पों को पूर्ण कर सकते हो........ |
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निश्चित रूप से अपने सपनों को साकार करेंगे| आने वाली हर बाधा से दूर से ही निकल जाएँगे, किसी भी बाधा को मार्ग में नहीं आने देंगे|
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अनंत शक्तियाँ साथ में हैं| एक पथ प्रदर्शक जीवन का ध्रुव बन गया है जिसकी कृपा से इस घनी अँधेरी रात्रि में भी मार्ग दिखाई दे रहा है|
जो भी होगा, अच्छा ही होगा| परमात्मा की इस सृष्टि में कुछ भी गलत नहीं हो सकता|
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उपरोक्त कवि के ही शब्दों में ....

"जिसे तुम समझे हो अभिशाप, जगत की ज्वालाओं का मूल |
ईश का वह रहस्य वरदान, जिसे तुम कभी न जाना भूल ||"
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|| ॐ ॐ ॐ || जब सृष्टि के स्वामी साथ में हैं तो अब कुछ भी असाध्य नहीं है|
I have made Thee polestar of my life
Though my sea is dark and my stars are gone
Still I see the path through Thy mercy ......... (P.Y.)
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शिवोहं शिवोहं शिवोहं अयमात्मा ब्रह्म | ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ||
कृपा शंकर
माघ कृ.५ वि.स.२०७२, 29 जनवरी 2016

कोकाकोला, कोलगेट से लाभ, व अन्य कुछ .....

कोकाकोला हर घर में रखनी चाहिए| इससे होने वाले 16 बहुत बड़े लाभ हैं जो इसकी हर कमी को दूर कर देते हैं| यह पोस्ट खूब शेयर करें ताकि कोकाकोला के बारे में दुर्भावना दूर हो| इसकी एक बोतल हर समय घर में रहनी चाहिए|
(1) चीनी मिटटी के बर्तनों पर लगे हर धब्बे को
दूर करता है|

(2) घर में गलीचे पर लगे हर धब्बे को दूर करता है|

(3) खाने के बर्तनों पर हुए जलने के हर निशान को दूर करता है|

(4) कपड़ों पर लगी चिकनाई जो साबुन से दूर नहीं होती को मिटा देता है|

(5) बालो पर लगे रंग को तुरंत उतार देता है|

(6) किसी भी धातु पर लगे पेंट के धब्बों को तुरंत मिटा देता है|

(7) कार बैटरी और इन्वर्टर की बैटरी के टर्मिनलों पर जरने यानि जंग को तुरंत दूर कर देता है|

(8) सबसे बढ़िया कीटनाशक का काम करता है|

(9) टाइलों पर लगे धब्बों को तुरंत दूर कर देता है|

(10) टॉयलेट की सफाई सबसे बढ़िया करता है|

(11) पुराने सिक्कों में चमक ला देता है|

(12) अल्युमिनियम फॉयल को साफ़ कर देता है|

(13) च्युइंग गम के निशानों को दूर कर देता है|

(14) कपड़ों पर लगे खून के धब्बों को तुरंत साफ़ कर देता है|

(15) गंदे बालों की सफाई बहुत अच्छी तरह कर देता है|

(16) घर में इसको पानी में मिलाकर पोचा बहुत अच्छा लगता है| घर को कीटाणु रहित कर देता है|

एक लाभ और है उनकेलिए जो शीघ्र मरना चाहते हैं, वे इसका नियमित सेवन करें| आंतें खराब हो जायेंगी और इस नश्वर देह से मुक्ति व यमराज से शीघ्र भेंट हो जायेगी| इससे लाभ ही लाभ है| अतः हर घर में यह अवश्य रखना चाहिए|
धन्यवाद|

