Wednesday, 23 November 2016

विश्व के विनाश और तृतीय विश्वयुद्ध या भविष्य में होने वाले किसी भी युद्ध का कारण मनुष्य का द्वेष (घृणा) और लोभ होगा .....

विश्व के विनाश और तृतीय विश्वयुद्ध या भविष्य में होने वाले किसी भी युद्ध का कारण मनुष्य का द्वेष (घृणा) और लोभ होगा .....
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यह लेख लिखते समय मेरे मन में किसी के प्रति भी कोई दुराग्रह, लोभ, घृणा या कोई द्वेष नहीं है| पूर्ण जिम्मेदारी और अपने निज अनुभवों से लिख रहा हूँ| मुझे योरोप के अनेक देशों, अमेरिका, कनाडा, और मुस्लिम देशों में सऊदी अरब, मिश्र, तुर्की, मोरक्को और दक्षिणी यमन जाने का अवसर मिला है| एशिया के मुस्लिम देशों में बांग्लादेश, मलेशिया और इंडोनेशिया भी जाने का अवसर मिला है| पूर्व सोवियत संघ में मध्य एशिया के अनेक मुसलमानों से मेरा परिचय था| मैंने रूसी भाषा जिस अध्यापिका से सीखी वह एक तातार मुसलमान थी| युक्रेन के ओडेसा नगर में एक अति विदुषी वयोवृद्ध तातार मुस्लिम महिला ने मुझे एक बार भोजन पर अपने घर निमंत्रित किया था| ये महिला दस वर्ष तक चीन में एक राजनीतिक बंदी रह चुकी थी| उनसे काफी कुछ जानने का अवसर मिला| अतः मैं योरोप के देशों और मुस्लिम विश्व की मानसिकता को बहुत अच्छी तरह समझता हूँ और अपने अध्ययन से प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व की स्थिति से भी अवगत हूँ| आज लगभग वैसी ही स्थिति बन रही है जो प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व थी| विश्व के भूगोल का भी मुझे बहुत अच्छा ज्ञान है और विश्व के इतिहास का भी अल्प अध्ययन है|
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इस समय पृथ्वी पर दो तरह की शक्तियां काम कर रही हैं ..... एक तो वह जो विश्व को युद्ध में धकेलना चाहती है, और दूसरी वह जो युद्ध को टालना चाहती है| वर्तमान में मनुष्य की मानसिकता, चिंतन और विचार इतने दूषित हो गए हैं कि युद्ध अपरिहार्य सा ही लगता है| अपने विचारों और सोच को सात्विक बना कर ही हम विनाश को टाल सकते हैं| अन्य कोई उपाय नहीं है|
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कोई मेरी बात को माने या न माने पर यह सत्य है कि विश्व की दुर्गति का एकमात्र कारण मनुष्य जाति के हिंसा, लोभ, अहंकार और वासना के भाव ही हैं| मनुष्य इतना हिंसक और भोगी हो गया है कि वह स्वयं ही स्वयं के विनाश को आमंत्रित कर रहा है| मनुष्य का स्वार्थी होना भी प्रबल हिंसा ही है|
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कोई भी विचार और संकल्प जिस पर आप दृढ़ रहते हैं वह विश्व के घटनाक्रम पर निश्चित रूप से प्रभाव डालता है|
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वर्तमान में विश्व में हो रहा घटनाक्रम तृतीय विश्वयुद्ध का कारण बन सकता है| अमेरिका के स्वार्थ इतने अधिक हैं कि वह भविष्य में युद्ध को नहीं टाल पायेगा| जर्मनी की आतंरिक परिस्थितियाँ उसे तटस्थ रखेंगी| जर्मनी में इस समय इतनी क्षमता नहीं है कि वह कोई युद्ध लड़ सके|
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इस समय मध्य पूर्व में तनाव का कारण .....
शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच की घृणा,
जेहादी मानसिकता,
ईसाइयों व मुसलमानों में द्वेष,
और पश्चिमी देशों व अमेरिका की तेल के स्त्रोतों पर अधिकार बनाए रखने की लालसा है|
इसी तरह दक्षिण चीन सागर में उस क्षेत्र के देशों के आर्थिक हित आपस में टकरा रहे हैं जो कभी भी युद्ध का कारण बन सकते हैं| भारत के भी आर्थिक हित उस क्षेत्र में हैं|