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कुछ दिनों पूर्व कोकाकोला से होने वाले बहुत सारे लाभ लिखे थे जिनको पाठकों ने बहुत पसंद किया था| उन्हें कमेंट बॉक्स में दुबारा दे रहा हूँ| आज कोलगेट टूथपेस्ट का लाभ भी लिख रहा हूँ, और इसका सर्वश्रेष्ठ विकल्प भी बता रहा हूँ| कोल्ड क्रीम और शेविंग क्रीम का विकल्प भी वता रहा हूँ|
कोलगेट से होने वाला लाभ .....
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कोलगेट टूथपेस्ट का एक बहुत बड़ा लाभ है जिसका पता बाबा रामदेव को भी सम्भवतः नहीं है| कोलगेट टूथपेस्ट आपके रसोईघर के फर्स्ट-ऐड बॉक्स में अवश्य होना चाहिए| शरीर का कोई भी भाग दुर्घटनावश यदि थोड़ा जल जाए तो वहाँ तुरंत कोलगेट टूथपेस्ट लगा लो| इससे फफोले नहीं पड़ेंगे और त्वचा शीघ्र ही सामान्य हो जायेगी|
जो तकनीशियन इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स पर सोल्डरिंग करते हैं, यदि सोल्डरिंग आयरन से उनकी अंगुली या अंगूठा जल जाए तो तुरंत कोलगेट टूथपेस्ट लगा लो| त्वचा शीघ्र ही स्वस्थ हो जायेगी| कोलगेट टूथपेस्ट का अन्य कोई लाभ नहीं है|
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दांत साफ़ करने के लिए .......
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शुद्ध नारियल के तेल से दांतों पर नरम ब्रश कीजिये| यह अनुभूत प्रयोग है| बाईं हथेली पर पाँच-छः बूँद नारियल के तेल की लीजिये और उसमें अपनी टूथ ब्रश को तर कर लीजिये और दांतों पर हलके से ब्रश कीजिये| यह किसी भी टूथपेस्ट से अधिक प्रभावशाली है| आजकल सर्दियों में नारियल का तेल जम जाता है| अतः अंगुली से थोड़ा जमा हुआ नारियल का तेल पेस्ट की तरह ब्रश पर लगाइए और ब्रश कीजिये| आप के दांत स्वस्थ रहेंगे|
यदि आप ब्रश की जगह अंगुली से दांत साफ़ करते हैं तो नारियल के तेल की जगह सरसों के तेल का प्रयोग कीजिये| पांच-छः बूंद सरसों के तेल की और एक चुटकी भर नमक लेकर मध्यमा अंगुली से दांत साफ़ कीजिये| यह भी किसी भी टूथ पाउडर से अच्छा है|
आपके स्नानघर से कोलगेट टूथपेस्ट को हटाकर उसे आज ही रसोईघर के फर्स्ट-ऐड बॉक्स में डाल दीजिये|
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कुछ अन्य .......
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चेहरे पर भी कोल्ड क्रीम की जगह दो-चार बूँद नारियल के तेल की हथेली से रगड़कर लगाएं| त्वचा नरम रहेगी| किसी भी कोल्ड क्रीम से अधिक लाभदायक है यह विधि|

शेविंग क्रीम के स्थान पर गालों पर थोड़ा सा दूध हथेली पर लेकर रगड़ें और फिर शेव कीजिये| फर्क दिखाई देगा, ज्यादा अच्छी शेव बनेगी|
स्नान करते समय पैरों के तलुओं को अच्छी तरह साफ करें| जितने साफ़ आपके पैर रहेंगे, उसी अनुपात में आपका चेहरा चमकेगा|
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ये सब अनुभूत प्रयोग हैं| आप प्रयोग करके देखिये और फिर विश्वास कीजिये|
धन्यवाद|
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अवचेतन मन को संस्कारित करने के लिए आध्यात्मिक साधनाओं की आवश्यकता :---