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अमेरिका व कुछ पश्चिमी देशों ने तेल उत्पादक देशों पर अपना वर्चस्व बनाकर रखा है| ये चाहते हैं कि जब तक यहाँ पर तेल है तब तक इनका वर्चस्व बना रहे| वे अरब देशों को बहुत बुरी तरह निचोड़ कर ही छोड़ेंगे|
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इराक में शिया वहाँ की कुल आबादी का लगभग पैंसठ प्रतिशत हैं, पर विगत में वहाँ का शासन सुन्नियों के हाथों में रहा था जिन्होंने शियाओं को दबाकर रखा| जब ईरान में इस्लामी क्रांति हुई तब वहाँ के नए शासकों ने वहाँ के राजा शाह पहलवी को तो भगा ही दिया, साथ साथ अमेरिका को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया| अमेरिका ने अपमानित महसूस कर ईरान से बदला लेने के लिए इराक को भारी मात्रा में हथियार दिए और शतअलअरब पर अधिकार के लिए इराक व ईरान को आपस में लड़ाया जिसमें दोनों देशों के अनगिनत लाखों लोग मारे गए| इस युद्ध से किसी को भी लाभ नहीं हुआ था| इराक को अमेरिका ने ही शक्तिशाली बनाया था| जब इराक ने अमेरिकी वर्चस्व को मानने से मना कर दिया तो अमेरिका ने बिलकुल झूठे बहाने बनाकर ईराक पर आक्रमण कर दिया और उस देश को बर्बाद कर दिया| इससे पूर्व के घटनाक्रम में इराक को कुवैत पर अधिकार करने के लिए भी अमेरिका ने ही उकसाया था| अमेरिका के झाँसे में आकर इराक ने कुवैत पर अधिकार कर लिया जिससे अमेरिका को इराक पर आक्रमण करने का बहाना मिल गया| उस युद्ध में अमेरिका ने एक पाई भी खर्च नहीं की, सारा खर्च सऊदी अरब से वसूल किया| अपने देश के जनमत के दबाब के कारण अमेरिका जब इराक से हटा तो वहाँ चुनाव करवाए जिससे बहुमत के कारण शिया लोगों का शासन स्थापित हो गया और सुन्नियों में असंतोष फ़ैल गया|
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सीरिया में स्थिति इसके विपरीत है| वहाँ सुन्नी बहुमत है पर शासन एक शिया तानाशाह असद के हाथ में है जो सुन्नियों को क्रूरता से दबा कर रखता है| सुन्नियों ने असद के विरुद्ध विद्रोह किया| अमेरिका भी असद को हटाना चाहता है इसलिए उसने सुन्नियों की सहायता की| पर असद ने अपने समर्थन में अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी रूस को अपने देश में बुला लिया| रूस ने सीरिया में अपने सैन्य अड्डे स्थापित कर लिए और खुल कर असद के समर्थन में आ गया| अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्य में ईरान ने पूरा सहयोग किया|
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असद के विरोध में अमेरिका ने सीरिया के सुन्नी मुसलमानों को उकसाया जिन्होनें इराक के सुन्नी मुसलमानों के साथ मिलकर ISIS (इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया) की स्थापना कर ली| इस दुर्दांत आतंकी संगठन को आरम्भ में शस्त्रास्त्र अमेरिका ने ही दिए| ISIS अमेरिका की सहायता से खूब शक्तिशाली बन गया| उसने सीरिया और इराक के बहुत बड़े भूभाग और तेल के कुओं पर अधिकार कर लिया और बहुत समृद्ध और प्रभावशाली बन गया|
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ISIS ने इराक की सेना को भगा दिया और उसके हज़ारों शिया सैनिकों की ह्त्या कर दी| फिर शक्तिशाली होकर ISIS अपनी मनमानी पर उतर आया और उसने शिया व अन्य गैर सुन्नियों की ह्त्या का अभियान चला दिया| उसने लाखों शियाओं, यज़ीदियों और कुर्दों की निर्ममता से ह्त्या कर दी व उनकी महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाकर बेच दिया| इससे शिया और सुन्नियों में एक स्थायी विभाजन और घृणा हो गयी है|
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ISIS यहीं पर नहीं रुका| उसने अपने नक्शों में पूरा योरोप, भारत, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड तक को दिखा दिया और पूरे विश्व पर वहाबी सुन्नियों के राज्य का संकल्प कर डाला| ISIS का लक्ष्य है कि या तो सभी उसके अनुयायी बन जाएँ या उसके गुलाम बनने या मरने के लिए तैयार हो जाएँ| उसका लक्ष्य सम्पूर्ण विश्व पर अपनी सत्ता स्थापित करने का है|
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जब उसने ईसाइयों की ह्त्या करनी आरम्भ कर दी तब अमेरिका ने उसके विरुद्ध आधे मन से कारवाई आरम्भ कर दी| अमेरिका कभी भी ISIS को समाप्त नहीं करना चाहता था, वह सिर्फ उसका उपयोग करना चाहता था| यहाँ यह बताना चाहूंगा कि जब लेबनान के गृहयुद्ध में अधिकांश ईसाईयों की वहाँ के मुस्लिम चरम पंथियों ने ह्त्या कर दी थी तब से योरोप में ईसाईयों और मुसलमानों के मध्य में भी घृणा की एक दीवार खिंच गयी है|
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एक बार दो बिल्लियाँ एक रोटी के लिए लड़ पड़ीं| उन्होंने एक बन्दर को आधी आधी रोटी बराबर बाँटने के लिए न्यायाधीश बनाया| बन्दर ने वह रोटी आधी आधी कर के एक तराजू के दोनों पलड़ों पर रख दी| जिधर पलड़ा भारी होता उधर से बन्दर रोटी तोड़ कर खा जाता| इस तरह बन्दर सारी रोटी खा गया और बिल्लियों को कुछ भी नहीं मिला| इस कहानी से आप सब कुछ समझ सकते हैं| अमेरिका वह पुलिस और न्यायाधीश है जो दुनिया को लड़ाकर उनसे कमाई कर रहा है|
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इस लेख में मैंने कम से कम शब्दों में मध्यपूर्व की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है जो एक विश्व युद्ध में बदल सकती है| एक बात याद रखें कि जो दूसरों को तलवार से काटता है वह स्वयं भी तलवार से ही काटा जाता है|
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जो सर्वश्रेष्ठ योगदान आप कर सकते हो वह यह है कि .....
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(१) भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से आप स्वयं शक्तिशाली बनो| भगवान सिर्फ मार्गदर्शन कर सकते हैं, शक्ति दे सकते हैं पर आपको स्वयं की रक्षा तो स्वयं को ही करनी होगी| अलग से आपकी रक्षा के लिए भगवान नहीं आयेंगे| भगवान उसी की रक्षा करेंगे जो स्वयं की रक्षा करेगा|
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(२) स्वयं के जीवन में परमात्मा को केंद्रबिंदु बनाओ| राग, द्वेष और अहंकार से ऊपर उठकर निरंतर परमात्मा की चेतना में रहने का अभ्यास करो|
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(३) नित्य समष्टि यानि सब के कल्याण के लिए भगवान से प्रार्थना करो|
जब अनेक लोग मिलकर एक साथ अपने हाथ उठाकर सब के कल्याण की प्रार्थना करते हैं तब निश्चित रूप से उसका प्रभाव पड़ता है|
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सबका कल्याण हो, सब सुखी रहें, कोई भूखा, बीमार या दरिद्र न रहे | सब में पारस्परिक सद्भाव और प्रेम हो | सब में प्रभु के प्रति अहैतुकी परम प्रेम जागृत हो |
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ॐ विश्वानि देव सवितः दुरितानि परासुव यद् भद्रं तन्न्वासुव | ॐ शांति शांति शांतिः ||
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कृपा शंकर
१८ नवम्बर २०१५