अवचेतन मन को संस्कारित करने के लिए
आध्यात्मिक साधनाओं की आवश्यकता :---
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यह विषय अति गूढ़ है जिसे समझना एक आध्यात्मिक साधक के लिए अति आवश्यक है| साधना करते करते साधक के मन में एक अहंकार सा आ जाता है जिसके कारण वह साधना मार्ग से विमुख हो जाता है| इसका कारण और निवारण हमें समझना पड़ेगा तभी हम साधना में विक्षेप से अपनी रक्षा कर सकेंगे व आगे प्रगति कर पायेंगे| मैं कम से कम शब्दों में इसे व्यक्त करने का प्रयास कर रहा हूँ|
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हमारा अवचेतन मन ही हमारे विचारों और भावों को घनीभूत रूप से व्यक्त करता है| अवचेतन मन एक कंप्यूटर की तरह है जिसमें हम चेतन मन से जो भी प्रोग्राम फीड करते हैं, अवचेतन मन हमें उसी रूप में संचालित करता है| हमें बचपन से अब तक बार बार जो भी बताया गया है, या जो भी सुझाव हमने स्वयं को दिए हैं, उसी कंडीशनिंग के उत्पाद हम हैं|
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कल्पना शक्ति का प्रभाव भी अवचेतन मन पर बहुत गहरा पड़ता है| इतना ही नहीं हम जिस वातावरण में रहते हैं, जैसे लोगों के साथ रहते हैं, जैसा सोचते हैं, जैसा पढ़ते हैं, वह सब हमारे अवचेतन मन में प्रवेशित हो जाता है| सूक्ष्म जगत की भी अनेक अच्छी-बुरी शक्तियाँ हमारे अवचेतन मन पर प्रभाव डालती हैं|
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अवचेतन मन ही हमारे उत्थान और पतन का कारण है| हमारे जीवन की प्रगति और अवनति का नियंत्रण व संचालन अवचेतन मन से ही होता है| अवचेतन मन को संस्कारित किये बिना हम भगवान की भक्ति, धारणा, ध्यान, समर्पण आदि नहीं कर सकते| यदि हम अवचेतन मन को प्रशिक्षित किये बिना ऐसा करने का प्रयास करेंगे तो विक्षेप आ जाएगा या उच्चाटन हो जाएगा| कोई श्रद्धा-विश्वास भी हमारे में जागृत नहीं होगा|
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अवचेतन मन एक कामधेनु या कल्पवृक्ष से कम नहीं है| आध्यात्मिक साधनाओं द्वारा हम अपने अवचेतन मन को संस्कारित भी करते हैं| बार बार हम परमात्मा से अहैतुकी प्रेम का चिंतन करेंगे तो वह अवचेतन मन में गहराई से बैठकर हमारा स्वभाव बन जाएगा| ऐसे ही धारणा, जप व कीर्तन आदि के द्वारा हम यही करते हैं|

यह विषय बहुत लंबा है अतः इसे यहीं विराम दे रहा हूँ|जो बात मैं व्यक्त करना चाहता था वह हो गयी है| सभी को शुभ कामनाएँ और नमन ! ॐ ॐ ॐ ||

परमात्मा एक श्रद्धा, विश्वास, निष्ठा और अनुभूति है .....

परमात्मा एक श्रद्धा, विश्वास, निष्ठा और अनुभूति है .....
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इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई सूर्योदय में विश्वास करता है या नहीं, सूर्योदय तो होगा ही| वैसे ही परमात्मा का अस्तित्व किसी के विश्वास/अविश्वास पर निर्भर नहीं हैं|

परमात्मा अपरिभाष्य हैं| परमात्मा को किसी परिभाषा में नहीं बाँध सकते| परमात्मा को परिभाषित करने का प्रयास वैसे ही है जैसे कनक कसौटी पर हीरे को कसने का प्रयास|

परमात्मा हमारा अस्तित्व है, जिसे जाने बिना जीवन में हम अतृप्त रह जाते हैं| उसे जानने का प्रयास स्वयं को जानने का प्रयास है|

वर्तमान क्षण अति अति गहन और विराट है| यह रहस्यों का रहस्य है|
देशकाल से परे शाश्वतता में स्थिर पूर्णता ही हमारा जीवन है|
मैं शाश्वत अनन्त असीम हूँ|
ॐ ॐ ॐ |  ॐ ॐ ॐ ||

Monday, 30 January 2017

गाँधी जी की पुण्य तिथि .....