मात्र आध्यात्मिक/धार्मिक पुस्तकें/लेख पढने से या मात्र प्रवचन सुनने से कुछ नहीं होगा .....

मात्र आध्यात्मिक/धार्मिक पुस्तकें/लेख पढने से या मात्र प्रवचन सुनने से कुछ नहीं होगा|
सत्य का बोध स्वयं करना होगा, दूसरा कोई यह नहीं करा सकता|
माया के वशीभूत होकर हम निरंतर भ्रमित हो रहे हैं|
सच्चिदानंद के प्रति पूर्ण परम प्रेम जागृत कर उनको पूर्ण समर्पित होने का निरंतर प्रयास ही साधना है और पूर्ण समर्पण ही लक्ष्य है|
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नित्य नियमित ध्यान साधना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है| अन्यथा परमात्मा को पाने की इच्छा ही समाप्त हो जाती है| मन पर निरंतर मैल चढ़ता रहता है जिस की नित्य सफाई आवश्यक है|
सप्ताह में एक दिन (हो सके तो गुरुवार को) अन्य दिनों से कुछ अधिक ही समय परमात्मा को देना चाहिए| जो भी समय हम परमात्मा के साथ बिताते हैं, वह सबसे अधिक मुल्यवान है| अतः कुछ अधिक समय अपनी व्यक्तिगत साधना में बिताएँ|
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हे सच्चिदानंद गुरु रूप परम ब्रह्म आपको नमन !
मेरे कूटस्थ चैतन्य में आप निरंतर हैं| मेरी हर साँस, मेरी हर सोच, मेरा सम्पूर्ण अस्तित्व आप ही हैं| आपको बारंबार नमन !

ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

Wednesday, 16 November 2016

मुक्त और पारदर्शी अर्थव्यवस्था ........

मुक्त और पारदर्शी अर्थव्यवस्था ........
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अर्थशास्त्र कभी कभी अनर्थशास्त्र भी हो सकता है| भारत का अर्थशास्त्र ..... अनर्थशास्त्र में परिवर्तित हो रहा था जिसकी रक्षा का कार्य माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आरम्भ किया है| इसके लिए उन्हें शुभ कामनाएँ देता हुआ कुछ सुझाव देना चाहता हूँ|
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आप इस लेख को शेयर ही नहीं copy/paste भी कर सकते हैं, अपने नाम से छाप भी सकते हैं, पर कैसे भी इसे भारत की आर्थिक सता के गलियारों तक और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाइये| यह मेरी आपसे प्रार्थना है|
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भारत की अर्थव्यवस्था को मुक्त व पारदर्शी बनाने के लिए मुद्रा का प्रयोग कम से कम होना चाहिए| इसके लिए सारा लेन-देन बैंकों के माध्यम से डिजिटल हो|
इसके लिए सरकार को चाहिए कि ......

(1) स्वाईप मशीनों का अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए दुकानदारों को प्रोत्साहित किया जाए| स्वाइप करने पर एक बार तो कुछ वर्षों तक कोई ट्रांजेक्शन फीस न हो| डेबिट/क्रेडिट कार्डों से ही अधिक से अधिक खरीददारी और बिक्री हो| वर्तमान में गुजरात में अधिक से अधिक खरीददारी डेबिट कार्डों से ही होती है| यहाँ तक कि होटल/रेस्टोरेंट वाले भी भुगतान स्वाइप मशीन पर डेबिट कार्डों से स्वीकार करते हैं|
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(2) चेकबुक के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाए| किसी को भेंट में रुपये पैसे देने हों तो वे चेक़ से ही दिए/लिए जाएँ|
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(3) सारे सरकारी भुगतान डिजिटल हों| नकदी के प्रयोग को हतोत्साहित किया जाए|
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मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि कम पढ़े लिखे लोग भी आजकल डिजिटल लेन-देन को समझते हैं|
माननीय श्री नरेन्द्र मोदी का उद्देश्य सफल हो| शुभ कामनाएँ|
ॐ ॐ ॐ ||
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पुनश्चः >>>>>
बड़ी राशि के लेन-देन के लिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड, चेक बुक, payTm, डिजिटल ट्रांसफर आदि का प्रयोग करें|
छोटी राशि के लिए १००, ५०, २०, १०, ५ के नोट और सिक्कों का प्रयोग करें|
देशद्रोहियों, जमाखोरों, नक्सलियों, वामपंथियों और जिहादी आतंकियों की तरह परेशान मत होइए| भारत सरकार पर विश्वास कीजिये और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को पूर्ण समर्थन दीजिये, उनका कोई विकल्प नहीं है|

पञ्चमुखी महादेव .....

पञ्चमुखी महादेव .....
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ब्रह्मांड पाँच तत्वों से बना है ..... जल, पृथ्वी, अग्नि, वायु और आकाश| भगवान शिव पंचानन अर्थात पाँच मुख वाले है| शिवपुराण के अनुसार ये पाँच मुख हैं .....
ईशान, तत्पुरुष, अघोर, वामदेव तथा सद्योजात|
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(1) भगवान शिव के ऊर्ध्वमुख का नाम 'ईशान' है जो आकाश तत्व के अधिपति हैं| इसका अर्थ है सबके स्वामी|

(2) पूर्वमुख का नाम 'तत्पुरुष' है, जो वायु तत्व के अधिपति हैं|
(3) दक्षिणी मुख का नाम 'अघोर' है जो अग्नितत्व के अधिपति हैं|
(4) उत्तरी मुख का नाम वामदेव है, जो जल तत्व के अधिपति हैं|
(5) पश्चिमी मुख को 'सद्योजात' कहा जाता है, जो पृथ्वी तत्व के अधिपति हैं|
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भगवान शिव पंचभूतों (पंचतत्वों) के अधिपति हैं इसलिए ये 'भूतनाथ' कहलाते हैं|
भगवान शिव काल (समय) के प्रवर्तक और नियंत्रक होने के कारण 'महाकाल' कहलाते है| काल की गणना 'पंचांग' के द्वारा होती है| काल के पाँच अंग ..... तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं|
रुद्राक्ष सामान्यत: पंचमुखी ही होता है|
शिव-परिवार में भी पांच सदस्य है..... शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदीश्वर| नन्दीश्वर साक्षात धर्म हैं|
शिवजी की उपासना पंचाक्षरी मंत्र .... 'नम: शिवाय' द्वारा की जाती है|
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शिव का अर्थ है ..... कल्याणकारी| शंभू का अर्थ है ..... मंगलदायक| शंकर का अर्थ है ..... शमनकारी और आनंददायक|
ब्रहृमा-विष्णु-महेश तात्विक दृष्टि से एक ही है| इनमें कोई भेद नहीं है|
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योगियों को कूटस्थ में एक स्वर्णिम आभा के मध्य एक नीला प्रकाश दिखाई देता है जिसके मध्य में एक श्वेत पंचकोणीय नक्षत्र दिखाई देता है...... जो पंचमुखी महादेव ही है| गहन ध्यान में योगीगण उसी का ध्यान करते हैं|
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शिव-तत्व को जीवन में उतार लेना ही शिवत्व को प्राप्त करना है और यही शिव होना है| यही हमारा लक्ष्य है|
ॐ नमः शंभवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च || ॐ नमःशिवाय || ॐ ॐ ॐ ||

यह मैं एक अनुभूत सत्य कह रहा हूँ .......