मोहनदास करमचंद गाँधी जी (जिन्हें लोग महात्मा गाँधी कहते हैं) की आज पुण्य तिथि है| गाँधी जी का मैं पूर्ण सम्मान करता हूँ| इस तरह के युग पुरुष पृथ्वी पर बहुत कम जन्म लेते हैं|
उनके प्रति पूर्ण सम्मान के साथ इतने वर्षों के बाद कुछ प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं....
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(१) क्या अंग्रेजों को पता था कि गाँधी की ह्त्या होने वाली है?
१५ अगस्त १९४७ के बाद भी अप्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजों का ही राज था| गाँधी की सुरक्षा व्यवस्था क्यों हटा ली गयी थी? क्या इसीलिए कि वे उस समय अंग्रेजों के लिए किसी काम के नहीं रह गए थे?
जिस पिस्तौल से गाँधी की ह्त्या हुई वह किसकी थी और गोडसे को किसने दी?
क्या उसी पिस्तौल से चली गोली से ह्त्या हुई थी या किसी अन्य से?
अनेक प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि गाँधी की ह्त्या गोडसे ने नहीं की| गोडसे को तो मात्र मोहरा बनाया गया था, असली हत्यारा कोई और था| हिन्दुओं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दू महासभा को बदनाम करने और इन्हें आपस में लड़ाने हेतु गाँधी के विरुद्ध गोडसे जैसे कुछ युवकों को भड़काया गया और उनके हाथ में पिस्तौल दे दी गयी| उनसे गोली नहीं चली अतः किसी अंग्रेज पुलिस ऑफिसर ने ही वह गोली चलाई थी जिससे गांधीजी मरे थे| यह उच्चतम स्तर पर किया गया एक बहुत बड़ा षड्यंत्र था|
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(२) गाँधी की ह्त्या के तुरंत बाद पुणे में हज़ारों ब्राह्मणों की ह्त्या क्यों की गयी? क्या इसीलिए कि नाथूराम गोडसे एक ब्राह्मण था? उस जमाने में न तो मोबाइल फोन थे और न बढ़िया टेलीफोन व्यवस्था| गाँधी वध ३० जनवरी को हुआ और ३१ जनवरी की रात को ही पुणे की गलियों में चारपाई डालकर सो रहे ब्राह्मणों पर किरोसिन तेल डालकर उन्हें जीवित जला दिया गया| ३१ जनवरी की रात को ही पुणे में ब्रहामणों को घरों से निकाल निकाल कर सड़कों पर घसीट कर उनकी सामूहिक हत्याएं की गयी जिसमें लगभग छः हज़ार निर्दोष ब्राह्मण मारे गए|
उस घटना की कोई जाँच नहीं हुई और घटना को दबा दिया गया| ऐसा इतने संगठित रूप से कैसे किसने व क्यों किया?
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(३) गाँधी की नीतियों व विचारों से महर्षि श्रीअरविन्द बिलकुल भी सहमत नहीं थे| उन्होंने गाँधी के बारे में लिखा था कि गाँधी की नीतियाँ एक बहुत बड़े भ्रम और विनाश को जन्म देंगी, जो सत्य सिद्ध हुआ| महर्षि श्रीअरविद के वे लेख नेट पर उपलब्ध हैं| कृपया उन्हें पढ़ें|

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(४) गाँधी द्वारा आरम्भ खिलाफत आन्दोलन जो तुर्की के खलीफा को बापस गद्दीनशीन करने के लिए था, का क्या औचित्य था? क्या यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा नहीं थी? क्या इससे पकिस्तान की नींव नहीं पडी?
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(५) राजनितिक व सामाजिक रूप से गांधीजी का पुनर्मूल्यांकन क्या आवश्यक नहीं है?
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(६) श्रद्धांजली |

वन्दे मातरं | भारत माता की जय |

Sunday, 29 January 2017

आध्यात्मिक प्रगति का मापदंड .....

आध्यात्मिक प्रगति का मापदंड .....
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क्या हम बीते हुए कल से आज अधिक आनन्दमय और प्रसन्न हैं ?
यदि उत्तर हाँ में है तो हम उन्नति कर रहे हैं, अन्यथा अवनति कर रहे हैं|
 

 ध्यान में हमें जितनी अधिक शांति अनुभूत होती है उतने ही हम परमात्मा के समीप हैं|

 वर्तमान क्षण अति अति गहन और विराट है| यह रहस्यों का रहस्य है|
देशकाल से परे शाश्वतता में स्थिर पूर्णता ही हमारा जीवन है|
मैं शाश्वत अनन्त असीम हूँ|

ॐ ॐ ॐ ||