यह मैं एक अनुभूत सत्य कह रहा हूँ .......
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हमारे मन में यदि यश की, प्रशंसा की और प्रसिद्धि की कामना है तो ये हमें प्राप्त तो हो जायेंगी पर साथ साथ इसका निश्चित दंड भी अपयश, निंदा, और अपकीर्ति (बदनामी) के रूप में भुगतना ही पड़ेगा|
इसके विस्तार में नहीं जाऊंगा, इतना ही पर्याप्त है|
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जो कुछ भी हम इस सृष्टि में प्राप्त करना चाहते हैं वह तो हमें मिलता ही है पर उसका विपरीत भी निश्चित रूप से मिलता है| यह प्रकृति का नियम है|
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इस से बचने का एक ही उपाय है ........ हम कर्ताभाव, कामनाओं और अपेक्षाओं से मुक्त हों| इसके लिए हमें साधना/उपासना करनी ही पड़ेगी|
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भगवान परमशिव सब का कल्याण करें | ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

मेरा काला धन ....

मेरा काला धन ....
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किसी मित्र ने आज मुझ से पूछा कि मेरे पास कितना काला धन है?
मेरा उत्तर था पाँच-छः बोरियों में खूब सारा काला धन घर के पिछवाड़े में पडा है जिसमें से आप चाहे जितना फ्री में ले सकते हैं|
उनकी उत्सुकता और अधिक बढ़ गई जब मैंने कहा कि काले धन को जलाकर मैं नित्य नहाने के लिए पानी गर्म करता हूँ|
उन्होंने देखने की इच्छा प्रकट की|
मैंने घर के पिछवाड़े में बोरियों में भरे कोयले और लकडियों को दिखाया कि यह ही मेरा काला धन है जो पानी गर्म करने के काम आता है|
पास में ही ईंटों पर रखे लोहे के जुगाड़ चुल्हे को देखकर वे समझ गए कि मैं लकडियाँ जलाकर नहाने का पानी गर्म करता हूँ और हर बार लकडियाँ बुझाने के पश्चात कुछ कोयले बच जाते हैं जिन्हें मैं काला धन कहता हूँ|
तो मित्रो, ये लकड़ियों के कोयले ही मेरा काला धन हैं|
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एक हज़ार और पाँच सौ के नोट बदलने के निर्णय से मुझे कोई शिकायत नहीं है| सिर्फ एक दिन छुट्टे रुपये न होने से थोड़ी देर के लिए मामूली सी असुविधा हुई|
राष्ट्रहित में यह निर्णय बहुत अच्छा हुआ है जिसका मैं पूर्ण समर्थन करता हूँ|
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मोदी जी सफल हुए तो निकट भविष्य में भारत में मुद्रा के रूप में नोटों का प्रयोग बहुत कम हो जाएगा और सारा लेन-देन बैंकों के माध्यम से ही होगा| यह एक बहुत बड़ी उपलब्धी होगी|

मेरा एक ही सुझाव है कि क्रेडिट या डेबिट कार्ड से सामान खरीदने पर कभी भी कोई सरचार्ज नहीं हो| अधिक से अधिक खरीददारी डेबिट कार्डों से हों|
प्रधान मंत्री मोदी जी को शुभ कामनाएँ| वे अपने उद्देश्य में सफल हों|

उन्होंने छुड़ाए थे गज के वो बंधन, वे ही मेरे बंधन छुड़ाया करेंगे ......

उन्होंने छुड़ाए थे गज के वो बंधन, वे ही मेरे बंधन छुड़ाया करेंगे ......
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{1} अब तो मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार को उस चोर-जार-शिखामणि, कुहुक-शिरोमणि और दुःख-तस्कर हरि ने चुरा लिया है| उस तस्कर का आकर्षण इतना प्रबल है कि छुटाने से नहीं छूटता| अब उससे हमें प्रेम हो गया है| उस हरि ने अब ह्रदय में अभीप्सा की प्रचंड अग्नि भी जला दी है|
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उस हरि ने कभी गजराज को बंधनों से मुक्त किया था, अब मुझे भी उन बंधनों से मुक्त करेंगे| उस दुःख-तस्कर, चोर-जार-शिखामणि और कुहुक-शिरोमणि हरि से बस एक ही निवेदन है कि जो कुछ भी थोड़ा-बहुत तथाकथित 'मैं' और 'मेरापन' रूपी अज्ञान बचा है उसे भी चुरा ले| मेरे लिए पूर्ण समर्पण के अतिरिक्त अन्य सब मार्ग बंद हो गये हैं| मार्ग के अवरोध चोरी चोरी वह कब हटा लेगा इसका पता ही नहीं चलेगा|
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{2}भारत में प्रेमवश भक्तों ने भगवान को उलाहना देते हुए उन्हें ईर्ष्यालु और चोर तक कहा है| पर किसी ने भी उनकी इस बात का कभी बुरा या ईशनिंदा नहीं माना है| गोपाल सहस्त्रनाम में भगवान को तस्कर और चोरों का चोर कहा है .....
"बालक्रीड़ासमासक्तो नवनीतस्य तस्करः |
गोपालकामिनीजारश्चोरजारशिखामणि: ||"
यहाँ भगवान को नवनीत तस्कर और चोरजारशिखामणि कहा गया है| इसका अर्थ है कि भगवान के समान चोर और जार और कोई है ही नहीं, और हो सकता भी नहीं है| दुसरे चोर और जार तो केवल अपना ही सुख चाहते हैं, पर भगवान केवल दूसरों के सुख के लिए चोर और जार की लीला करते हैं| उनकी ये दोनों ही लीलाएँ दिव्य, अलौकिक और विलक्षण हैं|
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संसारी चोर तो केवल वस्तुओं की ही चोरी करते हैं, परन्तु भगवान् वस्तुओं के साथ-साथ उन वस्तुओं के राग, आसक्ति और मोह आदि को भी चुरा लेते है| वे सुखासक्ति का भी हरण कर लेते हैं, जिससे कामाकर्षण न रहकर केवल विशुद्ध प्रेमाकर्षण रह जाता है| अन्य की सत्ता न रहकर केवल भगवान की सत्ता रह जाती है|
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भगवान अपने भक्तों में किसी को चोर और जार रहने ही नहीं देते, उनके चोर और जारपने को ही हर लेते हैं| कनक और कामिनी की इच्छा ही मनुष्य को चोर और जार बनाती है| भगवन अपने भक्त की इस इच्छा को ही हर लेते हैं इसी लिए वे "हरि" हैं| आसक्ति का सर्वदा अभाव करने वाले होने से भगवान् चोर और जार के भी शिखामणि हैं| अर्थात चोरों के भी चोर हैं जो चोरी की इच्छा को ही चुपचाप चुरा लेते हैं|
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कुहुक का अर्थ होता है ..... कोहरा| जैसे कोहरे में कोई छिप जाता है वैसे ही वे अपने मायावी आवरण रुपी कोहरे में छिपे हैं| इसलिए वे कुहुक-शिरोमणि हैं| अब तो उनके बिना हम रह ही नहीं सकते|
दुःख तस्कर वे हैं क्योंकि अपने भक्तों के दुःखों को हर लेते हैं|
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एक प्रचलित पुराना भजन याद आ रहा है .....

कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे |
कहीं तो मिलेंगे, वो बाँके बिहारी,
उन्हीं के चरण चित लगाया करेंगे।
जो रुठेंगे हमसे वो बाँके बिहारी,
चरण पड़ उन्हें हम मनाया करेंगे।
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥
उन्हें प्रेम डोरी से हम बाँध लेंगे,
तो फिर वो कंहाँ भाग जाया करेंगे।
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥
उन्होंने छुड़ाए थे गज के वो बंधन,
वहीँ मेरे संकट मिटाया करेंगे।
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥
उन्होंने नचाये थे ब्रह्माण्ड सारे,
मगर अब उन्हें हम नचाया करेंगे।
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